wheat prices : फिर हुई मंडी में गेहूं की बंपर आवक, भाव में भी नहीं आ रही कोई गिरावट, देश से बड़े पैमाने पर निर्यात की तैयारी

बैतूल की कृषि उपज मंडी में गेहूं के भाव में कोई नरमी नहीं आ रही है। यहां गेहूं के भाव सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य से काफी अधिक मिल रहे हैं। यही कारण है कि मंडी में गेहूं की आवक लगातार बढ़ती जा रही है। शुक्रवार को यहां 17614 बोरे गेहूं की आवक हुई। जो कि पिछले 4 दिनों में सबसे ज्यादा है।
बैतूल मंडी में 5 अप्रैल को 11159 बोरे, 6 अप्रैल को 12511 बोरे, 7 अप्रैल को 12432 बोरे गेहूं की आवक हुई थी। इसके विपरित 8 अप्रैल को 17614 बोरे गेहूं की आवक हुई। दूसरी ओर जिले के सरकारी खरीदी केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। मंडी में गेहूं की बंपर आवक के पीछे वजह यह है कि यहां गेहूं के रेट बेहद अच्छे मिल रहे हैं। आवक बढ़ने के बावजूद रेट में कोई गिरावट नहीं आ रही है।
8 अप्रैल को गेहूं के अधिकतम रेट 2111 रुपए और प्रचलित मूल्य 2054 रुपए रहे। इससे पहले 7 अप्रैल को यह क्रमशः 2141 और 2055, 6 अप्रैल को 2141 और 2050 और 5 अप्रैल को 2121 और 2044 रुपए रहे थे। मंडी में गेहूं के अच्छे दाम मिलने का ही नतीजा है कि किसान समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने में जरा भी रुचि नहीं ले रहे हैं।
देश में गेहूं को लेकर एक बड़ी खबर यह है कि विश्व बाजार में गेहूं की बढ़ती मांग के कारण अप्रैल-जुलाई के दौरान व्यापारियों ने 30 से 35 लाख टन गेहूं एक्सपोर्ट करने को लेकर कॉन्ट्रैक्ट किये हैं। खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने शुक्रवार (8 अप्रैल, 2022) को यह जानकारी दी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश का गेहूं निर्यात कारोबारी साल 2021-22 में 70 लाख टन को पार कर गया, जबकि कारोबारी साल 2020-21 में यह निर्यात 21.55 लाख टन था।
इन राज्यों से किया जाएगा ज्यादा एक्सपोर्ट
पांडे ने संवाददाताओं से कहा कि, ‘‘व्यापार जगत का अनुमान है कि इस साल अप्रैल-जुलाई की अवधि के दौरान लगभग 30-35 लाख टन गेहूं निर्यात के लिए अनुबंध किया गया है।’’ उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि गेहूं की अधिकतम मात्रा का निर्यात गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश से किया जायेगा क्योंकि इन राज्यों की बंदरगाहों से निकटता है और वहां आसानी से इनका निर्यात किया जा सकता है।
सचिव के अनुसार नतीजतन, निजी व्यापारी इन राज्यों से निर्यात के लिए गेहूं खरीद रहे हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय कीमतें और बढ़ती हैं तो व्यापारी हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे दूसरे राज्यों से अनाज खरीद सकते हैं।
भारत गेहूं का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक
उन्होंने कहा कि निजी व्यापारियों द्वारा एक्सोर्ट के लिए गेहूं खरीद के कारण सरकारी खरीद में कमी आ सकती है, लेकिन यह कहना जल्दबाजी होगी। हालांकि, सरकार नियमित रूप से स्थिति पर नजर रखे हुए है. पिछले हफ्ते, वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान देश का गेहूं निर्यात 100 लाख टन के स्तर को पार कर सकता है।
रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद कई देश भारत और दूसरे देशों से गेहूं खरीद रहे हैं। रूस के खिलाफ पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों ने उनके गेहूं के निर्यात को कम कर दिया है। भारत सरकार वैश्विक बाजार में गेहूं की ऊंची कीमतों की स्थिति का फायदा लेने के लिए गेहूं के निर्यात को बढ़ावा देने की योजना बना रही है। भारत दुनिया में गेहूं का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।



