Rat Control in Wheat Crop: क्या आपके खेत में भी बढ़ रहा है चूहों का खतरा? गेहूं की फसल बचाने के जानें आसान और असरदार उपाय
Rat Control in Wheat Crop: रबी सीजन में चूहों की बढ़ती सक्रियता से 25 से 30 प्रतिशत तक नुकसान की आशंका, कृषि विभाग ने बताए घरेलू और रासायनिक नियंत्रण के तरीके

Rat Control in Wheat Crop: रबी सीजन में गेहूं की फसल जब बालियों से लहलहाने लगती है, तभी किसानों की चिंता भी बढ़ जाती है। इस बार कई क्षेत्रों में चूहों की बढ़ती सक्रियता ने खेती को गंभीर चुनौती दे दी है। खेतों में जगह-जगह बिल बनाकर चूहे फसल को अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे उत्पादन घटने की आशंका गहरा गई है।
गेहूं की बालियों और जड़ों पर हमला
कृषि विभाग के अनुसार, जैसे ही गेहूं में बालियां निकलना शुरू होती हैं, चूहों की हलचल तेज हो जाती है। वे पौधों की जड़ों को कुतर देते हैं और बालियां काटकर दानों को खराब कर देते हैं। इससे सीधे तौर पर पैदावार प्रभावित होती है। कई इलाकों में 25 से 30 प्रतिशत तक उत्पादन घटने की संभावना जताई जा रही है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ऐसे पहचानें खेत में चूहों की मौजूदगी
अधिकारियों ने बताया कि यदि खेत में ताजा खोदी गई मिट्टी दिखाई दे, बिलों के आसपास कटी हुई पत्तियां मिलें या पौधों की जड़ों के पास काले दानों जैसी बीट नजर आए, तो यह संकेत है कि चूहे सक्रिय हैं। समय रहते इनकी रोकथाम नहीं की गई तो नुकसान तेजी से बढ़ सकता है।
- यह भी पढ़ें : Wheat Crop Care: गेहूं की फसल में निकली बालियां, इस समय सावधानी नहीं बरती तो घट सकती है पैदावार
घरेलू उपाय से भी मिल सकता है फायदा
कृषि विभाग ने किसानों को कम खर्च वाले देसी उपाय अपनाने की सलाह दी है। पिसी लाल मिर्च, लहसुन का पेस्ट, नीम का तेल और पुदीना मिलाकर घोल तैयार कर खेत की मेड़ों पर छिड़काव करने से तेज गंध के कारण चूहे दूर रहते हैं। जिन स्थानों पर बिल दिखें, वहां फिनायल की गोलियां रखने से भी राहत मिल सकती है। इन तरीकों से फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है।
नियमित निगरानी और सिंचाई जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि खेतों का नियमित निरीक्षण बेहद जरूरी है। सुबह और शाम खेत का चक्कर लगाने से चूहों को मानवीय गतिविधि का एहसास होता है, जिससे वे ऐसे स्थानों से दूर रहते हैं। जहां खेतों में आवाजाही कम होती है, वहां चूहों का प्रकोप ज्यादा देखा जाता है। समय पर सिंचाई करने से बिलों में पानी भर जाता है और उनका ठिकाना खत्म हो जाता है।
- यह भी पढ़ें : एक एकड़ में करोड़ों की खेती! Malabar Neem Farming से 10 साल में बन सकती है 1 करोड़ की संपत्ति
जरूरत पड़ने पर करें दवाओं का प्रयोग
जानकारी के मुताबिक गेहूं में 25 से 30 प्रतिशत, चने में 15 से 20 प्रतिशत और मटर में करीब 30 प्रतिशत तक नुकसान संभव है। स्थिति गंभीर होने पर किसान जिंक फास्फाइड, रेजेंट दानेदार या कटरा फाइट्रा क्लोराइड जैसी दवाओं का उपयोग कर सकते हैं। हालांकि रासायनिक दवाओं का इस्तेमाल करते समय पूरी सावधानी बरतना आवश्यक है, ताकि फसल और पर्यावरण दोनों सुरक्षित रहें।
सोशल मीडिया पर बैतूल अपडेट की खबरें पाने के लिए फॉलो करें-
- हमारे यूट्यूब चैनल पर खबरें देखने के लिए : यहां क्लिक करें
- वाट्सअप चैनल पर खबरें पाने के लिए : यहां क्लिक करें
- फेसबुक ग्रुप पर खबरें पाने के लिए : यहां क्लिक करें
- फेसबुक पेज पर खबरें पाने के लिए : यहां क्लिक करें
- एक्स पर खबरें पाने के लिए: यहां क्लिक करें
देश-दुनिया की ताजा खबरें (Hindi News Madhyapradesh) अब हिंदी में पढ़ें| Trending खबरों के लिए जुड़े रहे betulupdate.com से| आज की ताजा खबरों (Latest Hindi News) के लिए सर्च करें betulupdate.com



