AI Crop Monitoring MP: अब आसमान से होगी खेतों की निगरानी: ड्रोन और AI से बदलेगी खेती, किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा
सैटेलाइट, ड्रोन और एआई तकनीक से फसल की पहचान और उत्पादन का सटीक अनुमान, करोड़ों खेतों की डिजिटल मैपिंग

AI Crop Monitoring MP: मध्यप्रदेश में खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब खेतों और फसलों की स्थिति पर नजर रखने के लिए उपग्रह चित्र, ड्रोन सर्वे और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि राज्य सरकार की नई डिजिटल प्रणालियां फसल की वास्तविक स्थिति जानने और किसानों तक योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंचाने में मदद कर रही हैं। इससे खेती से जुड़े आंकड़े अधिक सटीक होंगे और किसानों को पारदर्शी तरीके से सहायता मिल सकेगी।
फसल प्रबंधन में आधुनिक तकनीक
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में कृषि व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए नई तकनीकों को अपनाया जा रहा है। इसके तहत ‘सारा’ और ‘उन्नति’ एग्री-जीआईएस प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। इन प्रणालियों के माध्यम से उपग्रह से प्राप्त चित्रों, ड्रोन सर्वेक्षण और खेतों की वास्तविक तस्वीरों का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग तकनीक से विश्लेषण किया जा रहा है। इससे फसलों की निगरानी और उत्पादन के अनुमान को वैज्ञानिक आधार मिला है।
क्रॉप मैपिंग और गिरदावरी की प्रक्रिया हुई आधुनिक
मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘उन्नति’ प्लेटफॉर्म और ‘सारा’ एप्लिकेशन के माध्यम से क्रॉप मैपिंग और फसल गिरदावरी को तकनीक से जोड़ा गया है। ‘सारा’ ऐप के जरिए खेतों की लाखों तस्वीरें एकत्र की जाती हैं और डीप लर्निंग तकनीक की मदद से उनका विश्लेषण किया जाता है। इस प्रक्रिया से यह पता लगाया जाता है कि किसी खेत में वास्तव में कौन-सी फसल बोई गई है। इससे फसलों की स्थिति का सही आकलन संभव हो रहा है।
उपग्रह चित्रों से हो रही फसल की पहचान
सरकार द्वारा स्मार्ट क्रॉप मैपिंग के लिए उपग्रह चित्रों और रैंडम फॉरेस्ट मॉडल का उपयोग किया जा रहा है। इस तकनीक से खसरा स्तर पर फसलों की पहचान की जा रही है। साथ ही अधिसूचित फसलों के लिए पटवारी हल्का स्तर पर उत्पादन का पूर्वानुमान भी तैयार किया जा रहा है। इससे कृषि योजनाओं की तैयारी, खाद्यान्न खरीद व्यवस्था और फसल बीमा की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायता मिल रही है।
फसल पहचान की सटीकता में हुआ सुधार
नई तकनीक के उपयोग से फसल पहचान और उत्पादन के अनुमान की सटीकता में भी बड़ा सुधार हुआ है। वर्ष 2022 में जहां फसल पहचान की सटीकता लगभग 66 प्रतिशत थी, वहीं वर्ष 2025 तक यह बढ़कर करीब 85 प्रतिशत तक पहुंच गई है। हाल के रबी और खरीफ मौसम में इस प्रणाली के माध्यम से 5 करोड़ 37 लाख से अधिक खेतों की तस्वीरों का विश्लेषण किया गया है। इसके जरिए फसलों की वास्तविक स्थिति की जानकारी लगभग तुरंत मिल रही है।
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डिजिटल मैपिंग से तैयार हो रहा बड़ा डाटा
इस तकनीकी प्रणाली के माध्यम से 3 करोड़ से अधिक भूमि खंडों में बोई गई फसलों का डिजिटल नक्शा तैयार किया गया है। इसके साथ ही प्रमुख फसलों की पहचान और डिजिटल फसल गिरदावरी का सत्यापन भी किया जा रहा है। वर्ष 2023 से लगभग 22 हजार पटवारी हल्का क्षेत्रों में फसल उत्पादन का आकलन किया जा रहा है, जिससे खेती से जुड़े निर्णय अधिक सटीक तरीके से लिए जा सकते हैं।
किसानों और बीमा कंपनियों को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि भू-स्थानिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग पर आधारित यह व्यवस्था किसानों के साथ-साथ सर्वेक्षण करने वाले कर्मचारियों और फसल बीमा कंपनियों के लिए भी उपयोगी साबित हो रही है। यदि प्राकृतिक आपदा या जलवायु परिवर्तन के कारण फसलों को नुकसान होता है तो इस प्रणाली की मदद से उसका आकलन जल्दी किया जा सकेगा। इससे किसानों को समय पर मुआवजा दिलाने में भी सहायता मिलेगी।
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प्रदेश की कृषि व्यवस्था हो रही पारदर्शी
मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, राजस्व विभाग और किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के संयुक्त प्रयास से यह प्रणाली तैयार की गई है। इसका उद्देश्य प्रदेश की कृषि व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना है। उन्होंने कहा कि इस पहल से खासकर छोटे और सीमांत किसानों को बेहतर कृषि प्रबंधन और आय सुरक्षा का लाभ मिलेगा।
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