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Nagar Palika Multai : संचित निधि से बिजली बिल अदा करेगी नपा, ठेकेदार को भी कर चुकी 40 लाख का भुगतान

Nagar Palika Multai: NAPA will pay the electricity bill from the accumulated fund, has also paid 40 lakhs to the contractor

Nagar Palika Multai : संचित निधि से बिजली बिल अदा करेगी नपा, ठेकेदार को भी कर चुकी 40 लाख का भुगतान▪️ राकेश अग्रवाल, मुलताई

Nagar Palika Multai : नगर पालिका की संचित निधि से सिविल लाइन के ठेकेदार को 40 लाख रुपए के भुगतान करने के बाद अब बची निधि से नगर पालिका बिजली बिल भरने की तैयारी में है। इसके लिए परिषद की बैठक में प्रस्ताव भी रखा गया है। जिसमें साफ तौर पर लिखा गया है कि नगर पालिका की संचित निधि से बिजली बिल भरने के लिए प्रस्ताव एवं निर्णय लिया जाएगा।

बताया जा रहा है कि सीवर लाइन के लिए आई राशि को पहले दूसरे कामों में खर्च कर दिया गया, जिसके बाद सिविल लाइन का काम अधर में लटक गया है। ऐसे में ठेकेदार को भुगतान करने के लिए नगर पालिका के पास राशि नहीं थी। जिसके चलते संचित निधि से 40 लाख रुपए का भुगतान ताबड़तोड़ कर दिया गया। इधर फंड की कमी से जूझ रही नगर पालिका के पास कर्मचारियों का वेतन देने और बिजली बिल भरने तक की राशि का जुगाड़ नहीं हो पा रहा है। ऐसे में संचित निधि से ही बिजली बिल भरने की तैयारी की जा रही है। जिसके लिए परिषद में प्रस्ताव लाया जा रहा है। यदि यह प्रस्ताव पास हो जाता है तो नगर पालिका अगले कई महीनो तक आसानी से बिजली बिल भर पाएगी।

यह बात भी सामने आ रही है कि सीवर लाइन के ठेकेदार के अलावा अन्य कई ठेकेदारों को भी संचित निधि से का भुगतान किया गया है। वहीं यह भी दलील दी जा रही है कि इसके लिए उच्च अधिकारियों से अनुमति ली गई थी। इस पूरे मामले को लेकर सीएमओ आरके इवनाती का कहना है कि सिविल लाइन के ठेकेदार को भुगतान किया गया था उसे समय वे सीएमओ नहीं थे।वहीं उन्हें यह जानकारी नहीं है कि उच्च अधिकारियों से कोई पत्र आया था,जिसके बाद भुगतान किया गया है। हालांकि उन्होंने पत्र नहीं देखा है। वहीं उन्होंने इस बात की जानकारी दी है कि परिषद में संचित निधि से बिजली बिल भरने का प्रस्ताव रखा गया है। जिस पर सहमति बनने के बाद इसे उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा।

क्या होती है संचित निधि (Nagar Palika Multai)

नगर पालिका को होने वाली कुल आय की दो प्रतिशत राशि अलग से डिपॉजिट की जाती है। इसे ही संचित निधि कहा जाता है। विकट परिस्थिति में शासन की अनुमति के बाद इस राशि को उपयोग में लिया जाता हैं। संचित निधि में से जितनी राशि निकाली जाती हैं। उसे बाद में जमा भी करना होता है।

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