महाकाल मंदिर उज्जैन : यहां स्थित है विश्व का एकमात्र दक्षिणमुखी शिवलिंग, कभी होती थी ताजी चिता की भस्म से आरती

• लोकेश वर्मा, मलकापुर
देश भर के बारह ज्योतिर्लिंगों (twelve jyotirlingas) में ‘महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग’ (Mahakaleshwar Jyotirlinga) का अपना एक अलग महत्व है। महाकाल मंदिर (Mahakal Temple) दक्षिणमुखी होने से भी इस मंदिर का महत्व और बढ़ जाता है। महाकाल मंदिर विश्व का एक मात्र ऐसा शिव मंदिर है जहां दक्षिणमुखी शिवलिंग (Dakshin Mukhi Shivling) प्रतिष्ठापित है। यह स्वयंभू शिवलिंग है, जो बहुत जाग्रत है। इसी कारण केवल यहां तड़के भस्म आरती (Bhasma Aarti) करने का विधान है। यह प्रचलित मान्यता थी कि श्मशान की ताजा चिता की भस्म से भस्म आरती की जाती थी। पर वर्तमान में गाय के गोबर से बनाए गए कंडों की भस्म से भस्म आरती की जाती है।
प्रकृति के श्रृंगार का पर्व सावन हरियाली और खुशहाली लेकर आ गया है। भारतीय संस्कृति की धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन मास में किए जाने वाले देवदर्शन, भजन, पूजन, जप, तप, व्रत आदि का विशेष महत्व है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो सावन माह जल, जंगल, जमीन, जीव, जन्तु के लिए भी लाभदायक होता है। इस माह में नदी-नाले, कुएं-तालाब जल से भर जाते हैं।
पहाड़ी इलाकों में पानी झरने के रूप में बह निकलता है। सूखे पेड़, हरे हो जाते हैं। जीव जन्तुओं के लिए भी यह मौसम राहत और आनंद से भरा होता है। सावन में हर तरफ शीतल, मंद पवन के झोंके मन को मस्ती का अहसास करवाते हैं। ऐसा लगता है कि हर कोई प्रकृति से जुड़ जाना चाहता है। शायद यही कारण है कि सावन मास में धार्मिक एवं पर्यटन सम्बन्धी गतिविधियां बढ़ जाती हैं।

विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में श्रावण मास में रात 3 बजे मंदिर के पट खुलते हैं तथा भस्म आरती होती है। उज्जैन के महाकाल मंदिर में महाकाल को अभिषेक के बाद भांग और चंदन का श्रंगार किया जाता है उसके बाद वस्त्र चढ़ाए जाते हैं। बाबा को भस्म भी चढ़ाई जाती है। भस्मीभूत होने के बाद ढोल, नगाड़े, झांज, मंजीरे और शंखनाद के साथ बाबा की भस्म आरती की जाती है।
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सुबह 5 बजे से आम दर्शन का सिलसिला शुरू होता है। श्रावण-भादौ मास में प्रत्येक रविवार को रात 2.30 बजे तथा शेष दिनों में रात 3 बजे भस्म आरती होगी। भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए भक्तों को विशेष अनुमति लेनी पड़ेगी। अब से 22 अगस्त तक गर्भगृह में दर्शनार्थियों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। भक्तों को गणेश मंडपम् से भगवान महाकाल के दर्शन होंगे।
श्रावण-भादौ मास में महाकाल की सवारी कब-कब
सावन की रिमझिम फुहारों के बीच डमरूओं की गूंज के साथ 6 बार चांदी की पालकी में विराजमान होकर भगवान महाकाल भक्तों को दर्शन देने नगर भ्रमण पर निकलेंगे। उनकी सवारी निम्न तारीखों में निकलेगी-
• 18 जुलाई श्रावण मास की पहली सवारी
• 25 जुलाई श्रावण मास की दूसरी सवारी
• 01 अगस्त श्रावण मास की तीसरी सवारी
• 08 अगस्त श्रावण मास की चौथी सवारी
• 15 अगस्त भादौ मास की पहली सवारी
• 22 अगस्त श्रावण-भादौ मास की शाही सवारी

बाबा महाकाल की दर्शन व्यवस्था
दो वर्ष तक कोरोनाकाल के चलते मंदिर में प्रवेश निषिद्ध रहा या कुछ घण्टों तक भक्तों को कोविड प्रोटोकाल के साथ दर्शन करवाए गए। लेकिन, अब भक्त आसानी से भगवान महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। बाबा महाकाल के दर्शन करने आने वाले भक्त चारधाम से हरसिद्धि मंदिर के चौड़े मार्ग पर बने मुख्य प्रवेश मार्ग से शंखद्वार तक, शंखद्वार से प्रवेश कर, चिकित्सा कक्ष के समीप से कार्तिकेय मंडप पंहुचकर दर्शन लाभ ले सकेंगे। वहीं शीघ्र दर्शन के लिए दर्शनार्थी चारधाम के समीप हरसिद्धि मार्ग पर बड़ा गणेश के सामने से शंख द्वार, शंखद्वार से पृथक मार्ग से टनल वन होते हुए सीधे कार्तिक मंडप पहुंचकर भगवान महाकाल के दर्शन कर सकेंगे।
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राणोजी शिन्दे ने बनवाया था मंदिर
उज्जैन का शिवलिंग बारह ज्योतिर्लिंगों में से तीसरे नंबर का है। आज जो महाकालेश्वर का विश्व-प्रसिद्ध मन्दिर की ईमारत विद्यमान है, वह राणोजी शिन्दे शासन की देन है। यह तीन खण्डों में विभक्त है। निचले खण्ड में महाकालेश्वर (Mahakaleshwar), बीच के खण्ड में ओंकारेश्वर (Omkareshwar) तथा सर्वोच्च खण्ड में नागचन्द्रेश्वर (nagchandreshwar) के शिवलिंग प्रतिष्ठ हैं। शिखर के तीसरे तल पर भगवान शंकर-पार्वती नाग के आसन और उनके फनों की छाया में बैठी हुई सुन्दर और दुर्लभ प्रतिमा है। इसके दर्शन वर्ष में एक बार श्रावण शुक्ल पंचमी- नागपंचमी (nagpanchami) के दिन होते हैं।
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