Betul News : बैतूल और भोपाल के कई समाचार क्यों छापे जा रहे ब्लैंक..? प्रदेश की पत्रकारिता के इतिहास में पहली बार आई ऐसी नौबत
मध्यप्रदेश के बैतूल से प्रकाशित सांध्य हिंदी दैनिक सांझवीर टाईम्स के संपादक पंकज सोनी पर बीते 29 अक्टूबर को तथाकथित महिलाओं द्वारा किए गए हमले में षडयंत्र रचने वालों पर अब तक पुलिस कार्यवाही न होने से पत्रकारों में रोष बढ़ता जा रहा हैं। इस घटना के बाद चौथे स्तंभ पर हुए हमले को लेकर स्थानीय और राजधानी के भी कई पत्रकारों और संगठनों द्वारा पिछले 3 दिनों से अखबारों में ब्लैंक स्पेस छोड़कर विरोध जताया जा रहा हैं। स्थानीय और भोपाल के कई मीडिया संस्थानों ने अपना पूरा एक पेज विरोध स्वरूप ब्लैंक (खाली) छोड़कर इस पर कोई भी खबर नहीं प्रकाशित की। इसके बावजूद बैतूल पुलिस ने षड्यंत्र रचने वालों पर कार्यवाही नहीं की है।
चौकानें वाली बात यह है कि नर्मदापुरम आईजी दीपिका सूरी द्वारा महिला की शिकायत पर करवाई गई जांच में स्पष्ट हो चुका है कि महिलाओं ने पत्रकार पंकज सोनी पर षड्यंत्र पूर्वक हमला किया है। यह हमला पूरी तरह से सुनियोजित था। महिलाओं द्वारा कपड़ा व्यवसायी प्रशांत उर्फ बिट्टू बोथरा और उसके साथी अधिवक्ता रजनीश जैन द्वारा षडय़ंत्र रचकर हमले की घटना को अंजाम दिया था।
इस मामले में खुद एक महिला की शिकायत पर नर्मदापुरम की आईजी दीपिका सूरी ने नर्मदापुरम के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से मामले की जांच कराई। जांच में स्पष्ट हो चुका है कि पत्रकार पंकज सोनी पर महिलाओं द्वारा किया गया हमला षडय़ंत्र का एक हिस्सा था। घटनाक्रम में अप्रत्यक्ष रूप से प्रशांत उर्फ बिट्टू बोथरा की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता है। पत्रकारों ने बताया कि यदि पुलिस षड्यंत्र रचने वालों पर कार्यवाही नहीं करती है तो न सिर्फ धरना प्रदर्शन बल्कि आगामी रणनीति पर भी विचार किया जाएगा।
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क्या है पूरा मामला
बीते 29 अक्टूबर को जब वे अपने घर से कार्यालय आ रहे थे। इसी दौरान कुछ महिलाओं ने उनका रास्ता रोककर सुनियोजित तरीके से हमला किया। उन्होंने बताया कि महिलाओं के हमले के समय उनके पैर में फै्रक्चर था और वे खुद अचानक हमले से नीचे गिर गए। इसके बाद महिलाओं ने उनके खिलाफ महिला थाने में छेड़छाड़ और मारपीट की झूठी शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि महिला थाने में उस समय बिट्टू बोथरा और रजनीश जैन भी मौजूद थे। पहले से ही संदेह था कि दोनों के कहने पर महिलाओं ने उन पर हमला किया है, यह बात जांच में भी स्पष्ट हो गई। पूरा घटनाक्रम उनकी छवि खराब करने के लिए अंजाम दिया गया था।
पत्रकार पंकज सोनी ने बताया कि 29 अक्टूबर के पहले से उनके सिविल लाइन स्थित कार्यालय और शंकर वार्ड में आवास के ईदगिर्द रैकी कर रही थी। इसके बाद सुनियोजित ढंग से बिट्टू बोथरा के कहने पर हमला करवाया गया। सभी महिलाएं बिट्टू बोथरा के शापिंग माल पर काम करती हंै। यह बात उन्होंने खुद अपने बयान में कही थी। इसके बावजूद बैतूल पुलिस ने संबंधितों पर षड़यंत्र रचने की कोई कार्रवाई नहीं की।
महिलाओं की शिकायत पर आईजी ने कराई जांच
उन्होंने बताया कि इस मामले में सदर निवासी प्रिया बारस्कर ने नर्मदापुरम आईजी दीपिका सूरी को उनकी शिकायत की थी। उनकी शिकायत कर अपने वाहन से टक्कर मार, गाली गालौच कर मारपीट करने जैसी शिकायत की गई थी। पूर्व से ही इस तरह के आरोपों से इंकार किया जा रहा है, लेकिन प्रिया बारस्कर द्वारा नर्मदापुरम आईजी को शिकायत की गई थी। उन्होंने नर्मदापुरम के एएसपी से पूरे मामले की जांच कराई।
श्री सोनी ने बताया कि सूचना के अधिकार के तहत विधिवत उन्होंने महानिरीक्षिक कार्यालय से आवेदन देकर जानकारी ली। एएसपी नर्मदापुरम द्वारा आईजी के निर्देश पर की गई जांच में स्पष्ट हो गया है कि उनके द्वारा महिलाओं से न तो धक्का मुक्की गई और न किसी तरह की मारपीट। उन्होंने बताया कि जांच में स्पष्ट उल्लेख है कि 29 अक्टूबर को उनके खिलाफ जो महिलाएं रिपोर्ट लिखाने थाने गई थी उनके साथ बिट्टू बोथरा और रजनीश जैन भी मौजूद थे।
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शिकायत करने गई महिला रेखा देशमुख ने अपने कथन पर भी हस्ताक्षर नहीं किए और वह प्रशांत उर्फ बिट्टू बोथरा और रजनीश जैन के साथ वापस चली गई। इससे स्पष्ट है कि दोनों की मौजूदगी यहां प्रमाणित करती है कि इस शिकायत में रंजनीश जैन और प्रशांत उर्फ बिट्टू बोथरा का अप्रत्यक्ष रूप से साथ है।
पुलिस की भूमिका पर भी उठाए सवाल
पत्रकार पंकज सोनी ने बताया कि पिछले डेढ़ माह से वे और उनका परिवार महिलाओं के तथाकथित हमले और झूठे आरोपों से काफी आहत हुआ। उनकी छवि खराब करने का प्रयास किया गया। इसके बावजूद पुलिस ने जिस तरह से रवैया अपनाया, वह काफी अफसोस जनक है। दरअसल 3 नवंबर को पुराने कलेक्ट्रेट के सामने भी रजनीश जैन द्वारा उन्हें अपना नाम शिकायत वापस लेने के लिए धमकाया गया। उसी दिन कोतवाली थाने में एफआईआर का आवेदन दिया, लेकिन आज तक पुलिस ने रजनीश जैन के विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं की।
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अलबत्ता उन्हें बुलाकर कहा गया कि थाने आकर रजनीश जैन के समक्ष इस बात की चर्चा करें कि मामले में धमकी दी गई है या नहीं। कोतवाली टीआई अप्रत्यक्ष रूप से संबंधितों को बचाने का प्रयास करती रही। उन्होंने पूरे मामले की सीडीआर की भी जांच की मांग करते हुए पूरा मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाने और न्यायालय में जाने की बात भी कही।
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जांच रिपोर्ट एक नजर में…
01. आवेदिका प्रिया बारस्कर अपने सहेलियों के साथ आटो में आना बता रही, जबकि अन्य डिंपल वर्मन एवं रेखा देशमुख पैदल आना बता रही है, जो तीनों के कथनों में विरोधाभाष है और तीनों महिलाओं के कथन मेल नहीं खा रहे।
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02. महिला थाने द्वारा उपलब्ध कराए गए सीसीटीवी फुटेज पर पाया गया कि घटना के एक दिन पूर्व 28 अक्टूबर को अलग अलग समय पर पंकज सोनी के कार्यालय के आगे महिलाएं मुंह पर कपड़ा बांधकर बैठी हुई है जो अनावेदक द्वारा अपने कथन में लेख कराया गया है कि उसके आने-जाने की रैकी कराई गई है। जो सीसीटीवी फुटेज द्वारा लग रहा है कि महिलाओं द्वारा पंकज सोनी की रैकी की गई।
03.अनावेदिका द्वारा बताया गया कि पंकज सोनी द्वारा उसकी स्कूटी से टक्कर मारता हुआ निकला। उस समय पंकज सोनी का एक्सीडेंट होने के कारण किसी डंडे और हाकी का सहारा लेकर चलता है, उसको दोनों कानों से सुनाई नहीं देता। यदि उसके द्वारा स्कूटी से किसी महिला को हैंडिल लगता तो स्कूटी का बैलेंस बिगड़ जाने के कारण वह स्वंय ही गिर जाता, जो कि नहीं हुआ है।
04. महिला थाने द्वारा उपलब्ध कराई गई शिकायत जांच के अवलोकन में पाया गया कि रेखा देशमुख द्वारा जो कथन महिला थाने में दर्ज कराए गए, उसमें पंकज सोनी की पत्नी के पास चेकअप कराने गई थी। महिला द्वारा दर्ज कराए गए बयान में अपने दोस्तों के साथ पिकनिक जाने का लेख कराया गया। दोनों ही कथन पूर्णत: विरोधाभाष है। इससे स्पष्ट होता है कि रेखा देशमुख द्वारा किसी के कहने में आकर मिथ्या कथन लेख कराया गया।
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05. महिला थाने की प्रधान आरक्षक गीता टेकाम के कथनों से भी स्पष्ट होता है कि उक्त तीन महिलाओं में से एक रेखा देशमुख 29 अक्टूबर को पंकज सोनी की रिपोर्ट कराने हेतु थाने गई थी। जहां पर रिपोर्ट के समय अधिवक्ता रजनीश जैन, प्रशांत बोथरा भी उपस्थित थे। रेखा देशमुख की एमएलसी कराई गई तब उसने अपने कथन पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। रेखा देशमुख इसके बाद रजनीश जैन और प्रशांत बोथरा के साथ वापस चली गई। इससे स्पष्ट होता है कि यदि उसके साथ कोई घटना घटित होती तो वह अपने कथन पर हस्ताक्षर कर अग्रिम कार्रवाई कराती, जो उसके द्वारा नहीं कराया गया। अधिवक्ता रजनीश जैन एवं प्रशांत बोथरा की उपस्थिति यह प्रमाणित करती है कि शिकायत में अप्रत्यक्ष रूप से इनका साथ है।



