Property Rules : जमीन खरीदने से पहले मालिकाना हक की वास्तविक स्थिति देखना खरीददार की होती जिम्मेदारी
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Property Rules : अधिकांश लोगों की सोच होती है कि जमीन की रजिस्ट्री होते ही वे सारी उलझनों और जिम्मेदारियों से मुक्त हो गए हैं और खरीदी गई जमीन उनकी हो गई है। वास्तविकता में ऐसा नहीं है बल्कि रजिस्ट्री को लेकर लोगों में बहुत सी गलतफहमियां हैं। इन्हीं गलतफहमियों को बैतूल के जिला पंजीयक दिनेश कुमार कौशले ने दूर करते हुए इस संबंध में विस्तृत मार्गदर्शन दिया है। उनके द्वारा दी गई उपयोगी जानकारी का अनुसरण कर लोग प्रॉपर्टी की खरीदी में किसी भी तरह की होने वाली धोखाधड़ी से बच सकते हैं।
श्री कौशले बताते हैं कि संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 55 के अंतर्गत क्रेता का अधिकार एवं दायित्व है कि विक्रेता की टाईटल डीड प्राप्त कर स्वयं जांच कर संतुष्टी करें। पंजीयन अधिनियम में दस्तावेज के पंजीयन के समय संपत्ति टाईटल की जांच किए जाने का प्रावधान नहीं है।
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जिला पंजीयक ने बताया कि पंजीयन कार्यालय में की जाने वाली जांच, विक्रेता की फोटो से मिलान, पहचान पत्र के आधार पर की जाती है। विक्रेता द्वारा विक्रय पत्र में भूमि संबंधी स्वामित्व एवं अधिकार, संपत्ति विवरण, संपत्ति के अविवादित स्वामित्व की घोषणा के लिए विक्रेता ही संपूर्ण जिम्मेदार होता है। विधि विरूद्ध अंतरण के विक्रय पत्र का पंजीयन कर देने से कोई विधिक अधिकार अर्जित नहीं होते और दस्तावेज शुन्य होता है। संपत्ति पर बंधक रहने के संबंध में संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 56 का अवलोकन किया जा सकता है।
जिला पंजीयक ने अपील की है कि क्रेता या संपत्ति अर्जित करने वाला पक्ष विवादित संपत्ति के मामले में उलझे नहीं। इसके लिए जागरूक, सचेत रहकर संपत्ति के मालिकी हक एवं स्वामित्व के संबंध में निम्र प्रकार से खोजकर जानकारी प्राप्त कर अपने आप को संतुष्ट करने के पश्चात ही रजिस्ट्री कराएं।
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कृषि भूमि के मामलों में (Property Rules)
पटवारी अभिलेख जैसे खसरा, किश्त बंदी, नक्शा मिसल बन्दोबस्त, नामांतरण पंजी, भूमि स्वामी हक अन्यथा भारित की जांच जिनमें ग्रह निर्माण या क्रय संबंधी अग्रिमों के प्रकरण सम्मिलित हैं। सम्पति से संबंधित विल्लगमों के पता लगाने का कर्तव्य क्रेता पक्षकार स्वयं या अपने अधिवक्ता के माध्यमसे कार्यालय उप पंजीयक में उपलब्ध अभिलेखों से करा सकता है।
भूखण्ड भवनों (आवासीय/व्यवसायिक) की दशा में
नगर पालिका, नगर निगम, ग्राम पंचायत, पटवारी, तहसील, हाउसिंग बोर्ड, विकास प्राधिकरण के अभिलेख से पुष्टि की जा सकती है।
रजिस्ट्री के साथ प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्य (Property Rules)
अन्तरित की जा रही सम्पति के तीन कोणों से फोटोग्राफ पक्षकार द्वारा हस्ताक्षरित, भू-अधिकार एवं ऋण पुस्तिका तथ गतिशील वर्ष अद्यतन कम्प्यूटर खसरा (कृषि भूमि के लिए), पहचान के लिए फोटो पहचान पत्र की सत्यता के लिए पक्षकार स्वयं उत्तरदायी है।
फर्जी व्यक्ति द्वारा रजिस्ट्री
मिथ्याकथन करने, मिथ्या नकलों या अनुवादों का, परिदत्त करने छदम प्रतिरूपेण ओर दुष्प्रेरण के लिए शास्ति:- जो कोई संपत्ति अंतरण अधिनियम द्वारा दण्डनीय की गई बात का दुष्प्रेरण करेगा वह कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से या दोनों से दण्डनीय होगा।
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फर्जी भूमि स्वामी हक के आधार पर पंजीयन कराने के विरुद्ध कार्यवाही
विक्रय पत्र में यदि विक्रेता द्वारा सम्पत्ति के भू स्वामित्व के लिये विवरण एवं साक्ष्य यथा भू अधिकार एवं ऋण पुस्तिका, गतिशील वर्ष का अद्यतन कम्प्यूटर खसरा (कृषि भूमि के लिये) मानचित्र, फोटोग्राफ, प्रस्तुत किये जाते हैं, उक्त विवरण एवं प्रस्तुत अभिलेख कूटरचित तथा फर्जी, तैयार प्रस्तुत करने के लिये स्वयं विक्रेता अथवा गवाह दोषी है।
इस अपराधिक कार्य के विरुद्ध क्रेता जिसके साथ आर्थिक धोखाधड़ी हुई है वह तथा सब रजिस्ट्रार उनके समक्ष झूठे कथन करने के लिये पुलिस थाने में रिपोर्ट कर सकेगा। एक सम्पत्ति को दो व्यक्तियों को विक्रय किये जाने का कार्य, इसी श्रेणी में आयेगा।
विक्रेता के एक बार सम्पत्ति विक्रय पत्र का पंजीयन कराने के बाद उसका स्वामित्व सम्पत्ति से समाप्त हो जाता है। अत: वह दूसरे की सम्पत्ति को विक्रय करने का अपराध जानबूझकर करने झूठे दस्तावेज तैयार करने का दोषी है। पंजीयन कार्यालय में पंजीबद्ध दस्तावेज फर्जी नहीं होता बल्कि संव्यवहार फर्जी होता है जो कि पक्षकार द्वारा किया जाता है।
पंजीबद्ध दस्तावेज एक विधिक दस्तावेज होकर एक साक्ष्य है, जो कि वैध एवं अवैध दोनो श्रेणी के संव्यवहार का साक्ष्य सृजित करता है एवं धोखाधड़ी रोकने के प्रयोजन के लिये महत्वपूर्ण साक्ष्य है। अत: सभी नागरिक अचल सम्पत्ति क्रय करते समय राजस्व अभिलेख के आधार पर भूमि स्वामित्व हक की पूरी जांच करने के पश्चात विक्रय पत्र का पंजीयन कराये।



