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सारिका की सलाह- विवाह पूर्व जन्म कुंडली मिलाने से ज्यादा जरूरी है सिकल सेल कुंडली का मिलान, यह होंगे इससे भविष्य में लाभ : गीतों से करेंगी जागरूक

• उत्तम मालवीय, बैतूल
आमतौर पर हिंदू परिवारों में विवाह पूर्व जन्म कुंडली मिलान पर विश्वास किया जाता है। लेकिन, अब नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू मध्यप्रदेश के जनजातीय टोलों में जाकर विवाह पूर्व सिकल सेल (sickle cell) वैज्ञानिक कुंडली मिलाना सिखाने जा रही है। वह भी बिना दक्षिणा के और अपने स्वयं के खर्चे पर।

इन्हीं प्रयासों के पहले चरण में सारिका ने 7 गीतों का वीडियो एल्बम तैयार किया है। इस एल्बम एवं जागरूकता गतिविधियों का जानकारी सारिका ने आल इंडिया इंस्टीटयूट ऑफ मेडिकल साइंसेस एम्स नई दिल्ली के डायरेक्टर पद्मश्री प्रोफेसर रणदीप गुलेरिया को भेंट की।

एमीनेंट मेडिकल पर्सन का बीसी रॉय नेशनल अवार्ड प्राप्त डॉ. रणदीप गुलेरिया ने सारिका के गीतों के अवलोकन के बाद कहा कि ये वीडियो गीत आम लोगों में सिकल सेल के कारण, लक्षण एवं बचाव के उपायों को सरल तरीके से पहुंचा सकेंगे। वीडियो में सुने और देखें सारिका की सलाह…👇

सारिका ने कहा कि यह किसी वायरस, मच्छर या गंदगी से होने वाली संक्रामक बीमारी नहीं है। यह सिर्फ बीमार माता-पिता से बच्चों में अनुवांशिक रूप से जाती है। विवाह एवं बच्चे जन्म के पहले जागरूकता के द्वारा इस बीमारी की रोकथाम 100 प्रतिशत की जा सकती है।

सारिका ने बताया कि आदिवासी बहुल जिलों में फैले इस जन्मजात रोग के फैलाव को कम करने के लिये किये जा रहे बड़े प्रयासों के साथ अपना एक स्वैच्छिक योगदान दे रही हैं। वे 1 जून से मध्यप्रदेश के 22 प्रभावित जिलों में अपने खर्च पर जाकर जागरूकता का कार्य करेंगी। ये वीडियो एल्बम भी उन्होंने अपने खर्च पर तैयार किया है।

सारिका ने बताया कि सिकल सेल रोगी दो प्रकार के होते हैं-एक रोगी और दूसरा वाहक। यदि माता-पिता दोनों सिकल सेल रोगी हैं तो उनके सभी बच्चे भी सिकल सेल रोगी होंगे। अगर माता-पिता में से एक रोगी और दूसरा सामान्य है तो बच्चे रोग वाहक होंगे। अतः सिकल सेल रोगी या वाहक किसी सामान्य पार्टनर से विवाह करेगा तो इस रोग का फैलाव रोका जा सकता है।

क्या हैं इस रोग के लक्षण

सारिका ने बताया कि इस जन्मजात बीमारी में रेड ब्लड सेल कठोर और चिपचिपी हो जाती है। और उनका आकार गोल न होकर हंसिया या सिकल की तरह हो जाता हैे। ये जल्दी नष्ट हो जाती है। कई बार धमनियों में जम कर रक्त प्रवाह में रूकावट करती है जो कि दर्द के साथ जानलेवा भी हो जाता है। बीमारी का पता जन्म के एक साल के अंदर ही लग जाता है। संक्रमण, सीने में दर्द, जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण दिखने लगते हैं।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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