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Recovery After Retirement: रिटायरमेंट के बाद वसूली पर हाई कोर्ट की सख्ती, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बड़ी राहत

Recovery After Retirement: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का अहम आदेश, तृतीय-चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से रिटायरमेंट के बाद नहीं की जा सकेगी रिकवरी

Recovery After Retirement: रिटायरमेंट के बाद वसूली पर हाई कोर्ट की सख्ती, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बड़ी राहत
Recovery After Retirement: रिटायरमेंट के बाद वसूली पर हाई कोर्ट की सख्ती, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बड़ी राहत

Recovery After Retirement: मध्य प्रदेश के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए हाई कोर्ट का एक अहम फैसला सामने आया है, जो भविष्य में उनकी आर्थिक और मानसिक परेशानी को काफी हद तक कम कर सकता है। अदालत ने साफ कर दिया है कि रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों से किसी भी तरह की रकम वसूलना नियमों के खिलाफ है।

अदालत ने कार्रवाई को बताया नियमों के विपरीत

जबलपुर में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद किसी भी कर्मचारी से रिकवरी करना कानूनन सही नहीं है। अदालत ने इस तरह की कार्रवाई को नियमों के विपरीत बताया है।

पेंशन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह बात आई कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के पहले से मौजूद आदेशों के बावजूद पेंशन भुगतान आदेश जारी करते समय वसूली के निर्देश दिए जा रहे हैं। इस स्थिति पर अदालत ने नाराजगी जाहिर की और इसे गंभीर लापरवाही माना।

मुख्य सचिव को दिए यह निर्देश

हाई कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी जिलों में पदस्थ पेंशन अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की जानकारी दी जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अनावश्यक रूप से कोर्ट का दरवाजा न खटखटाना पड़े।

सब इंस्पेक्टर के पद से हुए थे सेवानिवृत्त

यह मामला जबलपुर निवासी रोहणी प्रसाद पटेल की याचिका पर सामने आया। रोहणी प्रसाद पटेल वर्ष 2017 में सब इंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनके अधिवक्ता सचिन पांडे ने अदालत को बताया कि रिटायरमेंट के बाद विभाग ने उनके खिलाफ वसूली का आदेश जारी किया था।

कोर्ट ने पूर्व फैसलों का दिया हवाला

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के रफीक मसीह प्रकरण और हाई कोर्ट के जगदीश प्रसाद मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि सेवा काल में किसी तरह का वचन पत्र देने के बावजूद सेवानिवृत्ति के बाद रिकवरी नहीं की जा सकती।

60 दिन में राशि लौटाने का आदेश

हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ जारी वसूली आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। साथ ही निर्देश दिया है कि यदि अब तक कोई रकम वसूल की गई है, तो उसे छह प्रतिशत ब्याज के साथ 60 दिनों के भीतर लौटाया जाए। इस फैसले से प्रदेश के हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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