Success Story: रेलवे स्टेशन पर बिताई रात, 1 हजार से शुरु किया बिजनेस, इस शख्स ने ऐसे खड़ी कर दी 35 हजार करोड़ की कंपनी
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Success Story Satyanarayan Nuwal: जीवन में किसी भी कार्य की सार्थकता के लिए मेहनत बेहद ही जरूरी होती है। बिना लगन के किया गया कार्य सफल नहीं होता है। इंसान को जीवन में कभी भी किसी प्रकार का कोई शॉर्ट कट नहीं अपनाना चाहिए, क्योकि इस प्रकार किया गया कार्य अधिक समय तक सफलता नहीं देता है, लोग कई बार ये सोचकर आगे बढ़ते कि शायद किस्मत उनका साथ देगी। पर यकीन मानिये किस्मत भी उन्ही का साथ देती है जो कड़ी मेहनत करना जानते है। आपके जीवन में किया गया कठिन परिश्रम ही आपको सफलता के चरण तक पहुंचाता है। सफलता से ज्यादा संघर्ष की गूंज होती है।
भारतीय उद्योगपति सत्यनारायण नुवाल की सफलता को आज सभी जानते हैं, लेकिन उनका संघर्ष इससे कहीं ज्यादा बड़ा है। परिवार की दिक्कतों की वजह से नुवाल को सिर्फ 10वीं तक पढ़ाई का मौका मिला और 19 साल की उम्र में शादी के बाद तो जैसे जिम्मेदारियों का पूरा बोझ आ गया। उन्हें स्टेशन तक पर रात गुजारनी पड़ी, लेकिन खराब हालात में भी उन्होंने सफलता प्राप्त कर ली।
सत्यनारायण नुवाल का परिचय और पढ़ाई
साधारण मिडिल क्लास राजस्थानी परिवार में जन्मे सत्यनारायण नुवाल के पिता सरकारी दफ्तर में क्लर्क थे। परिवार की जिम्मेदारियां इतनी थी कि 10वीं पास करने के बाद उन्होंने स्कूल छोड़कर दिया और नौकरी की तलाश में जुट गए। सिर्फ 19 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई। शादी के बाद जिम्मेदारियां और बढ़ गई तो वो अच्छी नौकरी की खोज में राजस्थान से महाराष्ट्र आ गए। न जेब में पैसे थे, न सिर पर छत। नौकरी मिल नहीं रही थी, उन्हें कई हफ्तों तक रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर सोना पड़ा था।
पहले बिज़नेस में नहीं मिली सफलता
घर की स्थिति देखते सत्यनारायण नुवाल ने फाउंटेन पेन की स्याही बेचने का काम शुरू किया, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। साल 1977 में वो महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के बल्हारशाह आ गए। एक दिन उनकी मुलाक़ात अब्दुल सत्तार अल्लाह भाई से हुई। उनके पास एक विस्फोटक लाइसेंस और एक मैगजीन था। आपको बता दें कि मैगजीन वो जगह होती है, जहां विस्फोटक रखे जाते हैं। अब्दुल सत्तार के पास लाइसेंस तो था, लेकिन वो कारोबार नहीं कर रहे थे। यहीं से उनके जीवन में नया मोड़ आया।
1 हज़ार से शुरू किया बिज़नेस
सत्यनारायण नुवाल 1,000 रुपये महीना देकर अल्लाहभाई के विस्फोटकों के गोदाम के साथ विस्फोटकों को बेचने के उनके लाइसेंस का उपयोग करते हुए धंधा करने लगे। जल्द ही ब्रिटेन की एक फर्म इंपीरियल केमिकल इंडस्ट्रीज के अधिकारियों की उन पर नजर पड़ी और धीरे धीरे उनकी गाड़ी पटरी पर आने लगी। शुरुआत में वो 250 रुपये में 25 किलो विस्फोटक खरीदकर बाजार में 800 रुपये में बेचते थे। 1995 में, उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक से 60 लाख रुपये का कर्ज लेकर विस्फोटक निर्माण की छोटी इकाई शुरू की।
ऐसे मिली सफलता (Success Story)
सन 1996 में उन्हें 6,000 टन विस्फोटक सालाना बनाने का लाइसेंस मिला। शुरुआत के दिनों में नुवाल कोयला खदानों में विस्फोटक की आपूर्ति करने लगे। वर्ष 2010 में सोलर देश की पहली निजी कंपनी थी जिसे भारत सरकार से भारत के रक्षा बलों के लिए हथियार बनाने के लिए विस्फोटक बनाने का लाइसेंस मिला था। साल 2021-22 में चार लाख टन सालाना की क्षमता के साथ वे दुनिया के चौथे सबसे बड़े विस्फोटक निर्माता और पैकेज्ड विस्फोटकों के सबसे बड़े निर्माता बन गए।
खड़ी की 36,000 करोड़ की कंपनी
कंपनी वर्तमान में मेक इन इंडिया मिशन के हिस्से के रूप में विस्फोटक और प्रोपेलेंट से लेकर ग्रेनेड, ड्रोन और वॉरहेड तक सब कुछ बनाती है। सौर उद्योग के लिए बाजार मूल्य एक दशक में 1,700% बढ़ गया। 2012 में 1,765 करोड़ से नवंबर 2022 तक 35,000 करोड़ से अधिक हो बाजार हो गया। सत्यनारायण नुवाल की कुल संपत्ति 2023 में 190 करोड़ डॉलर है। सोलर इंडस्ट्रीज में 73% हिस्सेदारी नुवाल की है। नुवाल की संपत्ति करीब 3 बिलियन डॉलर आंकी गई है।
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आज कितनी दौलत (Success Story)
सोलर एनर्जी इंडस्ट्रीज़ की नींव रखने के बाद उन्हें साल 1996 में सालाना 6 हज़ार टन विस्फोटक बनाने का लाइसेंस मिला। उनका कारोबार बढ़ता चला गया। आज उनकी कंपनी में 7,500 लोग काम करते हैं। उनकी कंपनी सोलर एनर्जी इंडस्ट्रीज़ 35,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की कंपनी बन चुकी है। फोर्ब्स 100 की सूची में शामिल सत्यनारायण नुवल का नेटवर्थ इस समय 1.8 अरब डॉलर पर पहुंच गया है।
पहले बिज़नेस में नहीं मिली सफलता
ऐसे मिली सफलता (Success Story)


