MP Dussehra Rain Alert 2025: एमपी में दशहरा पर भी जमकर बरसेंगे बादल, एक्टिव हो रहा नया सिस्टम
MP Dussehra Rain Alert 2025: मध्यप्रदेश में मानसून अभी विदाई की ओर है, लेकिन कुछ एक्टिव सिस्टम के असर से लगातार बारिश का दौर बना हुआ है। राज्य में मानसून ट्रफ और लो प्रेशर एरिया सक्रिय हैं, जिसकी वजह से कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश दर्ज की जा रही है। सोमवार को भी भोपाल, इंदौर और जबलपुर सहित कई हिस्सों में हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। अगले 24 घंटे के लिए मौसम विभाग ने पूरे प्रदेश में यलो अलर्ट जारी किया है।
दशहरे पर भी बारिश के आसार
बारिश के चलते दशहरा आयोजन समितियों में भी चिंता बढ़ी हुई है। विभाग का कहना है कि एक नया सिस्टम 1 अक्टूबर से सक्रिय होगा, जिसका असर 2 अक्टूबर को दशहरे पर देखने को मिल सकता है। आयोजक समितियां पहले से ही पुतलों को सुरक्षित रखने के उपाय कर रही हैं ताकि मौसम का असर उत्सव पर न पड़े।

रविवार को इन जिलों में बारिश
रविवार को धार जिले के मनावर और बड़वानी जिले के सेंधवा में अच्छी बारिश हुई। सेंधवा में तेज बरसात से खेतों में पानी भर गया, जिससे मक्के की फसल को नुकसान पहुंचा। यहां एक कच्चा मकान भी ढह गया।
नर्मदापुरम जिले में तवा डैम के पांच गेट खोले गए। वहीं नरसिंहपुर में आधा इंच से ज्यादा पानी दर्ज हुआ। बैतूल, इंदौर, पचमढ़ी, रतलाम, उज्जैन, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, मंडला, सागर और सिवनी में भी बारिश दर्ज की गई।

दर्जन भर जिलों से मानसून बिदा
अब तक राज्य के 12 जिलों से मानसून बिदा हो चुका है। ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर और रतलाम समेत कई क्षेत्रों से इसकी वापसी हो चुकी है। राजगढ़ और अशोकनगर के कुछ हिस्सों से भी मानसून जा चुका है।
आगे बढ़ सकती है मानसून की बिदाई
विभाग का अनुमान है कि अक्टूबर के पहले सप्ताह में पूरे प्रदेश से मानसून की विदाई की स्थिति बन जाएगी। हालांकि नया सिस्टम बनने से विदाई की तारीख आगे बढ़ सकती है।
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अब तक 45 इंच से ज्यादा वर्षा
बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस बार औसतन 37.2 इंच बारिश की अपेक्षा थी, जबकि अब तक 45 इंच से ज्यादा बरसात हो चुकी है। यानी प्रदेश में सामान्य से करीब 122 प्रतिशत बारिश दर्ज हुई है।
गुना जिले में सबसे ज्यादा बारिश
गुना जिले में सबसे ज्यादा 65.5 इंच पानी बरसा है। मंडला और रायसेन में 62 इंच से अधिक तथा श्योपुर और अशोकनगर में 56 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज हुई है। दूसरी ओर शाजापुर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी और धार सबसे कम बारिश वाले जिले रहे हैं।
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पहले सूखे की स्थिति, फिर कोटा पूरा
इंदौर और उज्जैन संभाग की स्थिति इस बार विशेष रूप से चर्चा में रही। शुरुआत में यहां बरसात बेहद कम हुई, जिससे चिंता बढ़ गई थी। इंदौर में तो एक समय प्रदेश की सबसे कम बारिश दर्ज की गई थी।
हालांकि सितंबर में हुए भारी बरसात ने स्थिति बदल दी और अब इंदौर संभाग में सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा हो चुका है। उज्जैन जिले में अब भी कोटा अधूरा है और शाजापुर सबसे कम बारिश वाला जिला बना हुआ है।
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