Sugarcane Dry Leaves Collection: खेतों से समेटी जा रहीं गन्ने की सूखी पत्तियां, जैविक खाद और मिट्टी की सेहत पर मंडराया खतरा

Sugarcane Dry Leaves Collection: सरकार जहां किसानों को फसल अवशेष जलाने से रोककर मिट्टी की सेहत सुधारने और जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है, वहीं बैतूल जिले में इसके ठीक उलट तस्वीर सामने आ रही है। यहां किसानों के खेतों से गन्ने की सूखी पत्तियां बड़े पैमाने पर बटोरी जा रही हैं, जिससे न केवल जमीन की उर्वर शक्ति प्रभावित हो रही है, बल्कि पर्यावरण संतुलन पर भी खतरा मंडराने लगा है। इस पूरे मामले में जिम्मेदार विभागों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

खेतों से गायब हो रहीं सूखी पत्तियां

बैतूल जिले के गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में इन दिनों एक निजी कंपनी द्वारा किसानों के खेतों से गन्ने की सूखी पत्तियां इकट्ठा करने का काम किया जा रहा है। किसानों को यह कहकर राजी किया जा रहा है कि उनके खेत मुफ्त में साफ कर दिए जाएंगे। इसी लालच में बड़ी मात्रा में सूखी पत्तियां खेतों से बाहर ले जाई जा रही हैं। नतीजतन खेतों में वह अवशेष नहीं बच पा रहे, जिन्हें मिट्टी में मिलाकर जैविक खाद बनाई जा सकती थी।

किसानों का कहना है कि पहले यही सूखी पत्तियां खेत में बिखेर दी जाती थीं या मल्चर मशीन से बारीक कर मिट्टी में मिला दी जाती थीं। कुछ समय बाद यही अवशेष सड़कर खाद में बदल जाते थे, जिससे फसल को पोषण मिलता था और रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होती थी। अब पत्तियां हट जाने से यह पूरी प्रक्रिया ही रुक गई है।

कृषि विभाग जानकर भी है खामोश

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चिंताजनक बात यह बताई जा रही है कि कृषि विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। किसानों और जागरूक ग्रामीणों का कहना है कि खुलेआम खेतों से फसल अवशेष उठाए जा रहे हैं, फिर भी संबंधित अमला आंख मूंदे बैठा है। इससे सरकार की नरवाई प्रबंधन और जैविक खेती को लेकर बनाई गई नीतियों पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहा है।

गांवों में आग का खतरा बढ़ा

कंपनी द्वारा इकट्ठा की गई सूखी पत्तियों के बंडल अलग-अलग स्थानों पर जमा कर दिए गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार ये बंडल आग लगने की दृष्टि से बेहद खतरनाक हैं। हाल ही में मुलताई तहसील के ग्राम साईंखेड़ा में राहुल साहू के खेत में तथा गोलू माकोड़े के घर के पास रखे गन्ने की सूखी पत्तियों के बंडलों में आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि आसपास के घरों और खेतों को नुकसान पहुंचने की आशंका बन गई थी।

घटना की सूचना देने के बावजूद संबंधित कंपनी का कोई प्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुंचा। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है। उन्होंने प्रशासन को आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराई और भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका जताई है। ग्रामीणों की मांग है कि यदि कोई कंपनी गांव या निजी जमीन पर ज्वलनशील कचरा रखती है तो उसकी सुरक्षा, निगरानी और नियमित निरीक्षण की जिम्मेदारी पूरी तरह उसी की होनी चाहिए।

शुगर मिलों के प्रयासों से मिली थी राहत

जिले में शुगर मिल प्रबंधन द्वारा पिछले कुछ वर्षों में गन्ने की सूखी पत्तियों के प्रबंधन के लिए सकारात्मक पहल की गई थी। शुगर मिलों की ओर से अनुदान पर मल्चिंग मशीनें उपलब्ध कराई गईं, जिससे किसानों और युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिले। इसके साथ ही खेतों में आग न लगाने और मल्चिंग कराने पर किराए में लगभग 50 प्रतिशत तक की छूट दी गई।

इन प्रयासों का असर यह हुआ कि करीब पांच साल से जिले के गन्ना उत्पादक किसान कटाई के बाद खेतों में आग लगाने के बजाय अवशेषों को मल्चिंग कर मिट्टी में मिला रहे थे। इससे मिट्टी की नमी बनी रहती थी, जैविक कार्बन बढ़ता था और पर्यावरण संतुलन भी बेहतर हुआ था।

जमीन और पर्यावरण पर पड़ेगा असर

जागरूक किसानों का मानना है कि निजी कंपनियों द्वारा गन्ने की सूखी पत्तियों का इस तरह संग्रह किया जाना किसानों के दीर्घकालीन हितों के खिलाफ है। इससे मिट्टी की उर्वरता घटेगी, जैविक कार्बन स्तर कम होगा और जल संरक्षण पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यही नहीं, सरकार द्वारा सतत कृषि और पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों को भी नुकसान पहुंचेगा।

एक हेक्टेयर से मिलती है पांच टन खाद

जिले में जैविक खेती करने वाले किसानों के अनुसार एक हेक्टेयर गन्ने के खेत से करीब 7.5 से 10 टन तक सूखी पत्तियां निकलती हैं। यदि इन्हें मल्चिंग कर मिट्टी में मिला दिया जाए तो लगभग पांच टन जैविक खाद तैयार हो जाती है। इससे फसल को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं और उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है।

प्रशासन से कार्रवाई की उठी मांग

जिले की शुगर मिलों और किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जाए। बिना वैधानिक अनुमति फसल अवशेषों के संग्रह पर तत्काल रोक लगे और ऐसी गतिविधियों में शामिल कंपनियों व एजेंसियों के खिलाफ आवश्यक प्रशासनिक आदेश जारी किए जाएं, ताकि किसानों की जमीन और पर्यावरण दोनों को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।

सोशल मीडिया पर बैतूल अपडेट की खबरें पाने के लिए फॉलो करें-

देश-दुनिया की ताजा खबरें (Hindi News Madhyapradesh) अब हिंदी में पढ़ें| Trending खबरों के लिए जुड़े रहे   betulupdate.com से| आज की ताजा खबरों (Latest Hindi News) के लिए सर्च करें betulupdate.com

Leave a Comment