Amla Zinc Mining Project: बैतूल की जमीन से निकलेगा जिंक का खजाना, आमला ब्लॉक में खुलेंगी चार नई खदानें
Amla Zinc Mining Project: खनिज संपदा के मामले में बैतूल जिला लगातार अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। कोयला, मीथेन और ग्रेफाइट के बाद अब जिले की धरती में एक और अहम खनिज की मौजूदगी सामने आई है। आमला ब्लॉक क्षेत्र में बेसमेटल जिंक के भंडार मिलने की पुष्टि के बाद चार नए खनिज ब्लॉकों को नीलामी के लिए आगे बढ़ाया गया है। इससे न केवल जिले की आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।
बैतूल में बढ़ती खनिज संभावनाएं
बैतूल जिला पहले से ही खनिज संसाधनों के लिए जाना जाता है। यहां कोयला खदानें लंबे समय से संचालित हैं, वहीं मीथेन और ग्रेफाइट जैसे खनिजों की मौजूदगी भी पहले ही सामने आ चुकी है। अब बेसमेटल जिंक के भंडार मिलने से जिले की खनिज प्रोफाइल और मजबूत होने जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यह खोज भविष्य में जिले को खनन के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित कर सकती है।
आमला ब्लॉक में चार खनिज क्षेत्र चिन्हित
आमला विकासखंड के अंतर्गत बिसखान, बासखापा, केहलपुर और डेहरी गांवों में बेसमेटल जिंक के चार अलग-अलग ब्लॉक चिन्हित किए गए हैं। इन सभी ब्लॉकों का कुल क्षेत्रफल 215.167 हेक्टेयर बताया गया है। भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण के दौरान इन क्षेत्रों में बेसमेटल और जिंक की मौजूदगी की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद शासन स्तर पर इन्हें नीलामी के लिए तैयार किया गया है।
नीलामी के लिए भोपाल भेजा गया प्रस्ताव
गुरुवार को जिला स्तरीय प्री-ऑक्शन कमेटी की बैठक में इन खनिज ब्लॉकों को नीलामी के लिए आगे बढ़ाने पर निर्णय लिया गया। बैठक के बाद खनिज ब्लॉकों से जुड़ा प्रस्ताव खनिकर्म विभाग भोपाल को भेजने का फैसला किया गया। अधिकारियों के अनुसार इन ब्लॉकों की नीलामी सेंट्रल लेवल से की जाएगी, जिससे बड़े निवेशकों की भागीदारी संभव हो सकेगी।
विभिन्न गांवों में अलग-अलग क्षेत्रफल
उपलब्ध जानकारी के अनुसार आमला ब्लॉक के बिसखान, खारी और बलढाना गांवों में लगभग 89.700 हेक्टेयर क्षेत्र में बेसमेटल जिंक के भंडार होने की संभावना जताई गई है। वहीं बासखापा और घाटावाड़ी कला क्षेत्र में 55.600 हेक्टेयर में बेसमेटल की मौजूदगी बताई गई है। इसके अलावा केहलपुर, डेहरी बड़गांव और कुजबा गांवों में 57.300 हेक्टेयर तथा डेहरी गांव में 12.567 हेक्टेयर क्षेत्र में जिंक और उससे जुड़े अन्य खनिज पाए जाने की संभावना है।
रोजगार और विकास की उम्मीद
खनिज विभाग के अधिकारियों का मानना है कि आमला ब्लॉक में खदानें खुलने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। खनन कार्य शुरू होने के बाद प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में लोगों को काम मिल सकेगा। साथ ही परिवहन, व्यापार और अन्य सहायक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे आमला क्षेत्र का नाम खनन मानचित्र पर और अधिक पहचान बना सकेगा।
बेसमेटल और जिंक का औद्योगिक महत्व
बेसमेटल में तांबा, एल्युमीनियम, जस्ता और सीसा जैसी धातुएं शामिल होती हैं। इनका उपयोग निर्माण कार्य, परिवहन उद्योग, बिजली के तार, पैकेजिंग सामग्री, बैटरी और घरेलू उपकरणों के निर्माण में बड़े पैमाने पर किया जाता है। ये धातुएं कीमती धातुओं की तुलना में सस्ती और आसानी से उपलब्ध होती हैं, इसलिए उद्योगों में इनकी मांग बनी रहती है। वहीं जिंक का उपयोग खासतौर पर लोहे को जंग से बचाने के लिए गैल्वनाइजिंग में, पीतल जैसी मिश्र धातुएं बनाने में और बैटरी व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में किया जाता है।
आमला को मिल सकती है नई पहचान
यदि नीलामी की प्रक्रिया सफल रहती है और खदानें शुरू होती हैं, तो आमला ब्लॉक की पहचान केवल कृषि क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी। खनन गतिविधियों से यह क्षेत्र औद्योगिक रूप से भी महत्वपूर्ण बन सकता है। इससे जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ विकास के नए रास्ते खुलने की उम्मीद की जा रही है।
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