MP Fertilizer Distribution: खाद वितरण में गड़बड़ी पर कलेक्टर होंगे जिम्मेदार, सीएम मोहन यादव की सख्त चेतावनी
MP Fertilizer Distribution: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि मध्यप्रदेश में उर्वरक वितरण की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करना अब हर जिले के कलेक्टर की सीधी जिम्मेदारी होगी। यदि कहीं पर भी उर्वरक वितरण को लेकर गड़बड़ी या अव्यवस्था की शिकायत मिलती है, तो उसका उत्तरदायित्व सीधे जिले के कलेक्टर पर आएगा।
मुख्यमंत्री ने बुधवार को अपने निवास समत्व भवन से आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिए। बैठक में मुख्य सचिव, डीजीपी सहित सभी वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जबकि जिलों के कलेक्टर वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
MP Fertilizer Distribution के लिए लगातार संवाद की जरूरत
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिला प्रशासन को चाहिए कि वह किसान संगठनों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखे। खाद वितरण से जुड़े निर्णय और उपलब्धता की वास्तविक जानकारी किसान संगठनों के प्रतिनिधियों तक पहुँचनी चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि:
- जिलों में उपलब्ध उर्वरक का स्टॉक सार्वजनिक किया जाए।
- पैक्स और निजी विक्रय केंद्रों की निगरानी की जाए।
- यदि कहीं अतिरिक्त विक्रय केंद्र खोलने की जरूरत हो, तो तुरंत व्यवस्था की जाए।

MP Fertilizer Distribution में कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई
बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि खरीफ 2025 के लिए यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी, एमओपी जैसे उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। इसके साथ ही नकली और अवैध खाद वितरण पर नकेल कसने के लिए अब तक 53 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।
- 88 लाइसेंस रद्द
- 102 लाइसेंस निलंबित
- 406 विक्रेताओं पर बिक्री प्रतिबंध

MP Fertilizer Distribution में नवाचार से सुधार की उम्मीद
मुख्यमंत्री ने बताया कि कुछ जिलों ने खाद वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए नवाचार अपनाए हैं।
- दमोह जिले में टोकन वितरण और उर्वरक वितरण अलग-अलग स्थानों पर किया जा रहा है।
- जबलपुर जिले में किसानों को फोन कॉल से टोकन नंबर दिए जा रहे हैं और वितरण केंद्र पर डिस्प्ले बोर्ड लगाकर पूरी जानकारी दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने अन्य जिलों को भी इस प्रकार की व्यवस्थाएं अपनाने के निर्देश दिए।

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बाढ़ और अतिवृष्टि से निपटने के निर्देश
बैठक में मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि बाढ़ और अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य तुरंत शुरू किए जाएं। उन्होंने कहा कि –
- जनहानि और पशुहानि होने पर 24 घंटे के भीतर राहत राशि दी जाए।
- बाढ़ के दौरान अस्थाई कैंप, भोजन और राशन वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित हो।
- पुल-पुलिया पर बैरिकेटिंग कर लोगों को खतरे से बचाया जाए।
इस समय प्रदेश में औसत से 21% अधिक वर्षा हो चुकी है। 1 जून से 2 सितम्बर तक 971.5 मिमी बारिश दर्ज की गई है।
प्रभावित किसानों के लिए राहत राशि
बैठक में बताया गया कि:
- अब तक 394 लोगों की मौत बाढ़ और अतिवृष्टि से हुई।
- 1814 पशुहानि दर्ज हुई।
- 5000 से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हुए।
- लगभग 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल की फसलें प्रभावित हुईं।
राज्य सरकार ने 17,500 किसानों के लिए 20 करोड़ रुपये से अधिक की राहत राशि स्वीकृत की है।
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MP Fertilizer Distribution में सरकार का रुख
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हर परिस्थिति में किसानों के साथ खड़ी है। उनका मुख्य संदेश यही था कि –
- खाद वितरण पूरी तरह व्यवस्थित हो।
- किसानों को वास्तविक जानकारी मिले।
- अवैध गतिविधियों को बर्दाश्त न किया जाए।
- बाढ़ और अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को तत्काल राहत दी जाए।
लगातार मिल रही MP Fertilizer Distribution में गड़बडी की शिकायतें
गौरतलब है कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से खाद वितरण में भारी गड़बड़ी की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। किसानों को रात-रात भर कतार में खड़े रहने के बावजूद एक बोरी खाद भी नसीब नहीं हो पा रही है। इसके विरोध में कई स्थानों पर किसानों ने चक्काजाम और प्रदर्शन जैसे कदम भी उठाए हैं।
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