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Anant Ambani’s Vantara : डॉक्टर कह चुके थे बचना मुश्किल, अनंत अंबानी के वनतारा ने बचा ली हथिनी और बच्चे की जान

Anant Ambani's Vantara : मुंबई। अनंत अंबानी को लोग अमूमन एक उद्योगपति के रूप में ही जानते हैं। यह बात अलग है कि वे और उनका परिवार कई सेवा प्रकल्प भी चलाते हैं। इन्हीं में से एक है 'वनतारा' प्रोजेक्ट। यह खासतौर से वन्य प्राणियों की सेवा का एक प्रकल्प है।

Anant Ambani’s Vantara : मुंबई। अनंत अंबानी को लोग अमूमन एक उद्योगपति के रूप में ही जानते हैं। यह बात अलग है कि वे और उनका परिवार कई सेवा प्रकल्प भी चलाते हैं। इन्हीं में से एक है ‘वनतारा’ प्रोजेक्ट। यह खासतौर से वन्य प्राणियों की सेवा का एक प्रकल्प है।

वनतारा प्रोजेक्ट, गुजरात के जामनगर में शांत परिदृश्य में बसा एक अद्वितीय मिशन का प्रतीक है जो कि संकट में वन्यप्राणियों के लिए करुणामय देखभाल और अत्याधुनिक चिकित्सा सहायता प्रदान करता है। यह उन्हें पुनर्वास के लिए समग्र दृष्टिकोण के साथ, एक प्राकृतिक और पोषणपूर्ण वातावरण प्रदान करता है, जो उनकी शारीरिक और इमोशनल वेल बिंग को बढ़ावा देता है।

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एक दूरदर्शी वन्यजीव संरक्षण इनिशिएटिव है और रिलायंस इंडस्ट्रीज और रिलायंस फाउंडेशन के समर्थन से समर्थित यह प्रोजेक्ट 3000 एकड़ में फैले विशाल जामनगर रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स के भीतर स्थित है। वनतारा दुर्व्यवहार, चोट या विलुप्त होने का सामना करने वाले जानवरों के लिए एक अभयारण्य के रूप में कार्य करता है।

हाल ही में अनंत अंबानी के इस सेवा प्रकल्प ने एक ऐसा कार्य किया जिसकी अब सर्वत्र सराहना हो रही है। इस प्रकल्प ने एक ऐसी हथिनी और उसके बच्चे की न केवल जान जिसके बारे में पशु चिकित्सक भी कह चुके थे कि इनका बचना अब नामुमकिन है। खास बात यह है कि इन दोनों को 3500 किलोमीटर दूर से लाकर यह कार्य किया गया।

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यह हथिनी प्रतिमा और उसका बच्चा त्रिपुरा के जंगल में थे। इनकी हालत बेहद खराब थी। इनके बारे में सूचना मिलने पर अनंत अंबानी के वनतारा ने त्रिपुरा से हथिनी प्रतिमा और उसके बच्चे को लाने छह वाहनों का एक काफिला जुटाया। जिसमें एम्बुलेंस, फीड व्हीकल और 22 स्टाफ मेंबर्स की एक डेडिकेटेड टीम शामिल थी। इस टीम ने केवल 24 घंटों में जामनगर से त्रिपुरा तक 3500 किलोमीटर की यात्रा शुरू की।

उनके स्थानांतरण से पहले वनतारा ट्रस्ट के एक पशु चिकित्सक ने त्रिपुरा में उनकी जांच की, जिसमें प्रतिमा पर कई घाव और चोट के निशान पाए गए, साथ ही अंगों में गंभीर कठोरता और एक आंख में ब्लाइंडनेस पाया गया। प्रतिमा दुबली हो गई थी जबकि उसका बच्चा भी पोषण की कमी से पीड़ित था।

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सिस्टमिक एंटीबायोटिक्स, पैन किलर्स, विटामिन की खुराक और नियमित ड्रेसिंग सहित स्थानीय पशु चिकित्सकों द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे उपचार के बावजूद डॉ. घाटारे ने एक चौंकाने वाली सच्चाई बताई थी कि प्रतिमा और उसके बच्चे माणिकलाल का जीवित रहना खतरे में है।

पेटा की एक रिलीज के अनुसार, प्रतिमा और उसके बछड़े को वन्यजीव संरक्षण कानूनों का उल्लंघन करते हुए, स्वामित्व प्रमाण पत्र के बिना अवैध रूप से रखा जा रहा था। एक पशु चिकित्सा एग्जामिनेशन से पता चला कि अनदेखी के खतरनाक संकेत, जिनमें क्षीणता, फोड़े-फुंसी और चोटें शामिल हैं, जो हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता को उजागर करते हैं।

Anant Ambani's Vantara : डॉक्टर कह चुके थे बचना मुश्किल, अनंत अंबानी के वनतारा ने बचा ली हथिनी और बच्चे की जान
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गौहाटी के डॉ. जहान सहित दो पशु चिकित्सकों के नेतृत्व में वनतारा की समर्पित टीम की विशेषज्ञ देखभाल के तहत, प्रतिमा और उसका बच्चा अब ठीक होने की राह पर हैं। चौबीसों घंटे चिकित्सा देखभाल और दयालु समर्थन के साथ, मां और बच्चे दोनों एक उल्लेखनीय परिवर्तन का अनुभव कर रहे हैं, जो बाधाओं को चुनौती दे रहा है और अपने भविष्य के लिए प्रेरणादायक आशा दे रहा है।

उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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