पिता स्वास्थ्य विभाग में ड्राइवर, बेटा बन गया ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर

डॉ. अजय माहोरे ने आठनेर बीएमओ के रूप में किया ज्वाइन, पिता फुदन माहोरे बेहद खुश

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आठनेर बीएमओ का प्रभार संभालते हुए डॉ. अजय माहोरे।
  • उत्तम मालवीय, बैतूल © 9425003881
    एक पिता ही होता है जिसकी दिली तमन्ना होती है कि उसकी संतान उससे भी आगे बढ़े और ऐसा होते देख पिता की आत्मिक खुशी का ठिकाना नहीं रहता। यही खुशी आज स्वास्थ्य विभाग में ड्राइवर के पद पर पदस्थ फुदन माहोरे महसूस कर रहे हैं। उनका बेटा अजय माहोरे कुछ समय पहले न केवल डॉक्टर बना बल्कि आज उसने विभाग के बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले बीएमओ पद पर आठनेर में ज्वाइनिंग ले ली। बेटे के बीएमओ पद पर ज्वाइनिंग लेते ही पिता का सीना गर्व से फूल उठा।

    पिछले 31 साल से विभाग में ड्राइवर के पद पर सेवाएं दे रहे श्री माहोरे की दिली इच्छा थी कि वे अपने बच्चों को खूब पढ़ाए और बहुत आगे बढ़ाए। उनके बच्चे भी कड़ी मेहनत से उनकी यह इच्छा पूरी कर रहे हैं। उनके 4 बेटे हैं। इनमें से दूसरे नंबर के अजय माहोरे ने स्कूली शिक्षा बैतूल के ही सरस्वती स्कूल से ली और फिर भोपाल के आरकेडीएफ कॉलेज से एमबीबीएस कर डॉक्टर बन गए। इसके बाद डॉ. अजय माहोरे ने कोविड में आमला और फिर बारव्ही में सेवाएं दी। पिछले कुछ समय से वे जिला अस्पताल में पदस्थ थे। अब उन्हें बीएमओ आठनेर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। आज उन्होंने बीएमओ के रूप में ज्वाइन भी कर लिया और अपना कार्य प्रारंभ भी कर दिया है।

    परिवार से दो और डॉक्टर मिलेंगे
    श्री माहोरे बताते हैं कि बेटे के अपने ही विभाग में बीएमओ जैसे पद पर ज्वाइन करने पर उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं है। बेटे को अपने से आगे बढ़ता देख उनकी एक बड़ी ख्वाहिश पूरी हो गई है। वे बताते हैं कि बेटे की इस सफलता में कलेक्टर अमनबीर सिंह और सीएमएचओ डॉ. एके तिवारी के समय-समय पर मिलते रहे मार्गदर्शन की भी प्रमुख भूमिका रही। वे बताते हैं कि उनका सबसे बड़ा बेटा वन विभाग में वनरक्षक हैं, दूसरे नंबर का बेटा बीएमओ बन गया है। तीसरा बेटा भी एमबीबीएस कर चुका है और अभी इंटर्नशिप कर रहा है। वहीं चौथा एमबीबीएस के सेकंड इयर में है। जाहिर है कि इस परिवार से 2 और डॉक्टर जिले को मिलेंगे।
    डॉ. अजय माहोरे के पिता फुदन माहोरे।

    खुद भी हैं बेहद परिश्रमी कर्मचारी
    श्री माहोरे ने जितना त्याग और तपस्या अपने बच्चों को आगे बढ़ाने में की, उतने ही कठिन परिश्रम से अपने कर्तव्यों का निर्वहन भी करते हैं। पिछले कोविड के समय से उन्होंने आज तक एक दिन का भी अवकाश नहीं लिया। कोविड के लिए मॉस्क, सैनिटाइजर, जांच किट और वैक्सीन भोपाल से लाने का पूरा कार्य उन्होंने ही किया। उनकी मुस्तैदी और समर्पण भाव की विभागीय अधिकारी भी प्रशंसा करते हैं।
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