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Soyabeen Kharidi : एक पखवाड़े में भी खरीदी केंद्रों पर सोयाबीन लेकर नहीं पहुंचे किसान

Soyabeen Kharidi : बैतूल। समर्थन मूल्य पर सोयाबीन की खरीदी प्रारंभ हुए पंद्रह दिन बीत गए, लेकिन सभी केंद्रों पर सन्नाटा पसरा है। अभी तक एक भी किसान उपज लेकर नहीं पहुंचे हैं। खरीदी प्रारंभ नहीं होने से अधिकारियों की भी चिंता बढ़ती जा रही है। कृषि उपज मंडी की अपेक्षा समर्थन मूल्य अधिक मिलने के बावजूद किसान उपज लेकर नहीं आ रहे हैं।

Soyabeen Kharidi : एक पखवाड़े में भी खरीदी केंद्रों पर सोयाबीन लेकर नहीं पहुंचे किसान

Soyabeen Kharidi : बैतूल। समर्थन मूल्य पर सोयाबीन की खरीदी प्रारंभ हुए पंद्रह दिन बीत गए, लेकिन सभी केंद्रों पर सन्नाटा पसरा है। अभी तक एक भी किसान उपज लेकर नहीं पहुंचे हैं। खरीदी प्रारंभ नहीं होने से अधिकारियों की भी चिंता बढ़ती जा रही है। कृषि उपज मंडी की अपेक्षा समर्थन मूल्य अधिक मिलने के बावजूद किसान उपज लेकर नहीं आ रहे हैं।

सरकार ने सोयाबीन का समर्थन मूल्य जरूर तय किया है, लेकिन इससे किसान खुश नजर नहीं आ रहे हैं। दाम अच्छे नहीं होने के कारण भी किसान समर्थन मूल्य पर सोयाबीन की उपज बेचने में कोई रूचि नहीं ले रहे हैं।

जिले में बनाए गए पंद्रह खरीदी केंद्र

कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार समर्थन मूल्य पर सोयाबीन की उपज खरीदने के लिए जिले में पंद्रह खरीदी केंद्र बनाए गए हैं। शासन स्तर से 25 अक्टूबर से समर्थन मूल्य की खरीदी शुरू कर दी। आज दिनांक तक किसी भी केंद्र पर कोई खरीदारी नहीं हुई है। खरीदी केंद्रों पर कर्मचारी किसानों के उपज लेकर आने इंतजार कर रहे हैं।

महज 7 किसानों ने किया स्लॉट बुक

15 दिनों के भीतर महज सात किसानों ने उपज बेचने के लिए स्लाट बुकिंग की है। अधिकारियों के मुताबिक सोयाबीन की उपज बेचने जिले भर के 31 सौ से अधिक किसानों ने पंजीयन किया है। किसानों को सोयाबीन का समर्थन मूल्य 4892 रुपए दिया जा रहा है।

किसान इस समर्थन मूल्य का विरोध भी कर चुके हैं। किसानों का मानना है कि सरकार ने कम से कम सोयाबीन का समर्थन मूल्य पांच हजार रुपए करना था। कृषि उपज मंडी में सोयाबीन के कम दाम होने के बावजूद आवक हो रही है, लेकिन समर्थन मूल्य केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है।

क्वालिटी के मापदंडों से भी है डर

समर्थन मूल्य अधिक होने और मंडी में कम रेट मिलने के बावजूद किसानों द्वारा सरकार को सोयाबीन की बिक्री नहीं किये जाने की एक वजह किसानों का डर भी है। बताया जाता है कि सरकार ने सोयाबीन की क्वालिटी को लेकर सख्त मापदंड बनाए हैं।

ऐसे में किसानों को लग रहा है खरीदी केंद्र पर उनकी उपज रिजेक्ट कर दी जाएगी। वहीं यदि रिजेक्ट नहीं भी हुआ तो भुगतान तुरंत नहीं मिलेगा जबकि किसान चाहते हैं कि तुरंत भुगतान हो। यही कारण है कि किसान खरीदी केंद्रों से दूरी बनाये हैं।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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