Mutual Funds Tax Liability : आप भी करते है एसआईपी तो जरूर पता होना चाहिए ये नियम, वरना होगा बड़ा नुकसान
Mutual Funds Tax Liability: If you also do SIP, then you must know this rule, otherwise there will be a big loss

Mutual Funds Tax Liability : म्यूचुअल फंड की कई ऐसी स्कीम्स हैं, जिसमें निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न मिला है। कई फंड्स में एक साल में पैसा डबल हो गया, तो कुछ स्कीम्स ने 5 साल में भी तीन गुना तक कमाई कराई है। इसमें शेयर बाजार में सीधे निवेश की बजाय जोखिम कम रहता है। रिटर्न भी ट्रेडिशनल ऑप्शन जैसे कि बैंक FD, RD के मुकाबले ज्यादा मिलता है। म्यूचुअल फंड निवेश से पहले यह जान लेना जरूरी है कि इससे होने वाली कमाई पर टैक्स भी देना पड़ता है। जबकि कई ऐसे फंड होते है, जिनमें आपको टैक्स देने की जरूरत नहीं होती है। SIP (सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान) के जरिए म्यूचुअल फंड्स में इनवेस्टमेंट किया है तो आप भी 80C के तहत छूट मिलती हैं। यदि आप भी एसआईपी के जरीए म्यूचुअल फंड में पैसा जमा कर रहे हैं या जमा करने का प्लान बना रहे है तो आपको इसके बारे में पूरी जानकारी होना चाहिए।
SIP शुरू करने में कितना टाइम लगता है?(Mutual Funds Tax Liability)
Mutual Funds Tax Liability : सभी ओपन-एंडेड ELSS स्कीम्स में निवेशकों को एसआईपी के जरिए निवेश करने का मौका मिलता है. कुछ फंड हाउस एसआईपी के लिए महीने की कोई तारीख चुनने को कहते हैं। इसके लिए निवेशकों को एसआईपी और ईसीएस मैंडेट्स देते हुए एक एप्लीकेशन फॉर्म भरना होता है. इस ईसीएस मैंडेट को रजिस्टर करने में बैंक आमतौर पर 21 से 30 दिन का समय लगाते हैं। ऑनलाइन भी आप SIP की शुरुआत कर सकते हैं।
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म्यूचुअल फंड पर टैक्स का गणित
टैक्सेशन के हिसाब से म्यूचुअल फंड की दो हिस्सों में बांट लें। पहले हिस्से में इक्विटी ऑरिएंटेड फंड्स आते हैं तो दूसरे में अन्य सभी म्यूचुअल फंड्स आते हैं। शेयर बाजार पर लिस्ट घरेलू कंपनी में 65 फीसदी निवेश कर रहे हैं तो ऐसी स्कीम इक्विटी ऑरिएंटेड स्कीम होती हैं। इसमें 12 महीने से ज्यादा वक्त तक मुनाफा रिडीम नहीं किया जाता है। ऐसे में यह लॉन्ग टर्म माना जाएगा। अगर आपने 12 महीने के अंदर ही मुनाफा भुना लिया तो यह शॉर्ट टर्म में शामिल हो जाएगा।
इक्विटी ऑरिएटेंड स्कीम के अलावा अन्य सभी स्कीम दूसरी श्रेणी में आते हैं। इनमें डेट, लिक्विड, शॉर्ट टर्म डेट, इनकम फंड्स, गवर्नमेंट सिक्योरिटीज, फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान आते हैं। गोल्ड ETF, गोल्ड सेविंग्स फंड, इंटरनेशनल फंड भी इसमें शामिल होते हैं। इस श्रेणी में निवेश 36 महीने पुराना तो लॉन्ग टर्म हो जाता है और 36 महीने से पहले बेचा तो शॉर्ट टर्म माना जाएगा।
IP या STP से जब आप निवेश करते हैं तो हर SIP/STP एक नया निवेश माना जाता है। यहां टैक्सेशन के लिए यूनिट अलोटमेंट की तारीख देखते हैं। यूनिट अलोटमेंट डेट के आधार पर ही लॉक इन पीरियड की जाती है।
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ऐसे समझे सारा गणित (Mutual Funds Tax Liability)
मान लीजिए आपने एक साल पहले SIP निवेश शुरू किया। सबसे पहली SIP आपकी एक साल बाद लॉन्ग टर्म होगी. बाद की अन्य SIP पहली SIP के साथ लॉन्ग टर्म नहीं होंगी। SWP यानी सिस्टेमेटिक विड्रॉल प्लान का मुनाफा फर्स्ट इन, फर्स्ट आउट (FIFO) मेथड से तय होता है। ऐसे में जो यूनिट सबसे पहले खरीदी, वही यूनिट सबसे पहले भुनाई जाएगी। अलग-अलग डीमैट अकाउंट में यूनिट्स रखी हैं। ऐसे में हर डीमैट अकाउंट एंट्री के आधार पर होल्डिंग पीरियड होगा।
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80C के तहत कैपिटल गेन
सेक्शन 80C, 80CCD, 80TTB में टैक्स छूट का फायदा मिलता है। कैपिटल गेन्स के मुकाबले इन सेक्शन में टैक्स छूट नहीं ले सकते। सिर्फ दूसरी श्रेणी के फंड्स के STCG के आधार पर ले सकते हैं। नॉन-रेजिडेंट को LTCG-STCG पर पूरा टैक्स देना होता है।



