Farm Loan OTS Scheme MP: प्रदेश में सहकारिता व्यवस्था को नए सिरे से मजबूत करने की दिशा में सरकार बड़े और दूरगामी फैसले लेने जा रही है। फसल ऋण लेकर किसी कारणवश भुगतान नहीं कर पाए किसानों को राहत देने के साथ-साथ ग्रामीण और शहरी युवाओं को रोजगार से जोड़ने की ठोस योजना तैयार की गई है। सरकार का उद्देश्य है कि सहकारी संस्थाएं केवल ऋण तक सीमित न रहें, बल्कि किसानों, पशुपालकों और युवाओं के लिए आर्थिक संबल बनें। इसी कड़ी में सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने विभाग के पिछले दो वर्षों के कामकाज और आने वाले तीन वर्षों की कार्य योजना को सार्वजनिक किया है।
डिफॉल्टर किसानों के लिए आएगी एकमुश्त समाधान
प्रदेश की प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों से बड़ी संख्या में किसान फसल ऋण लेते हैं। कई बार प्राकृतिक आपदा, मौसम की मार या पारिवारिक कारणों से कुछ किसान समय पर ऋण नहीं चुका पाते। ऐसी स्थिति में वे डिफॉल्टर घोषित हो जाते हैं और भविष्य में उन्हें दोबारा ऋण मिलना मुश्किल हो जाता है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए सरकार एकमुश्त समझौता योजना लाने की तैयारी कर रही है। इस योजना के तहत किसान यदि मूलधन जमा कर देते हैं तो उनसे ब्याज की राशि नहीं ली जाएगी। इससे हजारों किसानों को दोबारा सहकारी तंत्र से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
शून्य ब्याज पर दिया गया रिकॉर्ड फसल ऋण
सहकारिता मंत्री ने बताया कि वर्ष 2024-25 में शून्य प्रतिशत ब्याज पर 34.42 लाख किसानों को कुल 21,493 करोड़ रुपये का फसल ऋण दिया गया। यह राशि पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 1,550 करोड़ रुपये अधिक है। सरकार किसानों को समय पर भुगतान के लिए प्रेरित कर रही है, ताकि सहकारी संस्थाओं की आर्थिक स्थिति भी मजबूत बनी रहे। वर्ष 2025-26 के लिए राज्य शासन ने 694 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है, जिससे यह योजना लगातार जारी रह सके।
युवाओं की सहकारी समितियों का विस्तार
सरकार की आगामी रणनीति में युवाओं की भूमिका को खास महत्व दिया गया है। योजना के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों की हर ग्राम पंचायत और शहरी क्षेत्रों के प्रत्येक वार्ड में युवाओं की सहकारी समितियां गठित की जाएंगी। इन समितियों को स्थानीय संसाधनों से जुड़े कार्यों, छोटे उद्योगों, खेल, पर्यटन और व्यायाम आधारित गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। इससे युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिल सकेंगे और पलायन पर भी रोक लगेगी।
नई सहकारी संस्थाओं का किया गया गठन
सहकार से समृद्धि अभियान के तहत प्रदेश में 656 नई प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां, 758 दुग्ध सहकारी समितियां और 203 मत्स्य सहकारी समितियां बनाई गई हैं। इन संस्थाओं को भूमि, कार्यालय, गोदाम और प्रबंधन से जुड़ी सहायता उपलब्ध कराई गई है। इसके साथ ही प्रदेश में कुल 4536 पैक्स का कंप्यूटरीकरण किया गया है। ई-पैक्स प्रणाली के जरिए किसानों को ऑनलाइन सेवाएं और मोबाइल पर लेन-देन की जानकारी दी जा रही है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है।
कमजोर जिला सहकारी बैंकों को संबल
प्रदेश में 38 जिला सहकारी बैंकों में से 15 बैंक कमजोर स्थिति में थे, जिसके कारण किसानों को ऋण वितरण में दिक्कत आ रही थी। राज्य सरकार ने पहले चरण में 6 जिला बैंकों को 300 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी। इसके बाद इन बैंकों का ऋण वितरण बढ़कर 600 करोड़ रुपये से अधिक हो गया। इसके अलावा 4518 पैक्स के माध्यम से वर्ष 2024-25 में 24.66 लाख मीट्रिक टन खाद का वितरण किया गया। रुपे किसान क्रेडिट कार्ड और माइक्रो एटीएम के जरिए वस्तु ऋण की सुविधा भी शुरू की गई है।
सहकारिता में नवाचार और निजी निवेश को बढ़ावा
सहकारी क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नवाचारों को बढ़ावा दिया जा रहा है। एमपी चीता नाम से सहकारी बीज ब्रांड शुरू किया गया है। इसके साथ ही सीपीपीपी मॉडल के तहत सहकारिता और निजी क्षेत्र के बीच साझेदारी को आगे बढ़ाया गया है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 में इस मॉडल के अंतर्गत कई समझौते किए गए। धान, नेपियर घास सहित अन्य फसलों में व्यावसायिक भागीदारी शुरू की गई है, जिससे किसानों की आय बढ़ने की संभावना है।
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पारदर्शी तरीके से हुई भर्ती, प्रशिक्षण पर जोर
सहकारी संस्थाओं के बेहतर संचालन के लिए मानव संसाधन विकास पर भी ध्यान दिया गया है। आईबीपीएस के माध्यम से पैक्स, जिला सहकारी बैंकों और अपेक्स बैंक में हजारों पदों पर पारदर्शी भर्ती की गई है। मिशन कर्मयोगी के तहत 5,200 से अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे किए गए हैं, जिससे कर्मचारियों को आधुनिक बैंकिंग, डिजिटल प्रणाली और प्रबंधन से जुड़ा प्रशिक्षण मिला है।
डेयरी क्षेत्र में मजबूती से पशुपालकों की बढ़ी आय
डेयरी विकास को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की अहम कड़ी मानते हुए एनडीडीबी के सहयोग से 2,200 से अधिक दुग्ध सहकारी समितियों को सक्रिय किया गया है। दूध संग्रह, गुणवत्ता जांच और विपणन व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया है। दूध के खरीद मूल्य में 2.50 रुपये से लेकर 8.50 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि की गई है, जिससे पशुपालकों की आय में सीधा फायदा हुआ है। इंदौर में मिल्क पाउडर प्लांट शुरू होने से प्रदेश की डेयरी क्षमता और बढ़ी है।
आने वाले वर्षों की यह है कार्य योजना
आगामी तीन वर्षों में डिफॉल्टर किसानों को मुख्यधारा में लाने, सभी पैक्स में ई-पैक्स के जरिए ऑनलाइन सेवाएं अनिवार्य करने और जिला सहकारी बैंकों में इंटरनेट बैंकिंग, क्यूआर कोड, एनईएफटी और आरटीजीएस जैसी सुविधाएं लागू करने की योजना है। राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 के अनुरूप राज्य की सहकारिता नीति में बदलाव किए जाएंगे। अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के दौरान उत्कृष्ट संस्थाओं को सम्मानित किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि सहकारिता के माध्यम से किसान, पशुपालक और युवा सभी आर्थिक रूप से मजबूत बनें और प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिले।
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