बालिका को सपने में दर्शन देकर दी सूचना, खुदाई करने पर निकली पाषाण प्रतिमा

आमला-जुन्नारदेव की सीमा पर स्थित कोकचीदेव की पहाड़ी और माता की मढैया की महिमा निराली

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आमला ब्लॉक के बिल्कुल अंतिम छोर पर स्थित इस दैवीय स्थान तक पहुंचना प्रारब्ध, संयोग, ईश्वरीय कृपा और भी बहुत कुछ का योग था। यहां के बारे में अधिक नहीं सुना होगा, देखने वाले चित्र में ऊर्जा को महसूस करें और अपने बोध से जाने कि कितनी शांति देने वाली जगह होगी ये। वैसे भी यह सब अनुभूति का विषय है।
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आमला-जुन्नारदेव की सीमा या ये कहें कि मध्यप्रदेश के जिला बैतूल और जिला छिंदवाड़ा की सीमा पर स्थित ये दिव्य स्थान मन्दिर नहीं बल्कि मढैया जैसा है। वैसे तो महज 2-3 साल पुराना है पर इसके होने की कहानी काफी चमत्कारों से भरी है।

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ग्रामवासी बताते हैं कि गांव की एक 7 वर्षीय बच्ची जिसका नाम ‘पूजनी’ है, उसे बार-बार मातारानी सपने में दर्शन देकर इस स्थान पर अपने होने की सूचना दे रही थी। पूजनी के सपनों की बात पहले तो लोगों ने मजाक में उड़ा दी पर सपनों का आना जारी रहा तो लोगों ने कोकचीदेव की पहाड़ी पर खुदाई करवाई। इसमें मातारानी की पाषाण की प्रतिमा निकली। इस प्रतिमा को पूरी आस्था के साथ वहीं स्थापित कर दिया गया और देखते-देखते आसपास के अंचल में ये स्थान आस्था का केंद्र बन गया। हर मंगलवार तो यहां श्रद्धालुओं की भीड़ देखने लायक होती है।

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आमला ब्लॉक के ग्राम भालदेही एवं छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव ब्लॉक के ग्राम चीतलभाटा के बीच बंटे इस स्थान के प्रति आमला के लोगों को ज्यादा जानकारी न हो परन्तु आसपास के सभी ग्रामों में अपार श्रद्धा है। आमला से करीब 32 किलोमीटर दूर स्थित ये स्थान जितनी आस्था से भरा है, उतना ही रोमांच भी समेटे है। शांत-नितांत वनों से होकर गुजरने वाले रास्ते, सतपुड़ा की ऊंची-ऊंची पहाड़ियाँ, घुमावदार पगडंडियां जैसी मनाली या उंटी में देखी होंगी, सतपुड़ा का असली अर्थ बताता सुरम्य वातावरण, मन्दिर क्षेत्र को जाती छोटी सी चढ़ाई और फिर पहाड़ी पर मातारानी की प्रतिमा और एक तरफ गहराई में दिखता छिंदवाड़ा जिले का चीतलभाटा गांव और दूसरी तरफ दूर से हाथ हिलाता सारणी का तवा बांध। आस्था हो तो भी जा सकते हैं यहां या असली वनप्रदेश देखने और रोमांच के शौकीन हो तब भी जा सकते हैं। एक अलग ही सकारात्मक ऊर्जा लेकर लौटोगे।

नोट: अगर जाने के इच्छुक हों तो मंगलवार का दिन चुने, अच्छी खासी भीड़ भी मिलेगी। फोर व्हीलर की अपेक्षा टू-व्हीलर से जाएं, असमान रास्ते की वजह से फोर-व्हीलर करीब डेढ़ किलोमीटर पहले खड़ी करनी पड़ेगी जबकि बाइक सिर्फ 600 मीटर पहले भालदेव बाबा के मन्दिर के पास। वैसे गांव वाले बहुत हेल्पफुल और भोले हैं, पूछते जाइयेगा, काफी आसानी हो जाएगी।

रुट: आमला-रतेड़ा-लादी-सुरनादेही-बीसीघाट-भालदेही-मन्दिर

फेसबुक पेज ‘शहर अपना सा- आमला’ से साभार…

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