Illegal Colonies in MP: एमपी की इन अवैध कॉलोनियों पर चलेगा बुलडोजर, जमींदोज किए जाएंगे मकान, प्रशासन का सख्त रुख

Illegal Colonies in MP: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में बढ़ती आबादी के साथ मकानों की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसी जरूरत का फायदा उठाकर कुछ लोग नियमों को ताक पर रखकर अवैध कॉलोनियों का जाल बिछा रहे हैं। जिला प्रशासन और जिला पंचायत की संयुक्त कार्रवाई में अब इस अवैध कारोबार की परतें खुल रही हैं। सर्वे में सामने आया है कि हुजूर क्षेत्र अवैध कॉलोनियों के मामले में सबसे आगे निकल चुका है, जहां बिना अनुमति सैकड़ों निर्माण खड़े कर दिए गए हैं।

शहर नहीं ग्रामीण इलाकों में भी अवैध निर्माण

शहरी क्षेत्र में लंबे समय से नरेला अवैध कॉलोनियों के लिए बदनाम रहा है, लेकिन ताजा सर्वे रिपोर्ट में हुजूर क्षेत्र ने इसे भी पीछे छोड़ दिया है। जिला प्रशासन और जिला पंचायत की संयुक्त जांच में हुजूर इलाके में सवा सौ से अधिक ऐसी कॉलोनियां चिन्हित की गई हैं, जहां किसी तरह की वैधानिक अनुमति के बिना प्लॉटिंग और निर्माण किया गया। इनमें से कई कॉलोनियां ग्रामीण सीमा में विकसित की गईं, ताकि नियमों से बचा जा सके।

संयुक्त सर्वे में हुआ यह खुलासा

प्रशासन की ओर से कराए गए सर्वे में यह साफ हुआ कि इन कॉलोनियों के लिए न तो कॉलोनाइजर लाइसेंस लिया गया और न ही रेरा की अनुमति मौजूद थी। इसके बावजूद लोगों को प्लॉट बेच दिए गए और निर्माण भी शुरू कर दिया गया। रिपोर्ट सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने इन कॉलोनियों में निवेश न करने की अपील आम लोगों से की है।

निवेश करने वालों को मिलेगी सुनवाई

प्रशासन का कहना है कि जिन लोगों ने पहले ही इन अवैध कॉलोनियों में पैसा लगा दिया है, उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। इसके बाद नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अवैध तरीके से की गई प्लॉटिंग और निर्माण पर मप्र सरकार के निर्देशों के तहत सख्त कदम उठाए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर बुलडोजर कार्रवाई भी की जाएगी।

35 करोड़ से ज्यादा की जमीन से हटाया अतिक्रमण

हुजूर तहसील के एसडीएम विनोद सोनकिया के अनुसार, तहसील क्षेत्र के बिलखिरिया, नीलबड़, सेमरी वाज्याफ्त, रोलूखेड़ी, छापरी गांव, मुगालिया छाप और कानासैंया जैसे इलाकों में बड़े पैमाने पर बिना अनुमति प्लॉटिंग की जा रही थी। कलेक्टर के निर्देश पर बीते कुछ महीनों में लगभग 25 एकड़ जमीन से अतिक्रमण हटाया गया है, जिसकी कीमत करीब 35 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।

रेरा और लाइसेंस के बिना चल रहा था कारोबार

कार्रवाई के दौरान यह भी सामने आया कि इन कॉलोनियों के पास न तो रेरा की मंजूरी थी और न ही कॉलोनाइजर लाइसेंस। ऐसे लोगों के खिलाफ अलग से कार्रवाई की गई है, ताकि भविष्य में इस तरह के अवैध निर्माण पर रोक लगाई जा सके।

इन इलाकों में सबसे ज्यादा अवैध कॉलोनियां

नगरीय सीमा से सटे क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों का फैलाव ज्यादा देखा गया है। इनमें सेवनिया ओंकारा, कोटरा, पिपलिया बेरखेड़ी, कुराना, थुआखेड़ा, कालापानी, सुरैया नगर, छावनी पठार, कानासैया, खंडाबर, सिकंदराबाद, शोभापुर, कोलुआ खुर्द, अरेड़ी, नरेला वाज्याफ्त, इब्राहिमपुरा, जगदीशपुर, कलखेड़ा, हज्जामपुरा, अचारपुरा, बसई, परेवाखेड़ा, ईंटखेड़ी सड़क, अरवलिया, मुबारकपुर, बीनापुर, गोलखेड़ी और चौपड़ा कलां जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

लगातार हो रही है मॉनीटरिंग

कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि सभी एसडीएम द्वारा अवैध कॉलोनियों को लेकर की गई कार्रवाइयों की लगातार निगरानी की जा रही है। जिन कॉलोनियों की सूची तैयार हो चुकी है, उन पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का साफ संदेश है कि नियमों को तोड़कर किए गए किसी भी निर्माण को बख्शा नहीं जाएगा।

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