Vikramaditya Vedic Clock: भारत हमेशा से समय गणना, खगोल शास्त्र और विज्ञान की धरोहर रहा है। वैदिक काल से लेकर आज तक भारतीय विद्वानों ने समय को मापने के लिए अलग-अलग पद्धतियों का विकास किया। आधुनिक युग में जब दुनिया ग्रेगोरियन कैलेंडर और 24 घंटे की घड़ी का उपयोग कर रही है, तब भारत ने अपनी पुरातन कालगणना और पंचांग पर आधारित घड़ी प्रस्तुत कर एक नई पहचान बनाई है।
इस पहल का नाम है विक्रमादित्य वैदिक घड़ी, जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 29 फरवरी 2024 को उज्जैन में लोकार्पित किया था और अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इसके मोबाइल एप संस्करण का शुभारंभ करने जा रहे हैं।
लोकार्पण का विशेष अवसर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 1 सितम्बर को सुबह 11 बजे अपने निवास पर इस अद्वितीय घड़ी और इसके मोबाइल एप का शुभारंभ करेंगे। इससे पहले सुबह 9 बजे शौर्य स्मारक से कॉलेज और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी “भारत का समय– पृथ्वी का समय” थीम पर बाइक और बस रैली निकालेंगे। रैली श्यामला हिल्स थाने तक जाएगी, जहाँ से यह पैदल मार्च में बदलकर मुख्यमंत्री निवास तक पहुंचेगी।
इस मौके पर युवाओं के लिए एक विशेष संवाद कार्यक्रम भी होगा, जिसका विषय होगा “भारत के समय की पुनर्स्थापना की पहल”। मुख्यमंत्री खुद युवाओं से सीधे संवाद कर उन्हें इस परंपरा और वैज्ञानिक नवाचार से जोड़ेंगे।
वैदिक घड़ी की यह है पृष्ठभूमि
वैदिक काल से ही भारत समय गणना का केंद्र रहा है। यहाँ तिथि, नक्षत्र, योग, वार, मास और पंचांग के आधार पर समय का आकलन किया जाता रहा है।
विक्रम संवत भारतीय कालगणना का सबसे प्राचीन और सटीक आधार माना जाता है।
भारतीय ऋषियों ने हजारों साल पहले आकाशीय पिंडों की गति के आधार पर समय मापन की जो विधि बनाई, वही आज भी सबसे विश्वसनीय मानी जाती है।
इसी परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए विक्रमादित्य वैदिक घड़ी तैयार की गई है। यह सिर्फ घड़ी नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर और वैज्ञानिक चेतना का प्रतीक है।
इस घड़ी की खास विशेषताएं
- भारतीय पंचांग पर आधारित
यह घड़ी केवल घंटे और मिनट नहीं बताती, बल्कि तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार और मास जैसी सूचनाएँ भी देती है। धार्मिक कार्यों और व्रतों के लिए आवश्यक जानकारी इसमें तुरंत उपलब्ध रहती है।
- 30 घंटे का वैदिक समय
पश्चिमी दुनिया 24 घंटे के आधार पर समय गणना करती है, जबकि वैदिक घड़ी में एक दिन को 30 घंटे में विभाजित किया गया है। इससे हर दिन के 30 शुभ-अशुभ मुहूर्तों की स्पष्ट जानकारी मिलती है।
- बहुभाषी सुविधा
यह घड़ी और इसका मोबाइल ऐप 189 से अधिक वैश्विक भाषाओं में उपलब्ध है। इसका अर्थ है कि चाहे भारत हो या विदेश, हर जगह के लोग अपनी मातृभाषा में इसका उपयोग कर सकेंगे।
- तकनीक और परंपरा का मेल
घड़ी में सिर्फ धार्मिक जानकारी ही नहीं, बल्कि तापमान, आर्द्रता, हवा की गति और मौसम संबंधी विवरण भी उपलब्ध हैं। यानी यह आधुनिक तकनीक और परंपरागत गणना दोनों का संगम है।
- हजारों वर्षों का काल गणना संग्रह
एप में महाभारत काल से लेकर 7000 वर्षों तक का पंचांग, त्यौहार और व्रत की दुर्लभ जानकारी संकलित की गई है। यह इसे सिर्फ घड़ी ही नहीं बल्कि एक डिजिटल ज्ञानकोष बनाता है।
- धार्मिक उपयोगिता
धार्मिक अनुष्ठानों के लिए शुभ मुहूर्त ढूँढना अब आसान होगा। घड़ी और एप में 30 प्रकार के मुहूर्त दिए गए हैं और इसके लिए अलार्म की सुविधा भी जोड़ी गई है।
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भारत के लिए सांस्कृतिक महत्व
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी केवल समय बताने का साधन नहीं है, बल्कि यह भारत की गौरवशाली परंपरा और वैज्ञानिक दृष्टि का पुनर्स्थापन है।
- यह घड़ी बताती है कि भारत ने हमेशा विरासत और विकास के बीच संतुलन साधा है।
- यह प्रकृति और तकनीक को जोड़ने वाली कड़ी है।
- यह भारत को विश्व स्तर पर एक अलग पहचान दिलाने वाला प्रतीक बनेगी।
मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी ने इसे भारत की सांस्कृतिक धुरी बताया है, जो वैश्विक भाषाओं, परंपराओं और आस्थाओं को एक मंच पर लाएगी।

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युवाओं से जुड़ाव
इस घड़ी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे सिर्फ परंपरा तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि युवा पीढ़ी और तकनीकी युग से भी जोड़ा गया है।
- मोबाइल एप के जरिए युवा कहीं भी, कभी भी इसका उपयोग कर सकेंगे।
- सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए यह तेजी से लोकप्रिय होगी।
- रैली और संवाद कार्यक्रम से यह संदेश दिया जाएगा कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और विज्ञान दोनों से परिचित होना चाहिए।
दुनिया में यह अपनी तरह की पहली पहल
दुनिया में यह अपनी तरह की पहली पहल है, जहाँ वेदों की गणना पद्धति को आधुनिक डिजिटल एप में ढाला गया है।
- इससे भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार वैश्विक स्तर पर होगा।
- विदेशी शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के लिए यह एक अध्ययन सामग्री भी बन सकती है।
- यह ऐप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहचान और मजबूती को और बढ़ाएगा।
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विरासत और नवाचार का संतुलन
भारत हमेशा से अपनी संस्कृति को विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जोड़ता आया है। वैदिक घड़ी उसी धारा का नया अध्याय है। यह घड़ी दिखाती है कि कैसे विरासत और आधुनिकता साथ-साथ चल सकती हैं।
भारतीय ज्ञान और विज्ञान की धरोहर का प्रतीक
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी केवल एक समय बताने वाली मशीन नहीं है, बल्कि यह भारतीय ज्ञान, संस्कृति और विज्ञान की धरोहर का प्रतीक है। इससे भारत की प्राचीन कालगणना पद्धति को पुनर्जीवन मिला है। यह घड़ी न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से उपयोगी है बल्कि तकनीकी और वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह प्रयास युवाओं को परंपरा और आधुनिकता के संगम से परिचित कराएगा। आने वाले समय में यह घड़ी और इसका एप भारत की पहचान बनकर पूरी दुनिया में हमारी सांस्कृतिक शक्ति और वैज्ञानिक सोच को स्थापित करेगा।
❓ विक्रमादित्य वैदिक घड़ी से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQ)
Q1. विक्रमादित्य वैदिक घड़ी क्या है?
👉 विक्रमादित्य वैदिक घड़ी एक विशेष घड़ी है जो भारतीय कालगणना, पंचांग और वैदिक समय प्रणाली पर आधारित है। इसमें सूर्योदय, तिथि, नक्षत्र, योग और त्योहारों की जानकारी मिलती है।
Q2. विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का नाम क्यों रखा गया?
👉 इस घड़ी का नाम राजा विक्रमादित्य के नाम पर रखा गया है, जिनके समय से विक्रम संवत भारतीय कालगणना में उपयोग किया जाता है।
Q3. इस घड़ी में क्या खासियत है?
👉 यह केवल समय ही नहीं बताती, बल्कि भारतीय ज्योतिषीय पंचांग, त्यौहार, ग्रह-नक्षत्र और सूर्योदय-सूर्यास्त का सटीक समय भी दिखाती है।
Q4. क्या विक्रमादित्य वैदिक घड़ी मोबाइल पर भी उपलब्ध है?
👉 जी हां, इसका मोबाइल ऐप भी उपलब्ध है जिससे कोई भी व्यक्ति इस घड़ी और पंचांग की जानकारी आसानी से पा सकता है।
Q5. विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का उद्देश्य क्या है?
👉 इसका उद्देश्य भारतीय वैदिक कालगणना और परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़कर लोगों तक पहुँचाना है।
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