World Richest Village: बगैर काला धन वापस आए ही इस ग्राम के हर व्यक्ति के खाते में आ गए 15-15 लाख रुपए, बना दुनिया का सबसे अमीर गांव

World Richest Village: पिछले लोकसभा चुनाव में हर व्यक्ति के खाते में 15-15 लाख रुपए होने की जोर शोर से चर्चा थी। कहा गया था कि भारत का विदेशों में इतना काला धन जमा है कि यह वापस आ जाए तो हर व्यक्ति के खाते में 15 लाख रुपए होंगे। यह बात भले ही चुनावी जुमला साबित हुई हो और लोग भी अब इसे भूलते जा रहे हो, लेकिन भारत के ही एक गांव के लोगों के लिए यह बात ख्वाब नहीं बल्कि हकीकत है। इस गांव के हर व्यक्ति के खाते में कम से कम 15-15 लाख रुपए की राशि है। यह बात अलग है कि उनके खातों में यह राशि ना तो काला धन की वापसी के बाद आई है और ना ही किसी सरकार ने डाली है।
यह गांव है गुजरात के कच्छ में बसा ग्राम ‘माधापर’। (Madhapar Village in Kutch, Gujarat) माधापर गांव के हर व्यक्ति को आप लखपति बोल सकते हैं क्योंकि इस गांव में हर व्यक्ति के खातों में करीब 15 लाख रुपये मौजूद हैं। यह गांव दुनिया के सबसे अमीर गांव के रूप में जाना जाता है। इस अमीर गांव के बारे में लोग कम ही जानते हैं। इस गांव के सभी लोगों की बैंक में जमा संपत्ति मिलाकर करीब 5 हजार करोड़ के आस-पास की है। यही वजह है कि इस गांव में करीब 17 बैंक मौजूद हैं।

हर तरह की सुख सुविधा है उपलब्ध
यदि पैसा है तो किसी तरह की कोई कमी भी गांव में नहीं हो सकती। यही बात इस गांव में भी देखी जा सकती है। इस गांव में हर तरह की सुख-सुविधाएं मौजूद हैं। यहां स्कूल, कॉलेज, गौशाला, हेल्थ सेंटर, कम्युनिटी हॉल और पोस्ट ऑफिस की अच्छी व्यवस्था है। इसके साथ गांव के पास अपनी झील और पार्क भी है। माधापर के अमीर होने की असल वजह ये है कि इस गांव के ज्यादातर लोग विदेशों में रहते हैं। लंदन में इस गांव का माधापर विलेज एसोसिएशन नाम का एक संगठन भी है जिसे साल 1968 में बनाया गया था। यहां के लोग लंबे समय से विदेशों में रहने के बावजूद अपने गांव से जुड़े रहते हैं।

विदेश में रहते पर जमीन से जुड़ा है नाता
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो माधापर गांव के 65 फीसदी लोग विदेशों में रहते हैं। लंदन में बनाया इनका संगठन एक-दूसरों को आपस में जोड़े रखता है और बीच-बीच में यहां के लोग गांव के बैंकों में पैसे भी भेजते रहते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी, लेकिन सालों से विदेशों में रहने के बावजूद भी यहां के लोगों ने अपनी गांवों के जमीन नहीं बेची है। यहां के निवासियों द्वारा विदेशों से लगातार भेजे जाने वाले पैसे से ही यहां के लोग भी इतने समृद्ध हो गए हैं।
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