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Mysterious Temple: चंडी माता के इस मंदिर में आरती करने आता हैं भालू का पूरा परिवार, प्रसाद खाकर निकल जाते जंगल में

माता चंडी के इस मंदिर में आराधना करने आते हैं भालू : betulupdate
माता चंडी के इस मंदिर में आराधना करने आते हैं भालू : Social Media

Mysterious Temple: भारत में नवरात्रि (Navratri 2022) धूमधाम से मनाई जाती है। नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होती है। इस दौरान मंदिरों में माता की पूजा और दर्शन के लिए भक्तों की भारी भड़ी पहुंचती है। देश में शक्ति की प्रतीक मां दुर्गा के कई प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर हैं। आज आपको एक ऐसे प्राचीन मंदिर के बारे में बताएंगे जहां मां दुर्गा की आराधना करने भालू आते हैं। हम छत्तीसगढ़ के एक मंदिर (Chhattisgarh Chandi Devi temple) के बारे में बात कर रहे हैं, माता के इस मंदिर में माता के दर्शन करने के लिए भालू का पूरा परिवार आता है और प्रसाद खाने के बाद बिना किसी को कुछ नुकसान पहुंचाए वापस जंगल में चला जाता है।

चंडी देवी का मंदिर (Chandi devi mandir) छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के घूंचापाली गांव (Ghunchapali, Mahasamund) में स्थित है। मंदिर में हमेशा भक्‍तों की भीड़ रहती है, लेकिन इसमें सबसे खासबात यह है कि इस मंदिर में प्रतिदिन आरती के समय माता के खास भक्‍त भालू आ जाता है। जी हां, इस मंदिर में माता का दर्शन करने भालू आते हैं। हैरानी इस बात की है कि भालू किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते और चुपचाप दर्शन कर के चले जाते हैं।

माता चंडी के इस मंदिर में आराधना करने आते हैं भालू : betulupdate
माता चंडी के इस मंदिर में आराधना करने आते हैं भालू : Social Media

आरती के समय आते और प्रसाद लेकर चलते जाते

बताया जाता है कि आरती के समय भालू मंदिर में पहुंचते हैं और मूर्ति की परिक्रमा करते हैं। इसके बाद वह प्रसाद लेते हैं। सबसे हैरानी वाली बात यह है कि कभी-कभी पुजारी अपने हाथों से उन्हें प्रसाद खिलाते हैं। मंदिर में जाने वाले लोगों का कहना है कि मंदिर में आने भालू पालतू लगते हैं। वह बिल्कुल सीधे दिखते हैं और प्रसाद लेकर वो जंगल की ओर दोबारा लौट जाते हैं।

मंदिर में हाेती थी तंत्र साधना

ग्रामीणों में मान्यता है कि भालू जामवंत के परिवार का हैं और वो देवी के भक्त हैं इसलिए वहां आते हैं। निवासियों का ये भी कहना है कि उन्होंने आज तक किसी को भी नुकसान नहीं पहुंचाया है। आपको बता दें कि पुराने वक्त में ये मंदिर तंत्र साधना के लिए जाना जाता था। यहां साधु-महात्मा का डेरा था जो तंत्र साधना करते थे, मगर 1950-1951 के वक्त ये मंदिर आम जनता के लिए खोल दिया गया। इस मंदिर में निर्माण कार्य कई बार हुआ है क्योंकि लोगों का दावा है कि देवी की मूर्ति अपने आप बढ़ती जा रही है।

माता चंडी के इस मंदिर में आराधना करने आते हैं भालू : betulupdate
माता चंडी के इस मंदिर में आराधना करने आते हैं भालू : Social Media

पशु बलि की मनाही

मां चंडी मंदिर में पशुबलि पूर्ण रुप से प्रतिबंध है, माता चंडी को सिर्फ फल-फूल, साड़ी, श्रृंगार सहित नारियल चढ़ाकर पूजा-अर्चना की जाती है, यहां जो भी अपनी मन्नतें लेकर आता है, माता रानी उसे पूरा करती हैं। सभी की मनोकामना पूरी होने की मान्यता नवरात्र में मां चंडी के दर्शन करने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।

• News Source : hindi.news18.com

उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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