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MP Sarpanch Honorarium Update: सरपंचों के मानदेय को लेकर बड़ा अपडेट, पंचायत मंत्री ने बताया- बढ़ोतरी की क्या है योजना

MP Sarpanch Honorarium Update: त्रि-स्तरीय पंचायत राज में ग्राम पंचायत का स्थान भले ही आखरी नंबर पर आता हो, लेकिन सरपंचों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। नगरीय निकायों में जिस तक पार्षद के पास हर काम के लिए वार्डवासी पूरे अधिकार से आते हैं, उसी तरह गांवों में लोग सीधे सरपंच के पास पहुंचते हैं। ऐसे में सरपंचों का शायद ही कोई दिन ऐसा जाता हो, जिसमें उन्हें आम लोगों के लिए दौड़ भाग न करना पड़ता हो।

स्थानीय होने के कारण सरपंचों को न तो रात में सुकून मिल पाता है और न ही दिन में। लोगों को जब भी किसी सहायता की जरुरत होती है, वे सरपंच को बिना किसी हिचक के याद कर लेते हैं। इन सबके बावजूद आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि इन्हें इसके बदले में सरकार से जो मानदेय मिलता है, वह मनरेगा के मजदूरों को मिलने वाली मजदूरी से भी कम मिलता है।

मानदेय-मजदूरी में कितना है अंतर (MP Sarpanch Honorarium Update)

मध्यप्रदेश में सरपंचों को प्रतिमाह 4250 रुपये का मानदेय प्राप्त होता है। इसके विपरीत मनरेगा के तहत एक मजदूर को 261 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी दी जाती है। यदि मजदूर 30 दिन काम करें तो उसकी एक महीने की मजदूरी ही 7830 रुपये हो जाती है। वहीं दूसरी ओर ग्राम सरकार का मुखिया अपने ही नीचे काम करने वाले मजदूर से भी 3580 रुपये कम मानदेय प्राप्त कर पाता है।

कई सरपंच मजदूरी को हैं मजबूर (MP Sarpanch Honorarium Update)

यही कारण है कि जिन सरपंचों के पास आय का और कोई जरिया नहीं है, उन्हें अपना परिवार चलाने के लिए मजदूरी तक करना पड़ता है। सीहोर जिले की नसरूल्लागंज जनपद पंचायत की बालागांव पंचायत की सरपंच जसोदा बाई नागवेल भी मजदूरी करती हैं। वे कहती हैं कि मानदेय से गुजारा नहीं हो पाता। मेरे पास न खेती है और न कमाई का और कोई जरिया। ऐसे में पेट भरने के लिए मजदूरी करना मजबूरी है।

मानदेय बढ़ाने की क्या है प्लानिंग (MP Sarpanch Honorarium Update)

हाल ही में विजयपुर के कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा ने पंच-सरपंचों का मानदेय बढ़ाने को लेकर सवाल पूछा था। इसके जवाब में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने जवाब दिया कि सरपंच-पंच का पद स्वैच्छिक समाजसेवा के लिए है, रोजी-रोटी के लिए नहीं। इसलिए इनका मानदेय नहीं बढ़ाया जा सकता।

विधायकों पर मेहरबान प्रदेश सरकार (MP Sarpanch Honorarium Update)

एक ओर प्रदेश सरकार जहां पंच-सरपंचों का पद समाजसेवा का बताती है वहीं दूसरी ओर इसी श्रेणी में आने के बावजूद विधायकों पर खूब पैसा बहाती है। पहले से भरपूर वेतन और सुविधाएं मिलने के बावजूद हाल ही में विधायकों का वेतन 65 हजार रुपये और पेंशन 40 हजार रुपये बढ़ाने की सिफारिश विधानसभा ने की है।

20 साल पहले 150 रुपये था मानदेय (MP Sarpanch Honorarium Update)

यदि हम सरपंचों के कुछ साल पहले के मानदेय की स्थिति देखें तो वह और भी दयनीय थी। वर्ष 2005 तक इनका मानदेय मात्र 150 रुपये था। इसी साल इसे बढ़ाकर 350 रुपये किया गया। वर्ष 2012 में इसे बढ़ाकर 1750 रुपये किया गया। वहीं वर्ष 2023 में विधानसभा चुनाव से पहले इसे बढ़ाकर 4250 रुपये किया गया था।

मानदेय कम, जिम्मेदारियां थोक में (MP Sarpanch Honorarium Update)

सरपंचों का मानदेय भले ही कम हो, लेकिन जिम्मेदारियां थोक में होती है। एक ओर जहां उन्हें सभी सरकारी काम करने होते हैं, वहीं दूसरी ओर आम जनता से जुड़े कार्यों के लिए बैंक, जनपद, तहसील के चक्कर भी काटने होते हैं। कई बार किसी के बीमार पड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाना होता है। इसके अलावा भी लोगों के कई व्यक्तिगत कार्य करने होते हैं। इन सबके लिए उन्हें सरकार से कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं मिलती है। (MP Sarpanch Honorarium Update)

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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