गुरु नानक देव जी के संदेश को आत्मसात करें आज की युवा पीढ़ी


वर्तमान में युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति से दूर होती जा रही है। आधुनिकता इन युवा पीढ़ी पर इतनी हावी होती जा रही है कि वह अपनी परंपराओं को कहीं ना कहीं दरकिनार करते नजर आ रहा है। ऐसे समय में गुरु नानक देव जी के उपदेशों को आत्मसात करने की आवश्यकता है। आज के युग में गुरु नानक देव जी के विचार युवाओं को नई दिशा प्रदान कर सकते हैं क्योंकि गुरु नानक देवजी ने सिख धर्म के संस्थापक होने के साथ ही संपूर्ण मानव धर्म में ज्ञान की रोशनी फैलाने का काम किया है। गुरु नानक देव जी ने सिख धर्म की मुख्य आधारशिला रखी। उन्होंने अंतर आत्मा से ईश्वर का नाम जपने, ईमानदारी एवं परिश्रम से कर्म करने तथा अपनी मेहनत से कमाए हुए धन से असहाय, दु:खी पीड़ित, जरूरततमंद इंसानों की सेवा करने का संदेश दिया। आज भी सिख समाज इस परंपरा का बखूबी निर्वहन कर रहा है। इसका जीता जागता उदाहरण बैतूल स्थित गुरुद्वारा है जहां आयोजित लंगर में सिख समाज के अलावा बड़ी संख्या में अन्य सामाजिक लोग भी लंगर में शामिल होते हैं। गुरुद्वारे में ऊंच-नीच, गरीब अमीर के भेदभाव को दूर कर सभी समानता के भाव से लंगर चखते हैं। नानक जी ने मनुष्यों में जाति, धर्म, प्रांत से परे होकर एकसाथ भोजन करने की परंपरा को आगे बढ़ाया और इसी तरह से गुरु के लंगर की परंपरा शुरू हुई और आज भी समस्त गुरुद्वारों में यह परंपरा निर्बाध रूप से चल रही है। आगे भी एक परंपरा को संजोए रखने के लिए युवा पीढ़ी को आगे आना होगा और धर्म कार्य में बढ़-चढ़कर सहयोग करना होगा। उल्लेखनीय है कि गुरुनानक देव भी अपने धर्म के सबसे बड़े गुरू माने जाते हैं और उन्होंने अपने संपूर्ण जीवन में गुरू की महिमा का व्याख्यान किया और समाज में प्रेम भावना को फैलाने का कार्य किया। गुरु नानक का जीवन आज भी सत्य, प्रेम तथा मानव उत्थान के लिए याद किया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा पर उनका प्रकाश पूरब है, हम सब संकल्प लें कि हम उनके विचारों को आत्मसात करेंगे।

  • जितेंद्र (बंटी) पेसवानी, बैतूल
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