Why Ber Offered to Lord Shiva: महाशिवरात्रि पर भोलेनाथ को क्यों चढ़ाया जाता है बेर, जानिए इसके पीछे छिपा गहरा राज
Why Ber Offered to Lord Shiva: साधारण फल बेर से जुड़ा है शिव भक्ति, सादगी और प्रकृति का गहरा संदेश, जो महाशिवरात्रि की पूजा को बनाता है खास

Why Ber Offered to Lord Shiva: महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की आराधना का सबसे महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। इस रात भक्त उपवास रखते हैं, पूरी रात जागरण करते हैं और विधि-विधान से शिवलिंग की पूजा करते हैं। जल, दूध, शहद और बेलपत्र के साथ शिव को बेर अर्पित करने की परंपरा भी प्राचीन समय से चली आ रही है। देखने में साधारण लगने वाला यह फल वास्तव में शिव भक्ति, प्रकृति और सादगी से जुड़ा गहरा संदेश देता है।
शिव भक्ति में सरलता का भाव
भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है, क्योंकि वे आडंबर और दिखावे से दूर रहते हैं। शैव परंपरा में यह माना जाता है कि शिव को प्रसन्न करने के लिए महंगे या दुर्लभ पदार्थों की नहीं, बल्कि सच्चे मन की जरूरत होती है। बेर जैसा सामान्य फल इसी भावना को प्रकट करता है। यह बताता है कि भक्ति का मूल्य बाहरी चमक-दमक से नहीं, बल्कि श्रद्धा और विश्वास से तय होता है।
तपस्वी शिव और प्रकृति से संबंध
भगवान शिव को योगी और तपस्वी के रूप में पूजा जाता है। उनका जीवन प्रकृति के बेहद करीब माना गया है। पर्वत, वन और प्राकृतिक वातावरण उनके निवास से जुड़े माने जाते हैं। लोक मान्यताओं के अनुसार कैलाश क्षेत्र में बेर के वृक्ष पाए जाते हैं। बेर का पेड़ कठोर परिस्थितियों में भी फल देता है, जो सहनशीलता और तपस्या का प्रतीक है। यही गुण शिव के व्यक्तित्व में भी दिखाई देते हैं।
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महाशिवरात्रि की पूजा में बेर का स्थान
महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग के अभिषेक के बाद भक्त बेलपत्र के साथ बेर भी अर्पित करते हैं। कई क्षेत्रों में इसे पूजा के बाद प्रसाद के रूप में भी वितरित किया जाता है। यह परंपरा दर्शाती है कि बेर केवल एक फल नहीं, बल्कि शिव को प्रिय भोग माना जाता है। प्राकृतिक रूप से प्राप्त होने वाली वस्तुओं को शुद्ध और पवित्र मानने की सोच भी इससे जुड़ी है।
मौसम और स्वास्थ्य से जुड़ा महत्व
महाशिवरात्रि का पर्व सर्दियों के अंतिम दौर में आता है, जब देश के अधिकतर हिस्सों में बेर आसानी से उपलब्ध होता है। आयुर्वेद में बेर को पाचन के लिए लाभकारी और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला फल माना गया है। व्रत और उपवास करने वाले भक्तों के लिए यह शरीर को ऊर्जा देने वाला फल समझा जाता है। इस तरह पूजा परंपराएं मौसम और स्वास्थ्य के संतुलन से भी जुड़ी दिखाई देती हैं।
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भक्ति का सच्चा संदेश देती है बेर
महाशिवरात्रि पर बेर चढ़ाने की परंपरा यह सिखाती है कि भगवान शिव को भव्य आयोजन नहीं, बल्कि सच्ची भावना चाहिए। यह पर्व आत्मसंयम, ध्यान और भीतर की शुद्धता पर जोर देता है। साधारण सा बेर इसी बात की याद दिलाता है कि शिव भक्ति का असली रूप सादगी, त्याग और विनम्रता में छिपा है।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं, लोक परंपराओं और सामान्य विश्वासों पर आधारित है। किसी भी धार्मिक उपाय को अपनाने से पहले संबंधित विषय के जानकार या विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित माना जाता है।
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