Powerjhanda Awash Ghotala : जिनकी होनी चाहिए जांच उन्हें ही बना रखा है जांचकर्ता, बहुत कुछ कह रही पुलिस और प्रशासन की चुप्पी
Powerjhanda Awash Ghotala: Those who should be investigated have been made investigators, the silence of the police and administration is saying a lot

▪️ उत्तम मालवीय, बैतूल
Powerjhanda Awash Ghotala : मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में पीएम आवास योजना में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। इस मामले के सामने आने पर कहने को तो रस्म अदायगी करते हुए कुछ लोगों पर पुलिस में एफआईआर दर्ज करा दी गई है, लेकिन लंबा समय बीतने के बावजूद किसी एक की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है। इसके अलावा जिस तरह से मामले की जांच चल रही है उसे देख कर ऐसा लगता ही नहीं कि असली दोषियों को जेल की सींखचों के पीछे पहुंचाने की कोई मंशा हो।
जानकारों के मुताबिक प्रधानमंत्री आवास योजना में स्वीकृति से लेकर भुगतान तक का पूरा फार्मेट तय है। उसमें ब्लाक समन्वयक (आवास) के अलावा भी अन्य लोगोंं की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि शाहपुर जनपद की पावरझंडा में 52 आवासों की राशि में घपला हुआ है तो किसी एक व्यक्ति को इसमें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।
ऐसी स्थिति में स्वीकृति से लेकर भुगतान तक की प्रत्येक प्रक्रिया में शामिल प्रत्येक कर्मचारी या अधिकारी को आरोपी बनाकर जांच होनी चाहिए थी। लेकिन, ऐसा नहीं किया गया। यहां पर जनपद शाहपुर के पंचायत समन्वयक अधिकारी राजेंद्र गडरिया और एकाउंट आफिसर धर्मेंद्र बाथरी की भूमिका की जांच ही नहीं की गई। जांच पर इस बात से ही सवाल खड़े होते हैं कि दोनों की जांच करने की जगह उन्हें जांच दल में रखा है। जिनकी जांच होनी चाहिए, वे ही जांच दल में शामिल हो तो ऐसे में कैसे निष्पक्ष जांच हो सकती है।
इस पूरे मामले में बड़ा सवाल यह है कि एक दो नहीं बल्कि पूरे 52 आवास के मामले में लगातार प्रक्रिया अनुसार खाते में किश्त डाली जा रही थी तो एकाउंट आफिसर ने खातों को वेरिफाई कर आपत्ति क्यों नहीं ली? यदि कोई आपत्ति ली थी तो कब ली थी और एक साल बाद जब मामले का खुलासा हुआ तब एकाउंट आफिसर को जांच दल में न रखकर उनको भी एक पक्ष बनाकर जांच क्यों नहीं की गई? जांचकर्ता अधिकारी जनपद सीईओ से भी जिपं सीईओ को स्पष्टीकरण लेना चाहिए, अन्यथा जांच दूषित मानी जाएगी।
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पंचायत समन्वयक अधिकारी ने कैसे की मॉनिटरिंग (Powerjhanda Awash Ghotala)
प्रधानमंत्री आवास योजना में पंचायत समन्वयक अधिकारी की भी बड़ी भूमिका है। स्पाट वेरीफिकेशन और मानीटरिंग करना भी उसकी जिम्मेदारी है। बगैर उसकी कंसलटिंग के भुगतान ही नहीं किया जा सकता है। आवास को जियो टैग नहीं किया जा सकता है। फिर ऐसी स्थिति में पंचायत समन्वयक अधिकारी की भूमिका की जांच करने की जगह उसे जांच दल में ही रखने का क्या उद्देश्य है। इस पर जिला पंचायत सीईओ को जनपद सीईओ से जवाब मांगना चाहिए और पीसीओ की भूमिका की जांच कराना चाहिए।
डीसीएस पावर तो सीईओ के पास, उनकी क्या भूमिका (Powerjhanda Awash Ghotala)
प्रधानमंत्री आवास योजना में डीसीएस का पावर जनपद सीईओ के पास होता है। पावरझंडा का जो आवास घोटाला हुआ है, उसमें पहली किश्त तत्कालीन एसीईओ एसएन श्रीवास्तव जो कि प्रभारी जनपद सीईओ थे, के द्वारा जारी की गई थी। वहीं बाकी की किस्त तत्कालीन सीईओ कंचन डोंगरे द्वारा जारी की गई थी। ऐसी स्थिति में उक्त दोनों अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी जांच में क्या स्पष्टीकरण है। क्या उनसे कोई जवाब मांगा गया, यदि नहीं तो क्या कारण है? ऐसे में जांच दूषित नहीं होती है?



