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मुक्तागिरी: यहां होती है केसर और चंदन की बारिश


उत्तम मालवीय (9425003881)
बैतूल। जिले की सीमा पर स्थित तीर्थ स्थल मुक्तागिरी अपने प्राकृतिक सौंदर्य के साथ ही धार्मिक महत्व के कारण भी बेहद प्रसिद्ध है। यहां के घने और हरे-भरे पर्वत और इनके बीच स्थित 52 जैन मंदिर बरसों से जैन मुनियों की तप स्थली और सभी की आस्था का केंद्र हैं, वहीं यहां बिखरे कुदरती सौंदर्य को निहारने भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इस स्थान को लेकर एक प्रमुख मान्यता यह है कि यहां पर केसर और चंदन की बारिश होती है।
बैतूल-परतवाड़ा स्टेट हाइवे पर स्थित इस स्थान पर दिगंबर जैन संप्रदाय के कुल 52 मंदिर हैं। यहां भगवान पार्श्वनाथ जी का मंदिर भी स्थापित है। इस मंदिर में भगवान पार्श्वनाथ की सप्तफणिक प्रतिमा स्थापित है, जो शिल्पकला का बेजोड़ नमूना है। इस क्षेत्र में स्थित मानस्तंभ, मन को शांति और सुख प्रदान करने वाला है। निर्वाण क्षेत्र में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को यहां आकर सुकून मिलता है। मंदिर की सुंदरता देखते ही बनती है और यही कारण है कि देश के कोने-कोने से जैन धर्मावलंबी ही नहीं दूसरे धर्मों को मानने वाले लोग भी आते हैं। पैराणिक कथाओं और लोक मान्यताओं के अनुसार 1000 वर्ष पहले मुनिराज ध्यान में मग्न थे और उनके सामने एक मेंढक पहाड़ की चोटी से नीचे गिर गया। उस मुनिराज ने मेंढक के कानों में णमोकार मंत्र का उच्चारण किया। इसके कारण यह मेंढक मरने के बाद स्वर्ग में देवगति को प्राप्त हुआ। इसी कहानी के अनुसार ही तब से हर अष्टमी और चौदस को इस पहाड़ पर केसर और चंदन की वर्षा होती है। मेंढक की इसी कहानी के कारण इस पहाड़ी का नाम मेढ़ागिरी पड़ गया। इन कहानियों के अनुसार इस जगह की बहुत मान्यता है। दूर-दूर से लोग चंदन और मोतियों की बारिश देखने के लिए यहां आते हैं। मेढ़ागिरी पर्वत को बहुत पवित्र माना गया है। सतपुड़ा के घने जंगलों में स्थित होने के कारण अनेक हिसंक पशु भी यहां रहते हैं पर उन्होंने आज तक किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। यह इस सिद्ध क्षेत्र का प्रताप ही माना जाता है। बताया जाता है कि सिद्ध क्षेत्र मुक्तागिरी में साढ़े तीन करोड़ मुनियों ने मोक्ष प्राप्त किया है।
250 फीट ऊंचे जल प्रपात से गिरता है पानी
यह क्षेत्र पहाड़ी पर स्थित है और क्षेत्र में पहाड़ पर 52 मंदिर बने हुए हैं। यहीं पहाड़ की तहलटी पर 2 मंदिर हैं। इस रमणीय क्षेत्र पर अधिकतर मंदिर 16 वीं शताब्दी या उसके बाद के बने हुए हैं। पहाड़ पर पहुंचने के लिए 250 सीढ़ियां चढ़ कर जाना पड़ता है और पूरी यात्रा के लिए लगभग 600 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। यहां 250 फुट की ऊंचाई से जल प्रपात गिरता है जो कि मन मोह लेता है। इस जल प्रपात से जुलाई से जनवरी तक अविरल जल धारा गिरती रहती है। यह क्षेत्र प्राकृतिक रूप से अद्भुत सुंदर है।
कहां है स्थित और कैसे पहुंचे मुक्तागिरी
तीर्थ स्थल मुक्तागिरी जिले की बिल्कुल सीमा पर भैंसदेही तहसील की ग्राम पंचायत थपोड़ा में बैतूल से करीब 120 किलोमीटर दूर स्थित है। परतवाड़ा रोड से जाते हुए एक बार महाराष्ट्र सीमा में प्रवेश करने के बाद यहां पहुंच सकते हैं। ठंडी और बारिश के मौसम में यहां जाना सबसे बेहतर है। इस समय पहाड़ी पर चहुं ओर हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य बिखरा होता है वहीं झरना भी झरते रहता है। गर्मी में यह सब देखने से वंचित रहना पड़ सकता है।

उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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