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Astro Tourism : भारत में इस जगह शुरू होगा पहला नाइट स्काई अभ्यारण्य, खगोल पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

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Astro Tourism : भारत में इस जगह शुरू होगा पहला नाइट स्काई अभ्यारण्य, खगोल पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
Image Source: Jagran

Astro Tourism, India’s First Night Sky Sanctuary In Ladakh : लद्दाख में शीघ्र ही दक्षिण पूर्व एशिया का पहला नाइट स्काई अभयारण्य शुरू होगा। इस अभयारण्य की स्थापना भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान बेंगलुरु के सहयोग से की जा रही है, जो भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग से संबद्ध है। यह जानकारी केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने दी।

केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की स्थापना की चौथी वर्षगांठ के अवसर पर यहां आयोजित प्रदर्शनी ‘लद्दाख प्राईड’ का उद्घाटन करने के बाद सभा को संबोधित कर रहे थे।

अभ्यारण्य में रहेंगी यह दूरबीनें (Astro Tourism)

डार्क स्काई रिजर्व पूर्वी लद्दाख के हानले गांव मे चांगथांग वन्यजीव अभयारण्य के एक हिस्से के रूप में स्थित होगा। यह भारत में खगोल-पर्यटन को बढ़ावा देगा और ऑप्टिकल, इन्फ्रा-रेड और गामा-रे दूरबीनों के लिए दुनिया के सबसे शीर्षस्थ स्थानों में से एक होगा।

इतने क्षेत्र में है इसका विस्तार (Astro Tourism)

1,073 वर्ग किलोमीटर में फैला, नाइट स्काई रिजर्व चांगथांग वन्यजीव अभयारण्य में स्थित है और भारतीय खगोलीय वेधशाला के निकट, भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान का दुनिया का दूसरा सबसे ऊंचा ऑप्टिकल टेलीस्कोप, 4500 मीटर की ऊंचाई पर हानले में स्थित है।

Astro Tourism : भारत में इस जगह शुरू होगा पहला नाइट स्काई अभ्यारण्य, खगोल पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
Astro Tourism : भारत में इस जगह शुरू होगा पहला नाइट स्काई अभ्यारण्य, खगोल पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

दुनिया में केवल इतने ही डार्क स्काई रिजर्व (Astro Tourism)

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा, “ऐसे समय में जब देश चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 सौर मिशन की सफलता का उत्सव मना रहा है, यह डार्क स्काई रिज़र्व दुनिया में अपनी तरह के केवल 15 या 16 में से एक होने के कारण, खगोलज्ञों को आकर्षित करेगा।”

लेह बेरी को मिल रहा प्रोत्साहन (Astro Tourism)

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा, केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ‘लेह बेरी’ को प्रोत्साहन दे रहा है, जो ठंडे रेगिस्तान का एक विशेष खाद्य उत्पाद है। मई 2018 में प्रधानमंत्री मोदी की लद्दाख यात्रा का उल्लेख करते हुए, डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सीबकथॉर्न की व्यापक खेती की प्रभावशाली सलाह दी है, जो “लेह बेरी” का स्रोत है।

संजीवनी बूटी का हो रहा उत्पादन (Astro Tourism)

मंत्री डॉक्टर सिंह ने कहा कि 15,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर तीन औषधीय पौधों की व्यावसायिक खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें “संजीवनी बूटी” शामिल है, जिसे स्थानीय रूप से “सोला” के नाम से जाना जाता है, जिसमें प्रचुर जीवन रक्षक और चिकित्सीय गुण हैं।

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