Betul Shivratri News: महाशिवरात्रि पर्व पर चार पहर शिव आराधना का यह है महत्व, इस तरह करें भोलेनाथ की पूजा अर्चना
Betul Shivratri News: This is the importance of worshiping Shiva at four o'clock on Mahashivratri festival, worship Bholenath in this way
Betul Shivratri News: शनिवार को होंगे बैतूल क्षेत्र के विभिन्न शिव मंदिरों में विशेष अनुष्ठान व आयोजन

लोकेश वर्मा, मलकापुर (बैतूल)
खेड़ला किला स्थित बैतूल जिले के प्रसिद्ध प्राचीन शिव मंदिर में महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर चारों पहर की आरती होगी। साथ ही दिव्य श्रंगार में बाबा भोलेनाथ के दर्शन होंगे। शुक्रवार रात्रि 12 बजे की आरती के बाद सुंदरकांड एवं भजन का आयोजन शनिवार प्रातः 6 बजे तक होगा। ज्ञात हो सावन से अभी तक प्राचीन शिव मंदिर का शिवलिंग पूरी तरह जलमग्न था। अभी कुछ दिन पूर्व ही भोलेनाथ ने भक्तों को दर्शन दिए हैं। गर्भ ग्रह में भरा जल प्राकृतिक रूप से धरती में समाने पर शिवरात्रि पर सभी भक्तों को गर्भ ग्रह में प्रवेश कर पूजा करने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही ग्राम खेड़ली से शिव भक्तों द्वारा 11 फीट के विशाल ध्वज की यात्रा खेड़ला किला तक निकाली जाएगी। ज्ञात हो प्राचीन शिव मंदिर में प्रतिवर्ष शिवरात्रि पर मेले का आयोजन भी किया जाता है।
जिसमें आसपास के दर्जनों ग्रामों के हजारों शिवभक्त पहुंचकर महादेव पूजा अर्चना करते हैं। आसपास के ग्रामीणों द्वारा भंडारे का आयोजन भी यहां पहुंचे शिव भक्तों के लिए किया जाता है। प्रतिवर्ष भंडारा कराने वाले ग्राम मलकापुर के शिव भक्तों की ओर से इस वर्ष भी 2 क्विंटल साबूदाने की खिचड़ी भी प्रसाद स्वरूप बांटी जाएगी।
इधर होगा 12 घंटे का सहस्त्रधारा अभिषेक
जिला मुख्यालय के समीप ग्राम ढोंडवाड़ा के नवनिर्मित हाटकेश्वर महादेव मंदिर के शिवालय में श्री हाटकेश्वर महादेव का महाशिवरात्रि पर 12 घंटे का सहस्त्र धारा महाअभिषेक का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें सुबह 6 बजे से शाम को 6 बजे तक महा अभिषेक किया जाएगा। शाम 7 से श्रंगार एवं रात्रि 8 बजे महाआरती के बाद महाप्रसाद में बेल पत्र का वितरण किया जाएगा।
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रात के चार पहर में शिव आराधना का महत्व
शिवरात्रि पर चार पहर में चार बार पूजन का विधान आता है, इसलिए चार बार रुद्राभिषेक भी संपन्न करना चाहिए। महाशिवरात्रि के त्योहार के दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस कारण से हर साल महाशिवरात्रि का त्योहार बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है।
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महाशिवरात्रि पर ऐसे करें भगवान भोलेनाथ की पूजा
प्रसिद्ध भागवताचार्य, शिव महापुराण के सरस वक्ता कान्हा जी महाराज बताते हैं कि शिव जी को भोलेनाथ इसलिए कहा जाता है, क्योंकि वे बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं। करुणा उनके हृदय से निकलती है। ऐसे में शुद्ध मन और पूरे विधि-विधान से उनकी पूजा निश्चित रूप से फल देती है। सुबह स्नान के बाद भगवान शिव की पूजा के लिए पूर्व या उत्तर दिशाओं की ओर मुंह करके बैठें। घर के देवालय या किसी शिवालय में जाकर गंगा या पवित्र जल से जलधारा अर्पित करें। दूध, जल, शहद, घी, शक्कर, बेलपत्र, धतूरे से भगवान शिव का अभिषेक करें। भगवान शिव के साथ शिव परिवार का फूल, गुड़, जनेऊ, चंदन, रोली, कपूर से पूजन करें। शिव स्तोत्रों और शिव चालीसा का पाठ करें। व्रत रखें और सच्चे दिल से अपनी मनोकामना के लिए उपासना करें।
शिवरात्रि पर चार पहर में चार बार पूजन का विधान आता है, इसलिए चार बार रुद्राभिषेक भी संपन्न करना चाहिए। पहले पहर में दूध से शिव के ईशान स्वरूप का, दूसरे पहर में दही से अघोर स्वरूप का, तीसरे पहर में घी से वामदेव रूप का और चौथे पहर में शहद से सद्योजात स्वरूप का अभिषेक कर पूजन करना चाहिए। यदि कन्याएं चार बार पूजन न कर सकें, तो पहले प्रहर में एक बार तो पूजन अवश्य ही करें। महाशिवरात्रि की रात महासिद्धिदायिनी होती है, इसलिए उस समय किए गए दान और शिवलिंग की पूजा व स्थापना का फल निश्चित रूप से मिलता है।






