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Panchmukhi Mahadev Mandir Video: “आधुनिकता तो बह गई इतिहास आज भी सीना ताने खड़ा है….” महादेव मंदिर का ये वीडियो देख आप भी ऐसा ही कहेंगे

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Viral Video: "आधुनिकता तो बह गई इतिहास आज भी सीना ताने खड़ा है" महादेव मंदिर का ये वीडियो देख आप भी ऐसा ही कहेंगेViral Video: इस समय पूरे देश में भारी वर्षा हो रही है। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब जैसे कई राज्यों में बाढ़ से हालात खराब हैं। बात करें हिमाचल प्रदेश कि तो वहां भारी बारिश के वजह से बाढ़ ने तबाही मचा रखी है। जगह-जगह बादल फट रहें है और बाढ़ का पानी इलाकों में घुस गया है। उफनाती नदियों ने पुल, पहाड़ और बड़े-बड़े मकानों को धाराशायी कर दिया है। लेकिन इस मंदिर को कोई नुकसान नहीं हुआ है। शिवजी का ये मंदिर लगभग 300 वर्ष से भी ज्यादा पुराना है। यह मंदिर दिखने में हूबहू केदारनाथ मंदिर की तरह दिखता है।

जल प्रलय से नुकसान और मौतों के बीच मंडी का ऐतिहासिक पंचवक्त्र मंदिर चर्चा में है। यह मंदिर ब्यास नदी और सुकेती खड्ड के किनारे बना हुआ है। जैसे 2013 की बाढ़ में केदारनाथ मंदिर बचा रहा वैसे ही 2023 की इस तबाही में मंडी का पंचवक्त्र मंदिर भारी सैलाबों के बीच भी डटा रहा। इसकी वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई।

मंदिर के आसपास आई तबाही

2023 में हिमाचल प्रदेश में आने वाली इस तबाही के बाद जो कुछ मंडी के महादेव मंदिर के आसपास हुआ है, इसे भी सालों तक याद रखा जाएगा। पंचवक्त्र मंदिर यानी महादेव की वह मूर्ति जिसमें पांच मुख हैं। पंचमुखी महादेव के इस मंदिर के आसपास तबाही के निशान दिखाई पड़ते हैं। मंडी शहर को इस मंदिर से जोड़ने वाला पुराना लोहे का पुल सैलाब का शिकार हो गया है। पुल बह गया तो मंदिर तक श्रद्धालुओं के आने के लिए एकमात्र रास्ता शहर के बीचो-बीच है, लेकिन फिलहाल खतरे को देखते हुए आम लोगों के मंदिर में जाने की मनाही है।

स्थानीय पुजारी नवीन कौशिक बताते हैं कि यूं तो मंदिर 16 वी सदी में राजा ने बनवाया था, लेकिन मान्यता है कि यह मंदिर खुद पांडवों द्वारा बनवाया गया था, जहां खुद पांडवों ने पूजा-अर्चना थी। मंदिर के पूरे प्रांगण में ब्यास नदी द्वारा लाया गया रेत और मलबा भरा हुआ है। मंदिर का पूर्वी और उत्तरी द्वार सबसे ज्यादा लहरों की चपेट में था, लेकिन ताकतवर ब्यास नदी भी सदियों पुराने मंदिर को नुकसान नहीं पहुंचा पाई।

महादेव ने की हिमाचल की रक्षा

स्थानीय लोग कहते हैं कि जल्दी प्रशासन के साथ मिलकर इस मंदिर की भव्यता और पुनर्निर्माण का काम शुरू होगा। लेकिन फिलहाल महादेव की मूर्ति रेत की परत से ढक गई है और उनके दर्शन करना अभी मुश्किल है। 5 सदी पुराना यह ऐतिहासिक प्राचीन शिव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है और इसीलिए स्थानीय लोग मानते हैं कि इतनी बड़ी तबाही उन्होंने जो पहले कभी नहीं देखी बावजूद उसके उनका शहर और उनका प्रदेश बड़े नुकसान से बच गया जो सिर्फ महादेव की कृपा से ही हो सकता है। मंडी के लोग मानते हैं कि महादेव की छोटी काशी के प्रभाव ने प्रकृति के प्रकोप को कम कर दिया और हिमाचल को बड़ी तबाही से बचा लिया।

सुरक्षित रहा शिव मंदिर

जल प्रलय से नुकसान और मौतों के बीच मंडी का ऐतिहासिक पंचवक्त्र मंदिर चर्चा में है। यह मंदिर ब्यास नदी और सुकेती खड्ड के किनारे बना हुआ है। उफनाती नदियों ने पुल, पहाड़ और बड़े-बड़े मकानों को धाराशायी कर दिया है। लेकिन इस मंदिर को कोई नुकसान नहीं हुआ है। य​ह मंदिर 300 साल से अधिक पुराना है। राजा सिद्ध सेन ने इसका निर्माण (1684-1627)  करवाया था।

पंचवक्‍त्र मंदिर की खासियत

पंचवक्‍त्र मंदिर के गर्भगृह में स्थित शंकर भगवान की मूर्ति के पांच मुख है। मान्‍यता है कि यह पांच मुख शिव के अलग-अलग रूप ईशान, अघोरा, वामदेव, तव्‍पुरूष और रूद्र को दिखाते है। पंचवक्‍त्र महादेव मंदिर भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण (एएसआई) के संरक्षित स्‍मारकों में है।

यहां देखेंं वीडियो (Viral Video)…..

सोशल मीडिया में वायरल (Viral Video) हुए वीडियो में देखा जा सकता है ब्यास नदी में आए जल सैलाब से मंदिर चारों ओर से पानी से घिरा हुआ है। मंदिर का शिखर और उसके बगल का परिसर नजर आ रहा है। कई लोग इस घटना को केदारनाथ में जून 2013 को आई बाढ़ से जोड़ रहे हैं। तब बादल फटने से हुई भारी जनहानि के बीच मुख्य मंदिर सुरक्षित रहा था। तब मंदिर और धारा के बीच एक शिला आने के कारण केदारनाथ मंदिर सुरक्षित रहा था।

उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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