PM Kusum Yojana: पीएम कुसुम-ए से बंजर जमीन बन रही आमदनी का साधन, बिजली से भी कमाई कर रहे किसान
PM Kusum Yojana: मध्यप्रदेश में पीएम कुसुम-ए के तहत सौर संयंत्रों से आय बढ़ाने की पहल, किसानों को ऊर्जा दाता बनाने की दिशा में बड़ा कदम

PM Kusum Yojana: मध्य प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार ने एक और महत्वपूर्ण पहल को आगे बढ़ाया है। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान यानी पीएम कुसुम योजना के तहत अब किसान न सिर्फ अन्न उत्पादन कर रहे हैं, बल्कि बिजली उत्पादन के जरिए अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं। इसी क्रम में भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में 220 किसानों को विद्युत क्रय अनुबंध पत्र सौंपे गए।
किसानों की आर्थिक स्थिति हो रही मजबूत
भोपाल स्थित एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी के क्षेत्रीय कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सोच के अनुरूप राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं जिनसे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिले।
मंत्री ने कहा कि किसानों को खेती के लिए प्रतिदिन 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। साथ ही उनकी आय में वृद्धि के लिए भी सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि पीएम कुसुम-ए योजना के माध्यम से किसानों की बंजर और अनुपजाऊ भूमि अब कमाई का जरिया बन रही है।
बेहतर संचालन के लिए विशेष सेल का गठन
योजना के बेहतर संचालन और लाभार्थियों की सुविधा के लिए एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी में एक विशेष सेल बनाया गया है। यह सेल प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान योजना (पीएम कुसुम घटक-ए) से जुड़े हितग्राहियों को आवश्यक मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करेगा।
ऊर्जा मंत्री ने यह भी घोषणा की कि जो हितग्राही अनुबंध की प्रक्रिया पूरी करने के बाद सबसे पहले अपना कार्य पूर्ण कर बिजली उत्पादन शुरू करेगा, उसे पुरस्कृत किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य किसानों को तेजी से परियोजनाएं पूरी करने के लिए प्रेरित करना है।
कृषक कल्याण वर्ष में बड़ी योजनाओं को मंजूरी
कार्यक्रम में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को लगातार नई सुविधाएं दे रही है। कृषक कल्याण वर्ष के अंतर्गत 10 हजार 500 करोड़ रुपये की विभिन्न योजनाओं को स्वीकृति दी गई है।
उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि ऊर्जा दाता और उद्यमी भी बनें। उनका कहना था कि जब किसान आर्थिक रूप से मजबूत होंगे तभी समृद्ध मध्यप्रदेश का सपना साकार हो सकेगा। किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए ऊर्जा और नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग पूरी तत्परता से कार्य कर रहे हैं।
कार्यक्रम में मौजूद रहे यह अधिकारी
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव, सचिव ऊर्जा एवं एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध संचालक विशेष गढ़पाले तथा मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम के प्रबंध संचालक अमनवीर सिंह बैंस भी उपस्थित रहे।
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220 हितग्राहियों को मिले अनुबंध पत्र
प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा एवं उत्थान महाअभियान योजना के घटक ‘ए’ के तहत तीसरे चरण में निष्पादित विद्युत क्रय अनुबंध पत्र शुक्रवार को 220 लाभार्थियों को प्रदान किए गए। यह योजना भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य किसानों को ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करना है। साथ ही वर्ष 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से स्थापित विद्युत क्षमता की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत तक बढ़ाने के राष्ट्रीय लक्ष्य में सहयोग करना भी इसका प्रमुख उद्देश्य है।
पीएम कुसुम योजना में तीन घटक शामिल
पीएम कुसुम योजना की शुरुआत वर्ष 2019 में की गई थी। इसमें तीन घटक शामिल हैं – घटक-ए, घटक-बी और घटक-सी। घटक-ए के अंतर्गत 500 किलोवाट से 2 मेगावाट क्षमता तक के नवीकरणीय ऊर्जा आधारित बिजली संयंत्र स्थापित किए जाते हैं। इन्हें व्यक्तिगत किसान, किसानों के समूह, सहकारी समितियां, पंचायतें, किसान उत्पादक संगठन और जल उपयोगकर्ता संघ बंजर या परती भूमि पर लगा सकते हैं।
इन संयंत्रों को कृषि योग्य भूमि पर खंभों के सहारे भी स्थापित किया जा सकता है, जिससे सौर पैनलों के नीचे फसल उगाने की सुविधा बनी रहती है। पारेषण लागत और लाइन लॉस कम करने के लिए ऐसे संयंत्रों को उप-स्टेशन से पांच किलोमीटर के दायरे में स्थापित किया जाता है।
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अब तक शुरू हो चुकी 50 परियोजनाएं
दिसंबर 2025 से पहले 1000 मेगावाट क्षमता की स्वीकृति के मुकाबले 997 मेगावाट क्षमता के 603 विद्युत क्रय अनुबंध किए जा चुके हैं। इनमें से 80 मेगावाट क्षमता की 50 परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं, जबकि अन्य परियोजनाओं पर काम जारी है। दिसंबर 2025 में 425 मेगावाट क्षमता की स्वीकृति के विरुद्ध 403 मेगावाट के 226 अनुबंध निष्पादित किए गए। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा तय समयसीमा तक कुल 1400 मेगावाट क्षमता के 829 विद्युत क्रय अनुबंध किए जा चुके हैं।
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