Personal Loan Income Eligibility: पर्सनल लोन आज की जरूरत बनता जा रहा है। शादी, इलाज, घर की मरम्मत या किसी अचानक आए खर्च के लिए लोग बिना किसी संपत्ति को गिरवी रखे लोन लेना पसंद करते हैं। हालांकि पर्सनल लोन लेना जितना आसान दिखता है, उतना होता नहीं है।
बैंक और एनबीएफसी लोन देने से पहले आवेदक की आमदनी को सबसे अहम आधार मानते हैं। इसे ही आय पात्रता (Income Eligibility) कहा जाता है। अगर आपकी मासिक आय बैंक के तय मानकों पर खरी नहीं उतरती, तो लोन मिलने में परेशानी आ सकती है। हालांकि कुछ ऐसे तरीके भी हैं, जिनसे कम आय होने पर भी पर्सनल लोन लिया जा सकता है।
पर्सनल लोन के लिए क्यों जरुरी है आय
बैंक यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि लोन लेने वाला व्यक्ति हर महीने किस्त समय पर चुका सके। चूंकि पर्सनल लोन बिना गारंटी दिया जाता है, इसलिए बैंक जोखिम कम करने के लिए आय, नौकरी की स्थिरता और क्रेडिट स्कोर को ध्यान में रखते हैं। इसी वजह से हर बैंक अपनी अलग-अलग न्यूनतम आय सीमा तय करता है।
एचडीएफसी बैंक की आय शर्तें
एचडीएफसी बैंक के एक्सप्रेस पर्सनल लोन के लिए न्यूनतम मासिक नेट आय 25 हजार रुपये रखी गई है। यह नियम मुख्य रूप से प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों और पब्लिक सेक्टर उपक्रमों में काम करने वाले कर्मचारियों पर लागू होता है। नियमित सैलरी और स्थिर नौकरी यहां अहम मानी जाती है।
एक्सिस बैंक के नियम
एक्सिस बैंक में ग्राहक और गैर-ग्राहक के लिए आय की शर्त अलग-अलग है। अगर आप पहले से एक्सिस बैंक के ग्राहक हैं, तो 15 हजार रुपये मासिक आय पर भी लोन मिल सकता है। वहीं नए ग्राहकों के लिए न्यूनतम आय 25 हजार रुपये तय की गई है। इससे साफ है कि बैंक अपने पुराने ग्राहकों को कुछ राहत देता है।
कोटक बैंक की आय सीमा
कोटक बैंक में अगर आपका सैलरी अकाउंट है, तो न्यूनतम मासिक आय 25 हजार रुपये होनी चाहिए। अन्य आवेदकों के लिए यह सीमा 30 हजार रुपये तक जाती है। वहीं कोटक बैंक के कर्मचारियों के लिए यह शर्त थोड़ी नरम है और उनके लिए 20 हजार रुपये मासिक आय भी पर्याप्त मानी जाती है।
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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के नियम
एसबीआई में सरकारी और डिफेंस सेक्टर के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मासिक नेट आय 20 हजार रुपये रखी गई है। वहीं कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने वालों के लिए यह सीमा 25 हजार रुपये है। सरकारी कर्मचारियों को बैंक कम जोखिम वाला मानता है, इसलिए उन्हें कुछ रियायत मिल जाती है।
शहर और नौकरी का भी पड़ता असर
आप किस शहर में रहते हैं, इसका भी लोन पर असर पड़ता है। मेट्रो और टियर-1 शहरों में रहने का खर्च ज्यादा होता है, इसलिए वहां आय की शर्त भी ऊंची रखी जाती है। छोटे शहरों और कस्बों में यह सीमा अपेक्षाकृत कम हो सकती है। इसी तरह सरकारी और पीएसयू कर्मचारियों को बैंक अधिक भरोसेमंद मानते हैं।
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कम सैलरी में लोन पाने के यह विकल्प
अगर आपकी सैलरी कम है, तो लोन मिलना मुश्किल हो सकता है। कई बार बैंक सीधे आवेदन खारिज कर देता है। ऐसे में गारंटर जोड़ने से मदद मिल सकती है। इसके अलावा लोन की रकम कम रखकर और चुकाने की अवधि बढ़ाकर भी मंजूरी मिलने की संभावना बढ़ जाती है। अच्छा क्रेडिट स्कोर भी कम आय के बावजूद लोन दिलाने में अहम भूमिका निभाता है।
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