MP Wheat Procurement 2026: एमपी में गेहूं खरीदी पर बड़ा फैसला: अब 9 अप्रैल से होगा उपार्जन, चना-मसूर की भी एमएसपी पर खरीदी
MP Wheat Procurement 2026: Major decision on wheat procurement in MP: Procurement will now begin from April 9, with chickpeas and lentils also purchased at MSP.

MP Wheat Procurement 2026: मध्यप्रदेश के किसानों के लिए सरकार ने अहम फैसले लिए हैं, जिससे उन्हें अपनी फसल का बेहतर दाम मिल सकेगा। रबी सीजन की खरीदी को लेकर कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय हुए हैं। खास बात यह है कि इस बार सरकार ने छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है, जिससे उन्हें सीधा लाभ मिलेगा।
गेहूं खरीदी की तारीख में बदलाव
राज्य सरकार ने गेहूं उपार्जन की शुरुआत की तारीख में बदलाव किया है। पहले यह प्रक्रिया 10 अप्रैल से शुरू होने वाली थी, लेकिन अब इसे एक दिन पहले यानी 9 अप्रैल से ही शुरू किया जाएगा। इस फैसले का उद्देश्य किसानों को सुविधा देना और खरीदी प्रक्रिया को समय पर पूरा करना है। इस संबंध में जानकारी देते हुए मंत्री चैतन्य कश्यप ने बताया कि सरकार ने किसानों की जरूरत को देखते हुए यह निर्णय लिया है।
छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता
सरकार ने इस बार खरीदी की शुरुआत छोटे और सीमांत किसानों से करने का फैसला किया है। इससे ऐसे किसानों को पहले अपनी फसल बेचने का मौका मिलेगा, जिन्हें अक्सर लंबे इंतजार का सामना करना पड़ता है। यह कदम किसानों के हित में उठाया गया माना जा रहा है।

पंजीयन में बढ़ोतरी, बड़ी संख्या में किसान तैयार
इस साल प्रदेश में गेहूं बेचने के लिए करीब 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग साढ़े तीन लाख अधिक है। इससे साफ है कि इस बार खरीदी का दायरा और बड़ा होने वाला है और बड़ी मात्रा में गेहूं सरकार के पास पहुंचेगा।
उपार्जन केंद्रों की व्यापक व्यवस्था
सरकार ने खरीदी व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए प्रदेशभर में 3,627 उपार्जन केंद्र स्थापित किए हैं। इन केंद्रों पर किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। बारदाने की उपलब्धता से लेकर अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी सरकार ने तैयारियां पूरी कर ली हैं।
एमएसपी और बोनस का लाभ
इस वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,275 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही राज्य सरकार की ओर से 125 रुपये प्रति क्विंटल बोनस भी दिया जाएगा। इससे किसानों को बाजार के मुकाबले बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है।
चना और मसूर की खरीदी को मंजूरी
कैबिनेट ने चना और मसूर की फसलों को लेकर भी बड़ा फैसला लिया है। इन दोनों फसलों की खरीदी भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जाएगी। इसके लिए सरकार ने 3,174 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। चने का एमएसपी 5,875 रुपये प्रति क्विंटल और मसूर का 7,000 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।
खरीदी का लक्ष्य और बाजार स्थिति
सरकार ने चने के कुल उत्पादन का 25 प्रतिशत खरीदने का लक्ष्य तय किया है। वहीं मसूर की पूरी फसल खरीदने की योजना बनाई गई है, जिसके तहत लगभग 5.8 लाख मीट्रिक टन मसूर खरीदी का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में मंडियों में इन फसलों के दाम एमएसपी से कम चल रहे हैं, ऐसे में सरकारी खरीदी से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
यहाँ देखें और सुने कि बैठक में किन मुद्दों पर हुए निर्णय…
मंडी शुल्क में छूट और भंडारण की व्यवस्था
चना और मसूर की खरीदी के दौरान किसानों को राहत देने के लिए मंडी शुल्क और निराश्रित शुल्क को माफ करने का निर्णय लिया गया है। खरीदी गई फसल का भंडारण नेफेड के माध्यम से किया जाएगा और इसके लिए गोदामों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।
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सिंचाई योजना को भी मिली मंजूरी
कैबिनेट बैठक में सिंचाई से जुड़ी एक महत्वपूर्ण योजना को भी मंजूरी दी गई है। मंदसौर जिले में गांधी सागर बांध से भानपुरा तहसील के कोतमा क्षेत्र तक लिफ्ट इरिगेशन योजना को स्वीकृति दी गई है। करीब 88.41 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस योजना से लगभग 3,500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इस योजना से लगभग 120 गांवों के 1,358 परिवारों को लाभ मिलेगा। सरकार का मानना है कि इस और अन्य योजनाओं के पूरा होने के बाद मंदसौर जिले में सिंचित क्षेत्र का दायरा लगभग 77 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।
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किसानों के हित में सरकार का फोकस
कैबिनेट में लिए गए इन फैसलों को किसानों के हित में बड़ा कदम माना जा रहा है। गेहूं, चना और मसूर की सरकारी खरीदी से किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिलने की उम्मीद है। साथ ही सिंचाई योजनाओं से कृषि उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किसानों की आय में सुधार होगा।
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