खेती किसानी

Pilot Turned Farmer Success Story: पायलट की ऊंची उड़ान छोड़ खेतों में हल थामा: अब खेती से कमा रहे लाखों, राघव शरद की प्रेरक कहानी

Pilot Turned Farmer Success Story: आज जब ज्यादातर युवा खेती से दूरी बना रहे हैं, ऐसे समय में कुछ लोग इस धारणा को तोड़ रहे हैं कि खेती में भविष्य नहीं है। पढ़े-लिखे युवा अब आधुनिक तरीके से खेती को अपनाकर न सिर्फ आत्मनिर्भर बन रहे हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी मिसाल पेश कर रहे हैं। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में रहने वाले राघव शरद देवस्थले की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिन्होंने अमेरिका में पायलट की लाखों रुपये की नौकरी छोड़कर खेती को अपना जीवन बना लिया और आज इसी से शानदार कमाई कर रहे हैं।

नकदी फसलों की ओर बढ़ता रुझान

वर्तमान समय में खेती केवल परंपरा तक सीमित नहीं रह गई है। अब यह एक व्यवसाय के रूप में उभर रही है। देशभर में लोग पारंपरिक खेती छोड़कर नकदी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं। आधुनिक तकनीक, जैविक उत्पादन और वैल्यू एडिशन के जरिए किसान अच्छी आमदनी हासिल कर रहे हैं। इसी बदलाव की तस्वीर राघव शरद के जीवन में भी देखने को मिलती है।

एक सवाल जिसने बदल दी सोच

न्यूज 18 में प्रकाशित खबर के अनुसार, राघव शरद देवस्थले ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि उत्तराखंड में उनके जीवन से जुड़ी एक घटना ने उनकी सोच को पूरी तरह बदल दिया। वहां उन्होंने देखा कि एक बच्चा यह कहने में झिझक रहा था कि उसके पिता किसान हैं। यह बात उन्हें भीतर तक छू गई। उसी क्षण उन्होंने तय कर लिया कि वे खेती को अपनाएंगे (Pilot Turned Farmer Success Story) और किसान होने पर गर्व महसूस करेंगे। यही वह मोड़ था, जिसने उन्हें अमेरिका की आरामदायक नौकरी छोड़ने के लिए प्रेरित किया।

Pilot Turned Farmer Success Story: पायलट की ऊंची उड़ान छोड़ खेतों में हल थामा: अब खेती से कमा रहे लाखों, राघव शरद की प्रेरक कहानी
राघव शरद

अमेरिका से मध्य प्रदेश तक का सफर

राघव शरद मूल रूप से महाराष्ट्र के रहने वाले हैं, जबकि उनका जन्म छत्तीसगढ़ के रायपुर में हुआ था। अमेरिका में उन्होंने पायलट की ट्रेनिंग ली और वहां एक प्रतिष्ठित नौकरी भी हासिल की। इसके बावजूद उन्होंने सब कुछ छोड़कर भारत लौटने का फैसला (Pilot Turned Farmer Success Story) किया। भारत आने के बाद उन्होंने मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के ग्राम मतमुर को अपनी कर्मभूमि बनाया और खेती की शुरुआत की।

जैविक खेती से बदली किस्मत

करीब पांच साल पहले राघव शरद ने तुलसी और लेमन ग्रास की जैविक खेती (Pilot Turned Farmer Success Story) शुरू की। उन्होंने शुरुआत से ही रासायनिक खेती से दूरी बनाए रखी और प्राकृतिक तरीकों को अपनाया। खेती से प्राप्त होने वाले कच्चे माल को वे सोलर ड्रायर की मदद से सुखाते हैं, जिससे उसकी गुणवत्ता बनी रहती है। इसके बाद वे अलग-अलग उत्पाद तैयार करते हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है।

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खुद तैयार करते हैं उत्पाद

रिपोर्ट के मुताबिक, राघव शरद अपनी यूनिट में लेमन टी, ट्राइबल टी मसाला, चाट मसाला, हाइड्रेट लाल अमाड़ी और धूपबत्ती जैसे कई उत्पाद खुद बनाते हैं। ये उत्पाद स्थानीय बाजारों के साथ-साथ अन्य जिलों में भी भेजे जाते हैं। इसके अलावा वे अपने सामान की ऑनलाइन बिक्री भी करते हैं। इस तरीके से उन्हें खेती से पहले की नौकरी की तुलना में कई गुना अधिक आमदनी होने लगी है।

सामाजिक सेवा से भी रहा जुड़ाव

राघव शरद ने बताया कि नौकरी छोड़कर भारत लौटने के बाद उन्होंने इंदौर में दृष्टिहीन बच्चों को पढ़ाने का कार्य भी किया। इसके बाद वर्ष 2013 से 2016 तक उन्होंने उत्तराखंड में राहत कार्यों में अपनी सेवाएं दीं। खेती के साथ-साथ समाज सेवा का यह अनुभव भी उनके जीवन का अहम हिस्सा रहा है।

युवाओं के लिए प्रेरणा हैं राघव

आज राघव शरद देवस्थले उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं, जो खेती को पिछड़ा पेशा मानते हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर सोच सही हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो खेती न सिर्फ सम्मान देती है, बल्कि आर्थिक रूप से भी मजबूत बनाती है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि खेतों से जुड़कर भी सफलता की नई उड़ान भरी जा सकती है।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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