Wheat Crop Care: गेहूं की फसल में निकली बालियां, इस समय सावधानी नहीं बरती तो घट सकती है पैदावार
Wheat Crop Care: बाली निकलने से दाना भरने तक जरूरी है संतुलित सिंचाई, खाद प्रबंधन और रोग-कीट नियंत्रण

Wheat Crop Care: रबी की मुख्य फसल गेहूं इस समय बेहद अहम दौर में है। खेतों में अब बालियां दिखाई देने लगी हैं और यही वह समय है जब दाने बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। किसानों की थोड़ी सी असावधानी भी सीधे उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। इसलिए इस चरण में फसल की सही देखभाल बेहद जरूरी हो जाती है।
क्यों अहम है बालियां निकलने का चरण
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बाली निकलने से लेकर दाना भरने तक का समय फसल के लिए निर्णायक होता है। इस अवधि में पौधों को संतुलित पानी की जरूरत होती है। खेत में हल्की नमी बनी रहनी चाहिए। न तो सूखापन ज्यादा हो और न ही पानी जमा होने की स्थिति बने। अधिक जलभराव से जड़ें प्रभावित हो सकती हैं और फसल को नुकसान पहुंच सकता है।
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सिंचाई का रखें सही अंतराल
यदि मौसम में नमी कम है और वातावरण शुष्क है, तो 12 से 15 दिन के बीच सिंचाई करना उपयुक्त माना जाता है। ध्यान रखें कि तेज हवा या आंधी की आशंका हो तो उससे पहले ज्यादा पानी न दें। अधिक सिंचाई से पौधे गिर सकते हैं, जिसे लॉजिंग कहा जाता है। इससे दानों की गुणवत्ता और पैदावार दोनों पर असर पड़ता है।
खाद और पोषक तत्वों पर ध्यान जरुरी
इस अवस्था में पौधों को अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है। अगर पहले टॉप ड्रेसिंग नहीं की गई है तो हल्की मात्रा में नाइट्रोजन दी जा सकती है। हालांकि यूरिया का अधिक प्रयोग करने से बचना चाहिए। ज्यादा नाइट्रोजन से पौधे तो घने और हरे दिखते हैं, लेकिन दाना कमजोर रह सकता है और फसल गिरने की संभावना बढ़ जाती है।
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रोग और कीट से करें बचाव
बालियां निकलने के समय करनाल बंट, पत्ती झुलसा और रतुआ जैसे रोगों का खतरा बढ़ जाता है। किसानों को नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करना चाहिए। पत्तियों पर पीले या भूरे धब्बे दिखें तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर फफूंदनाशक का छिड़काव करें। इस दौरान माहू जैसे कीट भी नुकसान पहुंचा सकते हैं, इसलिए जरूरत होने पर अनुशंसित कीटनाशक सीमित मात्रा में उपयोग करें।
खरपतवार पर रखें नजर
हालांकि अधिकतर खेतों में इस समय तक खरपतवार नियंत्रण हो जाता है, फिर भी कहीं घास दिखाई दे तो उसे तुरंत हटाना चाहिए। खरपतवार पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं और फसल की बढ़वार प्रभावित कर सकते हैं। समय पर सिंचाई, संतुलित खाद और रोग-कीट नियंत्रण से बालियों में अच्छे दाने बनेंगे और बेहतर उपज मिल सकेगी।
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