Vindhya Metropolitan Region: भोपाल-इंदौर के बाद विंध्य में बनेगा एक और मेट्रोपॉलिटन रीजन, पांच जिलों को जोड़ने की तैयारी

Vindhya Metropolitan Region: मध्यप्रदेश में शहरी विकास की दिशा तेजी से बदल रही है। इंदौर-भोपाल के बाद अब सरकार की नजर विंध्य क्षेत्र पर है। रीवा दौरे के दौरान उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने ऐसे संकेत दिए हैं, जिससे साफ है कि आने वाले वर्षों में विंध्य के शहरों का स्वरूप और सुविधाएं पूरी तरह बदलने वाली हैं।

रीवा-सतना क्षेत्र को मिलेगी नई पहचान

रीवा पहुंचे उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने भाजपा कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि विंध्य क्षेत्र को भी मेट्रोपॉलिटन रीजन के रूप में विकसित करने की तैयारी की जा रही है। इस योजना के तहत विंध्य के पांच जिलों को आपस में जोड़कर एक नया मेट्रोपॉलिटन रीजन बनाया जाएगा। उनका कहना था कि जिस तरह भोपाल के आसपास के क्षेत्रों को मिलाकर मेट्रोपॉलिटन सिटी का ढांचा तैयार किया गया है, उसी तर्ज पर रीवा और सतना के आसपास के शहरों और इलाकों को शामिल किया जाएगा। इससे क्षेत्र को नई पहचान मिलेगी और विकास की गति तेज होगी।

शहरों और ग्रामीण इलाकों को मिलेगा समान लाभ

डिप्टी सीएम ने कहा कि मेट्रोपॉलिटन रीजन बनने से केवल शहर ही नहीं बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को भी फायदा होगा। बेहतर सड़कें, परिवहन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाएं एक ही ढांचे में विकसित की जा सकेंगी। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और युवाओं को बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह योजना लंबे समय को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है।

विंध्य एक्सप्रेस-वे से बदलेगी तस्वीर

पत्रकारों से बातचीत में राजेंद्र शुक्ला ने विंध्य एक्सप्रेस-वे को क्षेत्र के विकास की रीढ़ बताया। उन्होंने कहा कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम शुरू हो चुका है। भोपाल से लेकर सिंगरौली तक फोरलेन हाईवे का निर्माण किया जा रहा है। यह केवल एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि इससे व्यापार, उद्योग और आवागमन को नई रफ्तार मिलेगी। एक्सप्रेस-वे के जरिए विंध्य क्षेत्र का संपर्क प्रदेश के अन्य हिस्सों से और मजबूत होगा।

पेयजल व्यवस्था पर सरकार का जोर

रीवा में पेयजल को लेकर खर्च की गई राशि पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए उप मुख्यमंत्री ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि पिछले 20 वर्षों में रीवा शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था को लगातार बेहतर किया गया है। वर्ष 2003 में जब वे पहली बार विधायक बने थे, उस समय शहर को केवल 18 एमएलडी पानी की आपूर्ति हो रही थी। बाद में इसे बढ़ाकर 58 एमएलडी किया गया। आने वाले समय में यह क्षमता बढ़कर 95 एमएलडी तक पहुंचाई जाएगी। उन्होंने कहा कि इन दो दशकों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई है और वर्तमान में शहर में पानी की कोई गंभीर समस्या नहीं है।

नई योजना से रोजगार और पारदर्शिता

उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने मनरेगा को नए स्वरूप में लागू किए जाने की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि अब यह योजना विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण यानी वीबी जी रामजी के नाम से संचालित की जा रही है। इस नई व्यवस्था के तहत गांवों के समग्र विकास पर ध्यान दिया जाएगा। केंद्र सरकार ने इसके लिए बजट बढ़ाया है और 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी दी गई है।

भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम

शुक्ला ने कहा कि नई व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई प्रावधान जोड़े गए हैं। इससे गांवों में अधोसंरचना का विकास होगा और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना को लेकर कुछ लोग भ्रम फैला रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि इसे पहले से ज्यादा मजबूत और प्रभावी बनाया गया है।

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