wheat price : गेहूं के अभी और बढ़ सकते हैं दाम, आम लोगों के चिंता का है विषय, कम हो रही है सरकारी खरीदी

नई दिल्ली. देश में इस वक्त गेहूं की खरीद (Wheat Procurement) की सीजन चल रहा है. मंडियों में आवक भी ठीक है. इसके बाद भी सरकारी खरीद इस बार कम हुई है. जानकार बताते हैं कि अब तक शुरुआती 20 दिनों में भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने पिछले साल की तुलना में 27% तक कम खरीद की है. और इसके कारणों की जब थोड़ी जांच-पड़ताल की गई तो ये आम आदमी के लिहाज से चिंता बढ़ाने वाले पाए गए हैं.
खबरों के मुताबिक इस बार एफसीआई ने 1 से 19 अप्रैल के बीच सिर्फ 9.9 मीट्रिक टन ही गेहूं खरीदा है. जबकि पिछले साल यानी 2021 में इसी अवधि के दौरान 13.6 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका था. मतलब 27% के आसपास कम खरीद हुई है. जबकि कुल सीजन में सरकार ने 44.4 मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है. और आगे ये लक्ष्य पूरा हो पाएगा या नहीं, अभी पुख्ता तौर पर कुछ कहा नहीं जा पा रहा है. इसके ठोस कारण हैं.
दूसरा कारण यह बताया जाता है कि रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) के कारण तमाम अन्य उत्पादों की तरह गेहूं की मांग भी पूरी दुनिया में काफी बढ़ी हुई है. इससे निजी व्यापारी किसानों से सीधी खरीद कर रहे हैं. ताकि उसे दूसरे देशों में भेजकर मुनाफा कमाया जा सके. इस कारण किसान सरकार के बजाय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2015 रुपए प्रति क्विंटल से ऊंची कीमतों पर निजी व्यापारी को गेहूं बेचने में दिलचस्पी ले रहे हैं.
दरअसल, यही आम आदमी के लिए चिंता का विषय है. क्योंकि आशंका ये है कि जैसे-जैसे सीजन गुजरेगा निजी व्यापारी अपने मुनाफे के लिए गेहूं की कीमतें और बढ़ा सकते हैं. अभी इस वक्त ही गेहूं की कीमतें 150 से 200 रुपए प्रति क्विंटल तक बढ़ चुकी हैं, ऐसा बताया जा रहा है. मतलब आम लोगों को इस बार महंगा गेहूं खरीदने के लिए तैयार रहना चाहिए.



