kanha ji maharaj : वृद्ध आश्रम बनना ही देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य : कान्हा जी महाराज
▪️ लोकेश वर्मा, मलकापुर
बैतूल जिला मुख्यालय के समीप ग्राम मलकापुर में श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस की मंगल बेला में श्री धाम वृंदावन से पधारे कथा प्रवक्ता परम पूज्य कान्हा जी महाराज ने गजेंद्र मोक्ष, समुद्र मंथन व वामन अवतार की कथा श्रवण कराते हुए कहा कि भगवान अपने भक्तों के साथ सदा हर पल खड़े रहते हैं। वे भक्तों के हाथों से प्रेम और भाव के साथ दी गई वस्तु उसी तरह ग्रहण करते हैं, जिस तरह से उन्होंने द्रौपदी का पत्र और गजेंद्र का पुष्प ग्रहण किया। भगवान ने काल रुपी मकर से भक्त गजराज की रक्षा की तो द्रौपदी की पुकार पर संकट मिटाने स्वयं दौड़े चले आये।
यह सारी कथाएं ये प्रमाणित करती हैं कि भक्तों के भाव से सदा बंधे रहने वाले भगवान भक्तों के साथ अपना स्नेह निभाने खुद आते हैं। ठाकुर जी यह कभी नहीं चाहते कि उसके भक्त के पास अहंकार रहे। ठाकुर जी अपने भक्त से ये भी कहते हैं कि मुझे, वो वस्तु अर्पित कर, जो मैंने तुझे कभी नहीं दी। ठाकुर जी कहते हैं- ऐसी कोई वस्तु जो मैंने तूझे नहीं दी, वह अहंकार है। यह मैंने तुझे नहीं दिया बल्कि तूने खुद इसे अपने भीतर तैयार किया है।

जूना अखाड़ा के संत स्वामी जमुना गिरी पधारे
नंद महोत्सव की कथा में श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के श्रेष्ठ संत स्वामी जमुना गिरी जी महाराज, दत्त कुटिया बलीघाट से पधारे और पधार कर भागवत भगवान का पूजन किया एवं व्यासपीठ विराजित कान्हा जी महाराज को आशीर्वाद दिया।
जीवन में कष्ट है तो करें गजेंद्र मोक्ष का पाठ
कान्हा महाराज ने कहा कि मनुष्य के जीवन से कष्ट हटाने वाले गजेंद्र मोक्ष की कथा बड़ी रोचक है। जिसके भी जीवन में कष्ट ही कष्ट है वह नित्य गजेंद्र मोक्ष का पाठ करें। कष्ट वैसे ही कट जाएगा जैसे अग्नि से रूई जल जाती है।
- Read Also : 1000 ke naye note : नए साल से बंद हो रहे 2000 के नोट! एक हजार का नया नोट लेगा इसकी जगह, जानें क्या मामला
माता-पिता को वृद्ध आश्रम में रखना पाप है
धरती को माता कहने वाले देश में वृद्ध आश्रम बनना ही देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है। कान्हा महाराज ने भावुक होकर कहा कि जगत में हर पुत्र का एक धर्म होना चाहिए। ऐसा कर्म करो कि उसका पिता सीना तान कर कहे कि यह मेरा पुत्र है। माता-पिता पाल पोस कर बड़ा करते हैं और उनको ही वृद्ध आश्रम में छोड़ दिया जाता है। मेरी बहनों आप भी ऐसा कोई काम मत करो कि अपने पिता को सिर झुकाना पड़े। पुत्र और पुत्रियों से पिता और माता शर्मिंदा ना हो यही तो भागवत है।
कथा पांडाल में हुआ नंद महोत्सव
महाराज श्री ने नंद महोत्सव की दिव्य कथा का वर्णन किया। कथा श्रवण कर रही माताएं श्वेत वस्त्र में थीं और पुरुष वर्ग भगवा कपड़े पहने नंद उत्सव में शामिल हुए। नंद महोत्सव में नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की…. भजन से पूरा पांडाल गूंज उठा। सभी भक्तगण भावविभोर होकर के झूम उठे। वृंदावन से पधारे संगीत कलाकार भोले शास्त्री, किशन जी, राजा जी, मोहनलाल जी, शशांक, वशिष्ट, पवन, वंश जी, विप्रदेव शास्त्री, दीपक शास्त्री आदि ने सुंदर भजनों की प्रस्तुति दी।
- Read Also : Ladoo Kaise Baneye: सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है ये लड्डू, होगा जोड़ों के दर्द का खात्मा, इस तरह बनाए
कथा में यजमान राकेश महतो, नवनीत महतो अनित महतो ने व्यास पीठ का पूजन कर श्रीमद्भागवत की आरती की। कथा श्रवण कर रहे बद्रीप्रसाद वर्मा, सुजीत वर्मा ने बताया कि कल की कथा में गोवर्धन पूजन, गिरिराज जी का छप्पन भोग एवं भगवान की कृष्ण बाल लीलाओं का वर्णन होगा। आज हुई कथा सुनने के लिए नीचे क्लिक करें…



