Bhopal taxi auto strike: भोपाल में टैक्सी-ऑटो हड़ताल: ओला-उबर सेवाएं भी रहेंगी बंद, यात्रियों को होगी भारी परेशानी
Bhopal taxi auto strike: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कल 14 जुलाई 2025 को सड़कों पर न टैक्सियां चलेंगी और न ही ऑटो दौड़ते नजर आएंगे। टैक्सी यूनियन कल्याण समिति के आह्वान पर टैक्सी और ऑटो चालक अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर रहेंगे। इस दौरान वे सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक डॉ. अंबेडकर जयंती पार्क में विरोध प्रदर्शन करेंगे।
यूनियन के मुताबिक ओला, उबर और रैपिडो जैसी निजी सेवा कंपनियों से जुड़ी 2500 से अधिक टैक्सियां और 2000 से अधिक ऑटो राजधानी भोपाल में 24 घंटे अपनी सेवाएं देते हैं। इसके चलते लोग आसानी से शहर में आवाजाही कर पाते हैं, लेकिन कल सभी टैक्सी-ऑटो चालक हड़ताल पर रहेंगे। इससे आम लोगों को भारी परेशानी उठाना पड़ेगा। शहरवासी तो जैसे-तैसे अपना काम चला लेंगे, लेकिन उन लोगों की फजीहत हो जाएगी जो कि बाहर से भोपाल पहुंचने वाले हैं।
गंतव्य तक नहीं पहुंच पाएंगे यात्री (Bhopal taxi auto strike)
इस हड़ताल का व्यापक असर भोपाल रेलवे स्टेशन, रानी कमलापति रेलवे स्टेशन, संत हिरदाराम नगर स्टेशन, हबीबगंज क्षेत्र, बस स्टैंड और राजा भोज एयरपोर्ट सहित शहर के प्रमुख परिवहन केंद्रों पर देखने को मिलेगा। टैक्सी और ऑटो सेवाओं पर निर्भर हजारों यात्रियों को आवागमन में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

उपेक्षा और शोषण के खिलाफ है विरोध (Bhopal taxi auto strike)
इस हड़ताल को लेकर यूनियन के राष्ट्रीय सचिव नफीसउद्दीन ने बताया कि यह विरोध प्रदर्शन राजधानी सहित पूरे प्रदेश में टैक्सी चालकों के साथ हो रही उपेक्षा और शोषण के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन पूर्णत: शांतिपूर्ण रहेगा और इसके लिए पुलिस प्रशासन से विधिवत अनुमति प्राप्त कर ली गई है।
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इन मांगों को लेकर हो रहा आंदोलन (Bhopal taxi auto strike)
- समानता के आधार पर सुविधाएं: यूनियन की मांग है कि एयरपोर्ट व प्रमुख सार्वजनिक पिकअप प्वाइंट्स पर पर्याप्त और सुव्यवस्थित पार्किंग सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। राजा भोज एयरपोर्ट पर ओला-उबर जैसे एग्रीगेटर वाहनों को पार्किंग की अनुमति दी गई है, जबकि पारंपरिक टैक्सी चालकों के लिए कोई उपयुक्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। यूनियन के मुताबिक जब वाहन टैक्सी कोटे में पंजीकृत होते हैं, तो उन्हें एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थलों पर भी समुचित पार्किंग सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए। (Bhopal taxi auto strike)
- निजी टैक्सी कंपनियों पर सरकारी दरें लागू हों: यूनियन ने मांग की है कि ओला-उबर जैसी एग्रीगेटर कंपनियों पर भी वही कलेक्टर दरें लागू की जाएं, जो पारंपरिक टैक्सी चालकों पर प्रभावी हैं। वर्तमान में ये कंपनियां आपसी प्रतिस्पर्धा के चलते मनमाने किराये तय करती हैं, जिससे चालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। (Bhopal taxi auto strike)

- रेलवे स्टेशनों पर अवैध वसूली तुरंत रोकें: भोपाल, रानी कमलापति और संत हिरदाराम नगर जैसे रेलवे स्टेशनों पर टैक्सी चालकों से प्रति फेरे 10 रुपये जबरन वसूले जा रहे हैं, जबकि निजी वाहनों को 15 मिनट तक नि:शुल्क पार्किंग की सुविधा दी जा रही है। यह वसूली न तो किसी अधिकृत नियम के तहत की जा रही है और न ही इसकी कोई रसीद प्रदान की जाती है। प्रतिदिन इन स्टेशनों पर लगभग 2000 टैक्सियां पहुंचती हैं, जिनसे रोज लगभग 20000 रुपये की अवैध वसूली हो रही है। इसका सीधा असर टैक्सी चालकों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। (Bhopal taxi auto strike)
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- पैनिक बटन के नाम पर अवैध वसूली बंद हों: टैक्सी वाहनों में लगाए जाने वाले पैनिक बटन की बाजार कीमत लगभग 4000 रुपये है, लेकिन इसके लिए चालकों से 13000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। साथ ही, अधिकांश मामलों में ये पैनिक बटन ठीक से कार्य नहीं कर रहे हैं, जिससे उनकी उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं। (Bhopal taxi auto strike)
- अवैध प्राइवेट टैक्सी और दोपहिया टैक्सी सेवाओं पर तत्काल रोक लगें: ओला, उबर और रैपिडो जैसी कंपनियां ऐसे निजी वाहनों का उपयोग टैक्सी सेवा के रूप में कर रही हैं, जिनके पास न तो फिटनेस सर्टिफिकेट है, न ही कमर्शियल परमिट और बीमा। दूसरी ओर, पारंपरिक टैक्सी चालकों को हर वर्ष फिटनेस, परमिट और कमर्शियल बीमा जैसी अनिवार्य प्रक्रियाओं के लिए 50 से 60 हजार रुपये तक का खर्च करना पड़ता है। इस असमानता के कारण उनके व्यवसाय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। (Bhopal taxi auto strike)
- फिटनेस मशीनों में तकनीकी गड़बड़ियों को सुधारा जाएं: यूनियन का कहना है कि परिवहन विभाग की फिटनेस जांच मशीनें ठीक से कार्य नहीं कर रहीं। मामूली तकनीकी खामी पर भी वाहनों को फिटनेस प्रमाणन से वंचित कर दिया जाता है, जिससे चालकों को आर्थिक रूप से नुकसान उठाना पड़ता है। (Bhopal taxi auto strike)
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