PM Awas Yojana Pending Payment: अधूरे पीएम आवासों पर संकट, जियो टैगिंग बंद होने से अटक सकती है पूरी राशि
PM Awas Yojana Pending Payment: पीएम आवास योजना 1.0 के अधूरे मकानों पर मंडरा रहा खतरा, मार्च के बाद भुगतान रुकने की आशंका

PM Awas Yojana Pending Payment: प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जिन परिवारों को अपने पक्के घर का सपना पूरा होना था, उनके लिए चिंता बढ़ती नजर आ रही है। पहले चरण की योजना में जिन मकानों का निर्माण अब तक पूरा नहीं हो सका है, उनकी शेष सहायता राशि मिलने पर सवाल खड़े हो गए हैं। जियो टैगिंग से जुड़ी संभावित बंदी और प्रक्रियात्मक अड़चनों ने हितग्राहियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
बाकी राशि मिलने की संभावना कमजोर
प्रधानमंत्री आवास योजना का पहला चरण यानी पीएमएवाय 1.0 अब अपने अंतिम दौर में माना जा रहा है, जबकि सरकार ने दूसरा चरण पीएमएवाय 2.0 शुरू कर दिया है। इसी बीच बड़ी समस्या यह सामने आ रही है कि पहले चरण के कई मकान अभी अधूरे हैं। इन आवासों के लिए जो राशि बाकी है, उसके मिलने की संभावना कमजोर पड़ती दिख रही है। इसकी मुख्य वजह जियो टैगिंग से जुड़ा तंत्र है, जो योजना में भुगतान की प्रक्रिया का आधार माना जाता है।
जियो टैगिंग की भूमिका क्यों अहम
पीएम आवास योजना में हर किस्त जारी करने से पहले मकान की स्थिति की जियो टैगिंग की जाती है। इसी डिजिटल सत्यापन के आधार पर आगे की राशि स्वीकृत होती है। अब चर्चा है कि मार्च महीने से पीएमएवाय 1.0 के लिए इस्तेमाल होने वाला जियो टैगिंग एप बंद किया जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो अधूरे मकानों की जियो टैगिंग संभव नहीं रहेगी और बिना जियो टैगिंग के भुगतान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाएगी।
अधूरे मकानों को पूरा कराने की कोशिशें
अब तक शासन स्तर पर इन अधूरे आवासों को पूरा कराने के लिए कई कदम उठाए गए। हितग्राहियों को लगातार प्रेरित किया गया, समझाइश दी गई और काम शुरू न करने पर नोटिस भी जारी किए गए। कुछ मामलों में बैंक खाते होल्ड कराने जैसी सख्ती भी की गई। इसके बावजूद कई लाभार्थियों ने निर्माण कार्य पूरा नहीं कराया। फिलहाल शासन ने औपचारिक रूप से राशि रोकने की चेतावनी नहीं दी है, लेकिन हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि अधूरी राशि लंबे समय के लिए अटक सकती है।
बैतूल शहर में अधूरे आवासों की स्थिति
बैतूल शहर में पहले चरण के तहत कुल 2745 आवास स्वीकृत किए गए थे। इनमें से 2702 मकान पूरे हो चुके हैं, जबकि 43 आवास अब भी अधूरे हैं। इन 43 में से 5 ऐसे हैं, जिन्हें एक लाख रुपये की पहली राशि मिली थी और निर्माण केवल प्लिंथ लेवल तक ही पहुंच सका। वहीं 38 आवासों को दूसरी किस्त मिल चुकी है। इनमें 28 मकान लिंटर हाईट तक पहुंचे हैं और 10 मकानों में लिंटर डल चुका है, लेकिन फिनिशिंग का काम बाकी है। नगर पालिका ने इन सभी को अंतिम नोटिस जारी किए और नवंबर में इनके बैंक खाते भी होल्ड कराए, फिर भी कोई खास प्रगति नहीं हुई।
मृत्यु के मामलों में नई अड़चन
योजना में एक और बड़ी समस्या सामने आ रही है। जिन मामलों में हितग्राही की मृत्यु हो गई है, वहां उनके उत्तराधिकारियों के नाम पर योजना जारी रखने या अगली किस्त देने के लिए एप्रूवल नहीं मिल पा रहा है। एप्रूवल न मिलने के कारण जियो टैगिंग नहीं हो रही और भुगतान की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ पा रही है।
महीनों से लटका एक प्रकरण
बैतूल शहर में ऐसा ही एक मामला कई महीनों से अटका हुआ है। यह प्रकरण नवंबर से पहले एप्रूवल के लिए भेजा गया था। राज्य स्तर से 25 नवंबर को मंजूरी मिल गई, लेकिन केंद्र स्तर से अब तक स्वीकृति नहीं आई है। पहले ऐसे मामलों में दो महीने से भी कम समय में एप्रूवल मिल जाया करता था। इस बार हो रही देरी से यह आशंका जताई जा रही है कि केंद्र स्तर पर ऐसे मामलों की स्वीकृति प्रक्रिया धीमी या बंद हो सकती है।
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दूसरे चरण की प्रगति की यह स्थिति
पीएम आवास योजना के दूसरे चरण में बैतूल शहर के लिए 262 आवास स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 224 लाभार्थियों के खातों में पहली किस्त की राशि जमा कर दी गई है। हालांकि पहले चरण के अधूरे मकानों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे कई परिवारों का पक्का घर पाने का सपना अधर में लटका हुआ नजर आ रहा है।
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