खेती किसानी

IFFCO DAP Fertilizer Supply: अब नहीं होगी डीएपी की किल्लत, सस्ता भी हो सकता है, इफको उठा रहा यह बड़े कदम

IFFCO DAP Fertilizer Supply: खेती की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए और किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार की नई रणनीति तैयार की है। संस्था का फोकस उन देशों में उत्पादन इकाइयां स्थापित करने पर है, जहां खाद बनाने के लिए जरूरी कच्चा माल प्रचुर मात्रा में मौजूद है।

इसी क्रम में श्रीलंका, जॉर्डन और सेनेगल जैसे देशों में नए प्लांट लगाने या मौजूदा इकाइयों का विस्तार करने की योजना बनाई जा रही है। इफ्को का मानना है कि इससे भारत को खाद की आपूर्ति अधिक सुरक्षित, सस्ती और स्थिर हो सकेगी।

कृषि व्यवस्था में उर्वरकों की अहम भूमिका

भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का विशेष स्थान है। देश की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है और फसलों की अच्छी पैदावार के लिए उर्वरकों की नियमित आपूर्ति जरूरी होती है। डीएपी और अन्य फॉस्फेट आधारित उर्वरक किसानों की मुख्य जरूरतों में शामिल हैं। लेकिन भारत में रॉक फॉस्फेट और फॉस्फोरिक एसिड का घरेलू उत्पादन बहुत सीमित है। इसी कारण इन कच्चे मालों के लिए विदेशों पर निर्भरता बनी रहती है, जो कई बार आपूर्ति और कीमत दोनों को प्रभावित करती है।

श्रीलंका में उत्पादन इकाई लगाने की योजना

इफ्को श्रीलंका में एक नया उर्वरक संयंत्र लगाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। श्रीलंका रॉक फॉस्फेट के बड़े स्रोतों में गिना जाता है, जिसका इस्तेमाल डीएपी और फॉस्फोरिक एसिड बनाने में किया जाता है। मौजूदा वैश्विक हालात में, जब कच्चे माल की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है, वहां उत्पादन इकाई स्थापित करने से इफ्को को लगातार और भरोसेमंद आपूर्ति मिल सकेगी। इससे उत्पादन प्रक्रिया सुचारु रहेगी और भारत तक खाद पहुंचाने में होने वाली देरी कम होगी।

जॉर्डन में क्षमता विस्तार का प्रस्ताव

जॉर्डन में इफ्को पहले से ही एक बड़ा फर्टिलाइजर प्लांट संचालित कर रहा है। अब इस संयंत्र की उत्पादन क्षमता को दोगुना करने की तैयारी है। मौजूदा क्षमता को 5 लाख टन से बढ़ाकर 10 लाख टन करने का लक्ष्य रखा गया है। जॉर्डन विश्व स्तर पर रॉक फॉस्फेट उत्पादन के लिए जाना जाता है। वहां क्षमता बढ़ने से भारत को अधिक मात्रा में डीएपी मिल सकेगा और घरेलू मांग को पूरा करना आसान हो जाएगा। यह कदम भारत की खाद आपूर्ति को मजबूत आधार देगा।

सेनेगल में निवेश बढ़ाने की रणनीति

सेनेगल में इफ्को की पहले से आंशिक हिस्सेदारी मौजूद है। अब संस्था वहां या तो अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर विचार कर रही है या फिर एक नई उत्पादन इकाई स्थापित करने की योजना बना रही है। सेनेगल में रॉक फॉस्फेट के बड़े भंडार हैं, जो भारत के लिए इसे एक अहम साझेदार देश बनाते हैं। वहां निवेश बढ़ने से भारत को लंबे समय तक स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी और आयात से जुड़ी अनिश्चितताओं में कमी आएगी।

कच्चे माल की उपलब्धता बनी बड़ी चुनौती

इफ्को के प्रबंधन का कहना है कि वैश्विक स्तर पर खाद निर्माण के लिए जरूरी कच्चे पदार्थों की उपलब्धता आज एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। कभी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें अचानक बढ़ जाती हैं, तो कभी शिपमेंट में देरी हो जाती है। ऐसे हालात में उत्पादन प्रभावित होता है और लागत भी बढ़ती है। कच्चे माल के स्रोत वाले देशों में ही प्लांट लगाने से इन समस्याओं से काफी हद तक राहत मिल सकती है।

भारत की खाद जरूरत और आयात पर निर्भरता

भारत को हर साल लगभग 10 से 11 लाख टन डीएपी की आवश्यकता होती है। इसमें से लगभग आधी मात्रा विदेशों से आयात करनी पड़ती है। वैश्विक तनाव, युद्ध जैसी परिस्थितियां और सप्लाई चेन में आने वाले व्यवधान भारत के लिए चुनौती बन जाते हैं। इन कारणों से डीएपी उत्पादन की लागत बढ़ जाती है और किसानों तक खाद पहुंचाने में भी दिक्कत आती है। विदेशों में उत्पादन इकाइयां होने से इन जोखिमों को कम किया जा सकेगा।

इफ्को की वित्तीय स्थिति और उत्पादन क्षमता

वित्त वर्ष 2025 में इफ्को ने मजबूत वित्तीय प्रदर्शन किया। इस अवधि में संस्था का टर्नओवर 41,244 करोड़ रुपये रहा और 2,823 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया गया। इसी दौरान 9.31 लाख टन उर्वरक का उत्पादन किया गया और 11.38 लाख टन की बिक्री हुई। इसके साथ ही इफ्को ने 45.6 मिलियन बोतल नैनो यूरिया का निर्माण किया, जिनमें से 36.5 मिलियन बोतलें किसानों तक पहुंचाई गईं। यह आंकड़े बताते हैं कि संस्था लगातार उत्पादन बढ़ाने और नई तकनीक अपनाने पर काम कर रही है।

किसानों के लिए संभावित लाभ

विदेशों में नए उर्वरक प्लांट और क्षमता विस्तार से भारत को कच्चा माल समय पर और अपेक्षाकृत कम लागत पर मिल सकेगा। इससे डीएपी और अन्य उर्वरकों की कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी। किसानों को सही समय पर खाद उपलब्ध होगी, जिससे फसलों की पैदावार बेहतर होगी। आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ने से खेती की योजना बनाना भी आसान होगा।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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