Goat Farming Subsidy Scheme: 50% सरकारी मदद से करोड़ों का बकरी फार्म, छिंदवाड़ा के किसान ने बदली खेती की दिशा
Goat Farming Subsidy Scheme: राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना से एक करोड़ की लागत वाला मॉडल बकरी फार्म बना किसानों के लिए मिसाल

Goat Farming Subsidy Scheme: खेती को अब सिर्फ फसल तक सीमित मानने का दौर बदल रहा है। मध्य प्रदेश में कई किसान सरकारी योजनाओं और नई सोच के सहारे खेती को मुनाफे का मजबूत जरिया बना रहे हैं। ऐसी ही एक मिसाल छिंदवाड़ा जिले से सामने आई है, जहां एक किसान ने आधी सरकारी सहायता के दम पर एक करोड़ रुपये का बकरी फार्म खड़ा कर दिया। यह कहानी न सिर्फ पशुपालन की संभावनाओं को दिखाती है, बल्कि उन किसानों के लिए भी उम्मीद जगाती है जो सीमित संसाधनों में बेहतर आमदनी का रास्ता तलाश रहे हैं।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन से मिली नई दिशा
छिंदवाड़ा जिले के बांका नागनपुर गांव के किसान नवीन रघुवंशी ने पशुपालन विभाग की राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना का लाभ उठाकर बकरी पालन शुरू किया। शुरुआत साधारण स्तर से हुई, लेकिन योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक मदद और सही मार्गदर्शन ने इस काम को तेजी से आगे बढ़ाया। आज उनका बकरी फार्म आधुनिक सुविधाओं से लैस है और क्षेत्र में एक मॉडल फार्म के रूप में पहचाना जा रहा है।
एक करोड़ की लागत, आधी जिम्मेदारी सरकार की
नवीन रघुवंशी के बकरी फार्म पर करीब एक करोड़ रुपये की लागत आई है। इस योजना के तहत भारत सरकार ने 50 प्रतिशत यानी 50 लाख रुपये की अनुदान राशि स्वीकृत की है। पहली किस्त के रूप में 25 लाख रुपये पहले ही मिल चुके हैं, जिससे फार्म को जरूरी संसाधनों और आधुनिक ढांचे से तैयार किया गया। इस सहयोग से किसान को शुरुआती बोझ से राहत मिली और बड़े स्तर पर काम शुरू करना आसान हुआ।
मॉडल फार्म की खास व्यवस्थाएं
एनएलएम योजना के अंतर्गत विकसित इस फार्म में सिरोही नस्ल की करीब 175 बकरियां, बकरे और उनके बच्चे मौजूद हैं। फार्म को इस तरह तैयार किया गया है कि हर वर्ग की जरूरत का ध्यान रखा जा सके। बीमार बकरियों के लिए अलग क्वारंटाइन शेड बनाया गया है, जबकि बच्चों के लिए अलग कमरे तैयार किए गए हैं। बकरियों के बैठने के लिए जमीन से चार फीट ऊंचाई पर प्लाई का प्लेटफॉर्म बनाया गया है, जिससे सफाई और स्वास्थ्य दोनों बेहतर बने रहते हैं।
एक ही जगह से दोहरी आमदनी
इस प्लेटफॉर्म के नीचे कड़कनाथ मुर्गियों का पालन भी किया जा रहा है। इससे फार्म से अतिरिक्त आय का रास्ता खुला है। बकरी पालन के साथ मुर्गी पालन का यह मॉडल लागत निकालने और मुनाफा बढ़ाने में मदद कर रहा है।
पोषण और ब्रीडिंग पर खास फोकस
फार्म में बकरियों के पोषण के लिए तीन किस्म की नेपियर घास उगाई जा रही है। दाना बनाने की मशीन और चैफ कटर जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं, जिससे संतुलित आहार दिया जा सके। बेहतर नस्ल तैयार करने के लिए उच्च गुणवत्ता के बकरे रखे गए हैं, जिनमें से एक बकरे की कीमत करीब दो लाख रुपये बताई जा रही है। अच्छे पोषण और प्रबंधन का असर बकरियों के स्वास्थ्य और उत्पादन पर साफ नजर आ रहा है।
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प्राकृतिक खेती से घटाई लागत
नवीन रघुवंशी बकरी पालन के साथ-साथ प्राकृतिक खेती भी कर रहे हैं। इससे रासायनिक खाद और अन्य खर्चों में कमी आई है। पर्यावरण के लिहाज से यह तरीका बेहतर माना जा रहा है। उनकी इस पहल को देखने जिले के कृषि विभाग के अधिकारी भी फार्म पर पहुंचे और व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
डिजिटल माध्यम से साझा कर रहे अनुभव
नवीन रघुवंशी के बेटे मंथन रघुवंशी बकरी पालन और उन्नत खेती को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहचान दिला रहे हैं। वे यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर बकरी पालन, उन्नत कृषि, मक्का उत्पादन और कम उम्र में पशुओं का वजन बढ़ाने जैसे विषयों पर जानकारी साझा करते हैं। इससे दूसरे किसान भी इस मॉडल से सीख ले पा रहे हैं।
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अधिकारियों ने किया निरीक्षण
हाल ही में पशुपालन, कृषि और उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने भी इस बकरी फार्म का निरीक्षण किया। सभी ने फार्म की व्यवस्थाओं और किसान द्वारा अपनाए गए तरीकों की सराहना की। यह उदाहरण दिखाता है कि सही योजना, मेहनत और तकनीक के साथ पशुपालन भी किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकता है।
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