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PM FME Scheme Success Story: पीएम एफएमई योजना से आई जीवन में खुशहाली, गुड़ उद्योग से जमकर हो रही कमाई

PM FME Scheme Success Story: सरकारी योजनाएं यदि सही हाथों तक पहुंच जाएं तो वे सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि लोगों की जिंदगी की दिशा बदल देती हैं। बैतूल जिले के मलकापुर गांव में रहने वाले विजय हजारे इसका जीवंत उदाहरण हैं। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के सहयोग से उन्होंने गुड़ उत्पादन का उद्योग खड़ा किया, जिससे न केवल उनकी आमदनी बढ़ी बल्कि गांव के अन्य लोगों को भी रोजगार का सहारा मिला।

पीएम एफएमई योजना से मिली नई राह

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे खाद्य उद्योगों को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत उद्यम शुरू करने के लिए ऋण, तकनीकी मार्गदर्शन और अनुदान की सुविधा दी जाती है। इसी योजना का लाभ उठाकर ग्राम मलकापुर निवासी विजय हजारे ने गुड़ उत्पादन से जुड़ा व्यवसाय शुरू किया और अपने सपने को साकार किया।

30 लाख के ऋण से शुरू हुआ उद्योग

विजय हजारे को उद्यानिकी विभाग के माध्यम से कुल 30 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। इस राशि में 35 प्रतिशत अनुदान भी शामिल रहा, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत आधार मिला। इस सहायता से उन्होंने मां लक्ष्मी खाण्डसारी इंडस्ट्रीज के नाम से अपनी उत्पादन इकाई स्थापित की। उद्योग की शुरुआत के साथ ही आधुनिक मशीनें लगाई गईं और पारंपरिक अनुभव को तकनीक से जोड़ा गया।

PM FME Scheme Success Story: पीएम एफएमई योजना से आई जीवन में खुशहाली, गुड़ उद्योग से जमकर हो रही कमाई

गुड़ के साथ अन्य उत्पादों का निर्माण

मां लक्ष्मी खाण्डसारी इंडस्ट्रीज में केवल साधारण गुड़ ही नहीं, बल्कि कैंडी और बर्फी जैसे उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं। सभी उत्पाद शुद्धता और गुणवत्ता को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं। विजय हजारे ने बताया कि उपभोक्ताओं की जरूरत को देखते हुए गुड़ को अलग-अलग पैकिंग में बाजार में उतारा जाता है। एक किलो, आधा किलो और एक पाव के पैकेट तैयार कर जिले के ग्रामीण इलाकों में बिक्री की जा रही है।

आय में हुआ उल्लेखनीय इजाफा

उद्योग शुरू होने के बाद विजय हजारे की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की वजह से उनके गुड़ की मांग लगातार बढ़ रही है। इससे उनकी मासिक और वार्षिक आय में पहले की तुलना में काफी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने बताया कि पहले जहां आमदनी सीमित थी, वहीं अब नियमित और स्थिर आय का स्रोत बन गया है।

स्थानीय युवाओं को मिला रोजगार

मां लक्ष्मी खाण्डसारी इंडस्ट्रीज केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि गांव के लिए रोजगार का साधन भी बन गई है। इस इकाई के माध्यम से लगभग 10 स्थानीय युवाओं को काम मिला है। इससे न सिर्फ उन परिवारों की आय बढ़ी है, बल्कि गांव में ही रोजगार उपलब्ध होने से पलायन पर भी रोक लगी है।

गांव से शहर तक गुड़ की मांग

विजय हजारे का कहना है कि गुड़ एक पारंपरिक और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी उत्पाद है। आज भी इसकी मांग गांवों से लेकर शहरों तक बनी रहती है। यदि गुणवत्ता का ध्यान रखा जाए और पैकेजिंग आकर्षक हो, तो बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलती है। यही वजह है कि उनका उत्पाद धीरे-धीरे अपनी पहचान बना रहा है।

नौकरी की तलाश तक सीमित न रहे युवा

विजय हजारे मानते हैं कि आज के युवाओं को केवल नौकरी की तलाश तक सीमित नहीं रहना चाहिए। सरकार की योजनाएं स्वरोजगार के लिए बेहतरीन अवसर दे रही हैं। पीएम एफएमई योजना के तहत मिलने वाला ऋण और अनुदान उद्योग शुरू करने की राह आसान बनाता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे गुड़ उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी या अन्य छोटे उद्योगों की ओर कदम बढ़ाएं।

सरकार के प्रति जताया आभार

अपने अनुभव साझा करते हुए विजय हजारे ने कहा कि यह सफलता सरकारी सहयोग के बिना संभव नहीं थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार जताया, जिनकी नीतियों और योजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल रहा है। विजय हजारे की कहानी यह साबित करती है कि सही योजना और मेहनत के साथ गांव में रहकर भी सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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