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Dhana Village MP: एमपी का अनूठा गांव ढाना, जहां हर घर में सरकारी कर्मचारी, लोग मानते हैं भोलेनाथ की कृपा

Dhana Village MP: Dhana, a unique village in MP, has government employees in every household and people believe it is the grace of Lord Shiva.

Dhana Village MP: एमपी का अनूठा गांव ढाना, जहां हर घर में सरकारी कर्मचारी, लोग मानते हैं भोलेनाथ की कृपा
Dhana Village MP: एमपी का अनूठा गांव ढाना, जहां हर घर में सरकारी कर्मचारी, लोग मानते हैं भोलेनाथ की कृपा

Dhana Village MP: सरकारी नौकरी पाने के लिए लोग वर्षों तक तैयारी करते हैं, कोचिंग लेते हैं, प्रतियोगी परीक्षाओं में किस्मत आजमाते हैं और कभी-कभी तरह-तरह के उपाय भी करते हैं। लेकिन मध्यप्रदेश के सागर जिले में एक ऐसा गांव है, जहां के लोगों का विश्वास है कि यहां सरकारी नौकरी मेहनत के साथ-साथ भगवान शिव की विशेष कृपा से मिलती है। इस गांव की पहचान ही ऐसी बन गई है कि लोग इसे सरकारी नौकरियों वाला गांव कहने लगे हैं।

ढाना गांव की अनोखी पहचान

सागर जिले में स्थित ढाना ग्राम पंचायत अपनी एक खास पहचान के कारण दूर-दूर तक जानी जाती है। सागर-रहली मार्ग पर बसे इस गांव के पास मिलिट्री स्टेशन, एयरस्ट्रिप और एक एविएशन स्कूल भी संचालित होता है। गांव के लोगों के अनुसार यहां शिक्षा को बहुत महत्व दिया जाता है। अधिकतर परिवारों में उच्च शिक्षित सदस्य हैं और बड़ी संख्या में लोग पुलिस, सेना, शिक्षा विभाग और अन्य शासकीय विभागों में कार्यरत हैं। कई घर ऐसे भी बताए जाते हैं, जहां बच्चों को छोड़कर लगभग सभी सदस्य किसी न किसी सरकारी सेवा में हैं।

सरकारी सेवा में बड़ी भागीदारी

गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यहां के करीब 80 से 90 प्रतिशत लोग किसी न किसी शासकीय पद पर कार्यरत हैं। कुछ लोग निजी क्षेत्र में भी अच्छे पदों पर काम कर रहे हैं, लेकिन सरकारी नौकरी को यहां विशेष सम्मान प्राप्त है। पुलिस और सेना में यहां के युवाओं की संख्या उल्लेखनीय बताई जाती है। शिक्षा के क्षेत्र में भी यहां के कई लोग शिक्षक और उच्च पदों पर कार्यरत रहे हैं।

Dhana Village MP: एमपी का अनूठा गांव ढाना, जहां हर घर में सरकारी कर्मचारी, लोग मानते हैं भोलेनाथ की कृपा

पटनेश्वर धाम से जुड़ी आस्था

ढाना गांव के पास स्थित पटनेश्वर मंदिर को यहां के लोग अपनी आस्था का केंद्र मानते हैं। गांववासियों का विश्वास है कि इस मंदिर में विराजे भगवान शिव की कृपा से ही उन्हें रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं। जो युवा सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं, वे परिवार के साथ यहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना करते हैं और मंदिर के कार्यों में सहयोग भी देते हैं। गांव के लोगों का कहना है कि वे अपनी सफलता का श्रेय केवल पढ़ाई को नहीं, बल्कि भगवान की कृपा को भी देते हैं।

मंदिर का ऐतिहासिक संबंध

पटनेश्वर मंदिर में स्थापित शिवलिंग को स्वयंभू माना जाता है। मंदिर के निर्माण को लेकर स्थानीय परंपरा इसे बाजीराव पेशवा के समय से जोड़ती है। बताया जाता है कि महाराजा छत्रसाल और बाजीराव पेशवा के बीच हुए ऐतिहासिक प्रसंगों के बाद बुंदेलखंड क्षेत्र में मराठा शासन का प्रभाव बढ़ा। कहा जाता है कि छत्रसाल ने बाजीराव पेशवा को अपना पुत्र मानते हुए अपने राज्य का बड़ा हिस्सा उन्हें सौंप दिया था। बाद में इस क्षेत्र की जिम्मेदारी गोविंद राव खेर को दी गई।

गोविंद राव खेर की पत्नी लक्ष्मी बाई धार्मिक प्रवृत्ति की थीं। रहली उनका प्रमुख ठिकाना था। उन्होंने रानगिर में हरसिद्धि माता मंदिर, टिकीटोरिया मंदिर और पंढरपुर में विट्ठल मंदिर का निर्माण कराया। यात्रा के दौरान वे ढाना के पास पटना गांव में विश्राम करती थीं, जहां प्राचीन शिव प्रतिमा स्थापित थी। स्थानीय मान्यता है कि विश्राम के दौरान उन्हें स्वप्न आया, जिसके बाद यहां शिव मंदिर और बावड़ी का निर्माण कराया गया। पटना गांव के नाम पर ही इस मंदिर को पटनेश्वर कहा जाने लगा।

रामराम महाराज की कथा

मंदिर परिसर में रामराम महाराज की कुटी भी स्थित है। स्थानीय लोगों के अनुसार वे ब्रिटिश काल में सेना में सिपाही थे और भगवान शिव के अनन्य भक्त थे। ड्यूटी के अतिरिक्त उनका अधिकांश समय मंदिर में सेवा में बीतता था। एक प्रसंग के अनुसार एक दिन मंदिर के पुजारी नहीं पहुंचे तो उन्होंने स्वयं पूजा की और ड्यूटी पर देर से पहुंचे। जब अधिकारियों को इसकी जानकारी दी, तो उन्हें बताया गया कि ड्यूटी रजिस्टर में उनके हस्ताक्षर दर्ज हैं और वे ड्यूटी कर चुके हैं। इस घटना को लोगों ने भगवान शिव की कृपा के रूप में देखा। इसके बाद रामराम महाराज का जीवन पूरी तरह भक्ति में समर्पित हो गया। इसी घटना के बाद से गांव में यह विश्वास और गहरा हो गया कि नौकरी भगवान की कृपा से मिलती है।

मेलों और धार्मिक आयोजनों की परंपरा

पटनेश्वर धाम में बसंत पंचमी और महाशिवरात्रि पर बड़े मेले का आयोजन होता है। इन अवसरों पर आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। सामान्य दिनों में भी मंदिर में दर्शनार्थियों की भीड़ रहती है। खासकर युवा वर्ग नियमित रूप से यहां आकर पूजा करता है और नौकरी सहित अन्य मनोकामनाएं मांगता है।

आस्था और परिश्रम का है यहाँ संगम

ढाना गांव की कहानी केवल आस्था की नहीं, बल्कि शिक्षा और परिश्रम की भी है। यहां के लोग पढ़ाई को महत्व देते हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे रहते हैं। हालांकि वे सफलता का श्रेय भगवान को देते हैं, लेकिन गांव में शिक्षा के प्रति जागरूकता भी साफ दिखाई देती है। यही कारण है कि यह गांव सरकारी नौकरियों के लिए एक मिसाल के रूप में देखा जाने लगा है।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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