UGC Equality Rules Supreme Court: यूजीसी के नए समानता नियमों पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, भेदभाव की परिभाषा को लेकर उठे सवाल
UGC Equality Rules Supreme Court: उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और भेदभाव के मुद्दे को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियम अब सुप्रीम कोर्ट की जांच के दायरे में आ गए हैं। इन नियमों को लेकर दायर याचिका में दावा किया गया है कि जाति आधारित भेदभाव को सीमित दायरे में परिभाषित किया गया है, जिससे सभी वर्गों को समान सुरक्षा नहीं मिल पा रही है।
दायर याचिका का क्या है आधार
यूजीसी ने हाल ही में ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026’ लागू किए हैं। इन नियमों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि इन प्रावधानों के जरिए भेदभाव की समस्या को अधूरा और एकतरफा तरीके से देखा गया है।
नियम 3(सी) पर मुख्य आपत्ति
याचिकाकर्ता के अनुसार, नियम 3(सी) केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से जुड़े छात्रों और शिक्षकों को सुरक्षा देता है। इससे सामान्य या गैर-आरक्षित वर्ग के लोगों को इस दायरे से बाहर कर दिया गया है, जबकि उनके साथ भी जाति के आधार पर भेदभाव या उत्पीड़न की घटनाएं हो सकती हैं।
जाति आधारित भेदभाव की सीमित परिभाषा
याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि यूजीसी के नियम यह मानकर चलते हैं कि जातिगत भेदभाव का शिकार सिर्फ आरक्षित वर्ग ही हो सकता है। इससे यह धारणा बनती है कि अन्य वर्गों के लोग कभी भेदभाव का सामना नहीं करते, जो वास्तविकता से मेल नहीं खाती।
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संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप
याचिकाकर्ता विनीत जिंदल ने कहा है कि यह व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार, अनुच्छेद 15(1) के तहत भेदभाव के खिलाफ अधिकार और अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के साथ जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन करती है।
सुप्रीम कोर्ट से क्या की गई मांग
याचिका में मांग की गई है कि नियम 3(सी) को मौजूदा स्वरूप में लागू करने पर रोक लगाई जाए। इसके साथ ही जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा को निष्पक्ष और संविधान के अनुरूप दोबारा तय किया जाए, ताकि हर प्रभावित व्यक्ति को सुरक्षा मिल सके।
अंतरिम राहत की अपील
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट से यह भी अनुरोध किया गया है कि केंद्र सरकार और यूजीसी को निर्देश दिए जाएं कि समान अवसर केंद्र और समानता हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाएं बिना किसी वर्गभेद के सभी के लिए उपलब्ध कराई जाएं।
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