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Broken Mirror Vastu: घर में रखा टूटा शीशा बढ़ा सकता है परेशानी, आर्थिक नुकसान के साथ रिश्तों पर भी डालता है असर

Broken Mirror Vastu: घर को हम सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि अपनी ऊर्जा और भावनाओं का केंद्र मानते हैं। इसी वजह से वास्तु शास्त्र में घर से जुड़ी हर छोटी-बड़ी चीज को खास महत्व दिया गया है। कई बार अनजाने में हम ऐसी चीजों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो धीरे-धीरे घर के माहौल को प्रभावित करने लगती हैं। टूटा या दरार वाला शीशा भी ऐसी ही एक चीज है, जिसे अक्सर लोग कोने में रख छोड़ते हैं। वास्तु मान्यताओं के अनुसार यह आदत घर की शांति, रिश्तों और आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक असर डाल सकती है।

वास्तु शास्त्र में शीशे का यह है महत्व

वास्तु शास्त्र के अनुसार शीशा केवल देखने की वस्तु नहीं होता, बल्कि यह व्यक्ति की छवि और उसकी ऊर्जा को दर्शाता है। शीशे में दिखाई देने वाला प्रतिबिंब व्यक्ति के आत्मविश्वास और मानसिक स्थिति से जुड़ा माना जाता है। जब शीशा सही अवस्था में होता है, तो वह सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रखने में मदद करता है। वहीं, टूटा या खराब शीशा इस ऊर्जा के संतुलन को बिगाड़ देता है।

नकारात्मक ऊर्जा का केंद्र बनता है टूटा शीशा

वास्तु मान्यताओं के अनुसार जब शीशा टूट जाता है, तो वह अपनी सकारात्मक शक्ति खो देता है। ऐसा शीशा घर में नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने लगता है। माना जाता है कि टूटा हुआ कांच आसपास की अच्छी ऊर्जा को सोख लेता है और उसकी जगह तनाव और बेचैनी फैलाता है। इसका असर धीरे-धीरे पूरे घर के वातावरण में महसूस होने लगता है।

परिवार के रिश्तों पर पड़ता है असर

टूटे हुए शीशे से निकलने वाली नकारात्मक तरंगें घर में रहने वाले लोगों के व्यवहार को प्रभावित करती हैं। कई बार बिना किसी ठोस वजह के परिवार के सदस्यों के बीच तकरार बढ़ने लगती है। छोटी-छोटी बातों पर बहस होना, एक-दूसरे को समझ न पाना और मनमुटाव बढ़ना इसी का संकेत माना जाता है। घर का शांत और सकारात्मक माहौल धीरे-धीरे तनावपूर्ण बन सकता है।

मानसिक तनाव और बेचैनी बढ़ने की आशंका

वास्तु शास्त्र के अनुसार टूटा शीशा व्यक्ति के मन पर भी असर डालता है। ऐसे घर में रहने वाले लोगों को अनावश्यक चिंता, चिड़चिड़ापन और बेचैनी महसूस हो सकती है। कई बार नींद न आना या मन का अशांत रहना भी इससे जोड़ा जाता है। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो व्यक्ति की दिनचर्या और कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।

आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव

वास्तु मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि टूटे हुए शीशे का असर धन और करियर पर पड़ता है। ऐसे घर में पैसे की आवक तो होती है, लेकिन वह टिक नहीं पाता। अचानक खर्चे बढ़ जाते हैं और बचत करना मुश्किल हो जाता है। कई बार मेहनत के बावजूद अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता, या बनते हुए काम आखिरी समय पर अटक जाते हैं। इसे तरक्की के रास्ते में बाधा का संकेत माना जाता है।

करियर और कामकाज में रुकावट

यदि कोई व्यक्ति लगातार प्रयास कर रहा हो लेकिन सफलता उससे दूर ही रहे, तो वास्तु के अनुसार घर में मौजूद टूटे शीशे की जांच करनी चाहिए। माना जाता है कि ऐसा कांच व्यक्ति की प्रगति को रोकता है और निर्णय लेने की क्षमता को कमजोर करता है। इससे आत्मविश्वास में कमी भी महसूस हो सकती है।

शीशा टूट जाए तो क्या करें

वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार जैसे ही घर में कोई शीशा या कांच टूटे, उसे तुरंत हटा देना चाहिए। टूटे शीशे को जोड़कर दोबारा इस्तेमाल करना अशुभ माना गया है। इसके अलावा जिस शीशे की चमक खत्म हो गई हो, पॉलिश उतर गई हो या जिसमें साफ प्रतिबिंब न दिखता हो, उसे भी घर में रखने से बचना चाहिए। ऐसे शीशे को सम्मानपूर्वक घर से बाहर निकाल देना बेहतर माना जाता है।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और वास्तु शास्त्र से जुड़ी धारणाओं पर आधारित है। इसमें बताए गए विचारों का उद्देश्य केवल सूचना देना है। यह किसी भी तरह का वैज्ञानिक या अंतिम सत्य होने का दावा नहीं करता। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी निर्णय से पहले अपने विवेक का उपयोग करें। अंधविश्वास को बढ़ावा देना इस लेख का उद्देश्य नहीं है।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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