Farmer ID AgriStack: खेती से जुड़ी सरकारी योजनाओं को लेकर किसानों की सबसे बड़ी शिकायत अक्सर यही रहती है कि जानकारी समय पर नहीं मिलती या फिर कागजी प्रक्रिया में लाभ अटक जाता है। इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने कृषि क्षेत्र में डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करना शुरू किया है। इसी दिशा में एग्रीस्टेक को लागू किया जा रहा है, जिससे किसानों की पहचान से लेकर योजनाओं के लाभ तक सब कुछ एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो सके। बैतूल जिले में इस व्यवस्था को तेजी से अपनाया जा रहा है और इसके परिणाम भी सामने आने लगे हैं।
एग्रीस्टेक क्या है और क्यों जरूरी
भारत सरकार द्वारा विकसित एग्रीस्टेक ((AgriStack)) एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे किसानों के लिए एक साझा और भरोसेमंद डेटाबेस के रूप में तैयार किया गया है। इस सिस्टम में किसान की पहचान, जमीन से जुड़े रिकॉर्ड और फसल से संबंधित जानकारी को एक जगह जोड़ा जाता है। इसका उद्देश्य यह है कि किसान को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और उसे योजनाओं, ऋण, बीज, सलाह और बाजार से जुड़ी सुविधाएं आसानी से मिल सकें। एग्रीस्टेक के जरिए खेती से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रूप से मजबूत किया जा रहा है।

किसानों को कैसे मिलेगा फायदा
एग्रीस्टेक के माध्यम से किसानों को कई स्तरों पर लाभ मिलने की व्यवस्था की गई है। किसान की पहचान स्पष्ट होने से उसे बैंक ऋण लेने में आसानी होगी। वैज्ञानिक खेती से जुड़ी सलाह, बेहतर गुणवत्ता के बीज और सही समय पर बाजार की जानकारी भी इसी सिस्टम के जरिए दी जा सकेगी। इसके अलावा सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र किसानों तक पहुंचाने में भी यह प्लेटफॉर्म मददगार साबित होगा। इससे न केवल किसानों को सुविधा मिलेगी, बल्कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
प्रदेश और जिले में लागू हो रही व्यवस्था
केंद्र सरकार की योजना के अनुरूप एग्रीस्टेक को प्रदेश में भी प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है। फार्मर आईडी बनाने और डिजिटल क्रॉप सर्वे के काम में अच्छी प्रगति हुई है। बैतूल जिले में अब तक 2.65 लाख से अधिक किसानों की फार्मर आईडी तैयार की जा चुकी है। यह संख्या दिखाती है कि किसान भी धीरे-धीरे इस डिजिटल पहल से जुड़ रहे हैं और इसे अपना रहे हैं।
एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेंगी योजनाओं की जानकारी
कृषि विभाग द्वारा किसानों से जुड़ी प्रमुख योजनाओं को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जा रहा है। एग्रीस्टेक से जुड़ने के बाद किसान अपने गांव में रहते हुए या मोबाइल फोन के जरिए योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। आवेदन की प्रक्रिया भी आसान बनाई जा रही है, ताकि कागजी कार्रवाई की जरूरत न पड़े और समय की बचत हो सके। इससे खासतौर पर छोटे और सीमांत किसानों को बड़ा फायदा मिलेगा।
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खरीफ 2026 से फार्मर आईडी अनिवार्य
सरकार ने यह निर्णय लिया है कि खरीफ 2026 से सभी विभागीय और किसान-हितैषी योजनाओं में सहायता या अनुदान लेने के लिए फार्मर आईडी जरूरी होगी। इसका मतलब है कि जिन किसानों की फार्मर आईडी नहीं होगी, वे योजनाओं का लाभ नहीं ले पाएंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए जिले में यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी पात्र किसानों की फार्मर आईडी समय रहते बन जाए।
शत-प्रतिशत किसानों को जोड़ने की तैयारी
कृषि विभाग का प्रयास है कि जिले के सभी पात्र किसान एग्रीस्टेक से जुड़ें और उनकी फार्मर आईडी तैयार हो। इसके लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है और किसानों को जागरूक किया जा रहा है। लक्ष्य यह है कि आने वाले खरीफ मौसम से पहले हर किसान डिजिटल रूप से पंजीकृत हो जाए, ताकि योजनाओं का लाभ बिना किसी देरी के मिल सके।
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योजनाओं का लाभ पहुंचेगा सीधे किसानों तक
एग्रीस्टेक के जरिए योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और सही व्यक्ति तक सही समय पर सहायता पहुंचेगी। सरकार का मानना है कि यह डिजिटल व्यवस्था खेती को आधुनिक बनाने के साथ-साथ किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी मदद करेगी। आने वाले समय में एग्रीस्टेक किसानों और सरकार के बीच एक मजबूत सेतु के रूप में काम करेगा।
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