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Kanha Tiger Reserve: कान्हा टाइगर रिजर्व में लौटा वन्यजीवों का वैभव: 100 साल बाद सूपखार परिक्षेत्र में छोड़े गए जंगली भैंसे

Kanha Tiger Reserve: Wildlife splendor returns to Kanha Tiger Reserve; wild buffaloes released in the Supkhar range after 100 years.

Kanha Tiger Reserve: कान्हा टाइगर रिजर्व में लौटा वन्यजीवों का वैभव: 100 साल बाद सूपखार परिक्षेत्र में छोड़े गए जंगली भैंसे
Kanha Tiger Reserve: कान्हा टाइगर रिजर्व में लौटा वन्यजीवों का वैभव: 100 साल बाद सूपखार परिक्षेत्र में छोड़े गए जंगली भैंसे

Kanha Tiger Reserve: मध्य प्रदेश के वनों से एक सदी पहले पूरी तरह विलुप्त हो चुके जंगली भैंसों को उनके प्राकृतिक पर्यावरण में फिर से बसाने की दिशा में रविवार को एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव ने कान्हा टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले सूपखार परिक्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने आवश्यक स्वास्थ्य और सुरक्षात्मक क्वारंटाइन अवधि सफलतापूर्वक पूरी कर चुके कुल आठ जंगली भैंसों को एक छोटे बाड़े से निकालकर सत्रह हेक्टेयर क्षेत्रफल में विशेष रूप से तैयार किए गए बड़े बाड़े में सुरक्षित रूप से विमुक्त किया। इस महत्वाकांक्षी पहल का मुख्य उद्देश्य इन वन्यजीवों को स्थानीय आबोहवा के पूरी तरह अनुकूल बनाना है ताकि वे भविष्य में अपने प्राकृतिक आवास में स्वतंत्र रूप से रह सकें।

असम से लंबी दूरी तय कर पहुंचे वन्यजीव

इस अवसर पर अपने विचार साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के वन्यजीव इतिहास में आज का दिन अत्यंत गौरवशाली है क्योंकि लगभग सौ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कान्हा के जंगलों में जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना का दूसरा चरण आरंभ हो चुका है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सक्रिय सहयोग से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लगभग बाईस सौ किलोमीटर की लंबी और कठिन दूरी तय कराकर इन आठ जंगली भैंसों को सुरक्षित रूप से मध्य प्रदेश लाया गया है। मानसून का मौसम पूरी तरह समाप्त होने के बाद इन्हें पूरी तरह से खुले प्राकृतिक आवास में बसाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

Kanha Tiger Reserve: कान्हा टाइगर रिजर्व में लौटा वन्यजीवों का वैभव: 100 साल बाद सूपखार परिक्षेत्र में छोड़े गए जंगली भैंसे
Kanha Tiger Reserve: कान्हा टाइगर रिजर्व में लौटा वन्यजीवों का वैभव: 100 साल बाद सूपखार परिक्षेत्र में छोड़े गए जंगली भैंसे

दो चरणों में पूरी हुई सुरक्षित लाने की प्रक्रिया

इस विशेष पुनर्स्थापना परियोजना के तहत असम के प्रसिद्ध काजीरंगा पार्क से दो अलग-अलग चरणों में कुल आठ जंगली भैंसों को सूपखार परिक्षेत्र में लाया गया था। प्रथम चरण के अंतर्गत इसी वर्ष अट्ठाइस अप्रैल को तीन मादा और एक नर जंगली भैंसे को एक हेक्टेयर के विशेष बाड़े में रखा गया था। इसके बाद नौ मई को तीन मादा और एक नर जंगली भैंसे को उसी बाड़े में पहुंचाया गया। कुल छह मादा और दो नर वन्यजीवों को शुरुआत में छोटे बाड़े में रखकर उनकी विशेष देखरेख की गई ताकि वे यहां के नए परिवेश और जलवायु के अनुकूल खुद को ढाल सकें। निर्धारित क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद रविवार ग्यारह तारीख को इन्हें सत्रह हेक्टेयर के विस्तीर्ण बाड़े में स्थानांतरित कर दिया गया।

Kanha Tiger Reserve: कान्हा टाइगर रिजर्व में लौटा वन्यजीवों का वैभव: 100 साल बाद सूपखार परिक्षेत्र में छोड़े गए जंगली भैंसे
Kanha Tiger Reserve: कान्हा टाइगर रिजर्व में लौटा वन्यजीवों का वैभव: 100 साल बाद सूपखार परिक्षेत्र में छोड़े गए जंगली भैंसे

तीन वर्षों में पचास जंगली भैंसों को बसाने का लक्ष्य

मध्य प्रदेश के जंगलों से जंगली भैंसे लगभग एक सौ साल पहले विलुप्त हो गए थे, लेकिन वन विभाग ने इस प्रजाति को पुनर्जीवित करने के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार की है। सूपखार क्षेत्र में प्राचीन काल में इन जीवों की मौजूदगी के पुख्ता प्रमाण मिलने के आधार पर ही इस परियोजना को धरातल पर उतारा जा रहा है। इस पूरी योजना के तहत आगामी तीन वर्षों के भीतर कुल पचास जंगली भैंसों को सुरक्षित रूप से पुनः स्थापित करने का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह अनूठी पहल राज्य में जैव-विविधता के संरक्षण, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों को और अधिक मजबूत बनाने तथा विलुप्त होने की कगार पर पहुंची प्रजातियों को बचाने में मील का पत्थर साबित होगी।

पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में प्रयास

राज्य सरकार विलुप्तप्राय वन्यजीवों को उनके मूल परिवेश में स्थापित कर पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। हाल ही में नौरादेही में रानी दुर्गावती के नाम पर नए अभयारण्य का निर्माण कर चीतों के लिए एक और सुरक्षित ठिकाना विकसित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में प्रदेश के नक्सल प्रभावित अंचलों से खात्मा होने के बाद अब इन क्षेत्रों में विकास और पर्यटन की नई संभावनाएं तेजी से उभरकर सामने आ रही हैं। इस गरिमामयी कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस प्रशासनिक अमला और बड़ी संख्या में मैदानी कर्मचारी उपस्थित रहे।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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